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जीवन में सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं प्रबंधकीय कौशल : स्वामी अभेदानंद

लखनऊ। भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय में “बनें एक उत्कृष्ट एवं कुशल प्रबंधक” विषय पर ज्ञानवार्त्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डर्बन, दक्षिण अफ्रीका स्थित चिन्मय मिशन के प्रमुख आचार्य स्वामी अभेदानन्द की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने वेद, वेदांग, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता आदि भारतीय ज्ञान-परंपरा से संदर्भित करते हुए प्रबंधन के व्यावहारिक पक्षों, इसके विभिन्न आयामों और व्यक्ति के जीवन में इसकी सार्थक उपयोगिता आदि विषयों को अपनी अनूठी और विशिष्ट शैली में समझाया, जिसका उपस्थित श्रोताओं ने भरपूर रसास्वादन किया। स्वामी अभेदानन्द के तार्किक, ओजपूर्ण और धाराप्रवाह व्याख्यान ने सभाकक्ष में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति पर अपनी जीवन्त बौद्धिकता की छाप छोड़ी। 

इस अवसर पर मण्डल मुख्य महाप्रबंधक शरद चांडक ने स्वामी अभेदानन्द का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न से सम्मान करते हुए भारतीय स्टेट बैंक परिवार के लिए समय निकालने और प्रेरक वक्तव्य के लिए उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की। मंडल महाप्रबन्धकगण एडी रत्न तेजा, अरुण कुमार साहू एवं आनन्द बिक्रम इस अवसर पर उपस्थित रहे। उप महाप्रबन्धक एवं मंडल साख अधिकारी पवन कुमार अरोड़ा ने स्वामी अभेदानन्द के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शक व्याख्यान निश्चय ही मंडल के स्टाफ सदस्यों के व्यक्तित्व विकास और उनकी प्रबंधन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा और उनके कार्य-जीवन संतुलन में भी प्रभावी भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह कार्यक्रम आयोजित करने के लिए राजभाषा विभाग की प्रशंसा करते हुए इसे आगे भी जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन मुख्य प्रबन्धक (राजभाषा) दिवाकर मणि ने किया।

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