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नहीं बढ़ा पार्षद कोटा, हंगामे के बीच बिना चर्चा के प्रस्ताव पास

प्रदर्शन व नारेबाजी, 25 प्रतिशत की मांग पर 10-10 मिले सफाई कर्मी 

2.50 करोड़ को लेकर अड़े पार्षद, चार बार स्थगित हुआ सदन

लखनऊ। नगर निगम सदन के दूसरे दिन पार्षद कोटा व 25 प्रतिशत सफाई कर्मी बढ़ाने की मांग पर खूब हंगामा हुआ। विपक्ष की ओर से पार्षद निधि (वार्ड विकास प्राथमिकता निधि) 1.25 करोड़ से बढ़ाकर 2.50 करोड़ रुपये किए जाने की मांग की गई। विपक्ष ने जोरदार तरीके से अपनी मांग रखी। वेल तक पहुंचे और मेयर से नोकझोंक भी हुई। इसके चलते चार बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। महापौर सुषमा खर्कवाल व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने करीब पौन घंटे तक मंथन किया। महापौर व नगर आयुक्त की ओर से स्वीकृति न मिलने पर सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर फिर हंगामा शुरू हो गया। जिसका सत्ता पक्ष ने भी समर्थन किया। पार्षदों की मांग को दरकिनार कर प्रत्येक वार्ड में 10-10 सफाई कर्मचारी दिए जाने की स्वीकृति दी गई। इसे भी बिना चर्चा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी गई। विपक्ष के हंगामे के बीच 32 प्रस्तावों में से 29 प्रस्ताव पास कर दिए गए। अंत में महापौर पार्षदों व पत्रकारों के सवालों से बचते हुए सदन स्थगित कर चली गईं।

सुबह ग्यारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। वार्ड संख्या 60 के आगे से पार्षदों को बोलने का मौका दिया गया। भोजनावकाश यानी करीब चार बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई। प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान 26 जून 2023 को कार्यकारिणी समिति की कार्यवाही की पुष्टि पर कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहन ने पार्षद निधि बढ़ाए जाने की मांग की। कहा महापौर की निधि 30 करोड़ व नगर आयुक्त की निधि 10 करोड़ हो गई। वार्ड विकास प्राथमिकता निधि ढ़ाई करोड़ किए जाने की मांग रखी। इस पर महापौर व नगर आयुक्त ने सहमति नहीं दी। सपा पार्षद दल नेता कामरान बेग, सै. यावर हुसैन रेशू, सुरेंद्र बाल्मीकी, देवेंद्र सिंह यादव जीतू, कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी, मुकेश सिंह चौहान, बसपा पार्षद अमित चौधरी व अन्य सपा के पार्षद वेल में आ गए और महापौर से कोटा बढ़ाने की मांग पर अड़ गए। मेयर व नगर आयुक्त के सहमति न देने पर विपक्षी पार्षद वहीं धरने पर बैठ गए और ढाई करोड़ को लेकर नारेबाजी करने लगे। इस पर महापौर ने दस मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया और सदन से बाहर जाकर नगर आयुक्त के साथ मंथन किया। 

करीब पौन घंटे बाद 6:50 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो उन्होंने सीधे प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करा दी। इस पर विपक्ष भी खड़ा हो गया और पार्षद कोटा ढाई करोड़ करने की मांग पर सहमति मांगने लगे। महापौर की ओर से कोई जवाब न मिलने पर हंगामा शुरू कर दिया। फिर से पूरा विपक्ष धरने पर बैठ गया और कोटा बढ़ाने की मांग पर अड़ गए। ममता, अमित और रेशू की महापौर से बहस शुरू हो गई। इस पर भाजपा पार्षदों ने उन्हें समझाने व डायस से हटाने का प्रयास किया। इधर, हंगामे के बीच अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार सिंह ने सारे प्रस्ताव पढ़ दिए, जिसमें से तीन प्रस्तावों को छोड़कर बिना चर्चा के ही महापौर ने पास कर दिया। इसके बाद उन्होंनें सदन की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित करते हुए नगर निगम मुख्यालय से चली गर्इं। पत्रकारों को सदन में लिए गए फैसलों की जानकारी देने के लिए भी नहीं रूकी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महापौर सुषमा खर्कवाल सदन की कार्यवाही मनमाने तरीके से बीच में छोड़कर चली गर्इं। इससे पहले पार्षदों ने 25 प्रतिशत सफाई कर्मी आउटसोर्स से बढ़ाए जाने, मृतक, रिटायर्ड व स्थानांतरित कर्मियों के स्थान पर अतिरिक्त कर्मी दिए जाने की मांग की। महापौर की ओर से सहमति न होने पर हंगामा शुरू कर दिया। महापौर ने दस मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। नगर आयुक्त से विचार विमर्श के बाद दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर महापौर ने बताया अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव, पंकज श्रीवास्तव, ललित कुमार व एनएसए डॉ. सुनील कुमार रावत की टीम डाटा जुटा रही है। बाद में पार्षद कोटे के हंगामे के आगे यह प्रस्ताव भी पास नहीं हो सका।  

इको ग्रीन कंपनी ने किया 471 करोड़ का नुकसान

कूड़ा कलेक्शन व कचरा निस्तारण करने वाली इकोग्रीन कंपनी ने नगर निगम को 471 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। कंपनी ने 275 करोड़ रुपये के कूड़ा निस्तारण प्लांट को कबाड़ कर दिया। कूड़े का निस्तारण न करने की वजह से 100 करोड़ रुपये एनजीटी ने नगर निगम पर जुमार्ना लगाया। रविवार को नगर निगम सदन की बैठक में कूड़े को लेकर डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने सदन को यह जानकारी दी। अब जो 20 लाख मीट्रिक टन कचरा प्लांट पर ढेर है, उसके निस्तारण पर 96 करोड़ रुपये और खर्च करने पड़ रहे हैं। शासन से यह बजट नगर निगम को दिया गया है। इस पर पार्षद रंजीत सिंह ने कहा बड़ी बड़ी कपंनियों से कूड़ा लिया जाता है जबकि सरकार व नगर निगम पर बोझ बढ़ रहा है।  

पप्पू और रावण पर फिर भिड़े पार्षद

रविवार को भी नगर निगम सदन में पप्पू व रावण को लेकर कांग्रेस पार्षद मुकेश चौहान तथा भाजपा पार्षद भृगुनाथ शुक्ला एक बार फिर  भिड़ गए। महापौर सुषमा खर्कवाल ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद पप्पू तथा रावण शब्द को सदन से हटाने का आदेश दिया। शनिवार को सदन में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ  अमर्यादित टिप्पणी हुई थी। मुकेश चौहान ने इसे रिकार्ड से बाहर करने की मांग रखी। महापौर के यह कहते ही भाजपा के पार्षद खड़े हो गए। उनका कहना था कि किसी का नाम लेकर टिप्पणी नहीं की गई है। ऐसे में इसे सदन की कार्यवाही से न निकाला जाए। उधर कांग्रेस के पार्षदों ने इसका स्वागत किया। इस बीच कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान व भाजपा भृगुनाथ शुक्ला फिर आमने-सामने आ गए। दोनों में विवाद होने लगा। महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि कल भी आप लोग सदन में लड़े थे। हंगामा किया था पर सदन की बैठक खत्म होने के बाद दोनों लोग गले मिलते हुए गए। आज फिर इसी तरह का काम कर रहे हैं।

हर वार्ड में स्ट्रीट लाइट, सीवर व पानी की समस्या 

नगर निगम सदन में रविवार को भी बाकी बचे पार्षदों ने अपने वार्ड की समस्या उठाई। पार्षदों ने स्ट्रीट लाइट, पेयजल, पार्क तथा सीवर व कब्जे की समस्याओं को लेकर सदन को घेरा। गंदे पेयजल की सप्लाई पर प्रशासन से जवाब मांगा तो विभूति खंड गोमती नगर के वीआईपी क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। सीवर उफनाने की समस्या हर गली मोहल्ले में है।

राजीव गांधी वार्ड प्रथम के पार्षद संजय राठौर ने कहा कि विजय खंड में जहां वीआईपी लोग रहते हैं, अंधेरा रहता है। सफाई नहीं रहती है। खाली जमीन पर पार्क बनाया जाए। उपमन्यु पार्क में तीन करोड़ से काम हुए थे, लेकिन यह पार्क अनुरक्षण के अभाव में बदहाल हो रहा है। नगर आयुक्त ने जांच के निर्देश दिए। भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड से पार्षद मान सिंह यादव ने सवालों की बौछार कर दी। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में पानी की टंकी 12 साल से जर्जर खड़ी है। राम-राम बैंक चौराहे के पास डिवाइडर रोड़ पर मेनहोल से केबिल गुजर रही है। काम्पेक्टर की आड़ में कब्जा किया गया है। सार्वजनिक शौचालयों में यूरिनल के लिए वसूली होती है। अतिक्रमण से लोग परेशान हैं। शंकरपुरवा वार्ड तृतीय से उमेश सनवाल ने कहा मैं अपने वार्ड को आदर्श वार्ड बनाना चाहता हूं, लेकिन सफाई कर्मी उपलब्ध कराए जाएं। जानकीपुरम द्वितीय से राजकुमारी मौर्या ने सहारा स्टेट के पास जमीन पर कब्जा होने की बात रखी। इंदिरा नगर वार्ड से पार्षद पूजा जसवानी ने कहा उनके यहां 300 पोलों पर लाइट नहीं जल रही है। चिनहट द्वितीय वार्ड के पार्षद शैलेंद्र वर्मा ने कहा की उनका वार्ड वीआईपी क्षेत्र में आता है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, हाईकोर्ट, डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल व संस्थान, हयात होटल सहित तमाम बड़े कार्यालय हैं। इसके बावजूद यहां की स्ट्रीट लाइट खराब है। वार्ड के 5 गांवों में पेयजल की समस्या है। एलडीए ने पाइप लाइन डलवाई थी लेकिन नलकूप नहीं लगाया गया। भरवारा, गुलाम हुसैन पुरवा तथा विजयीपुर जैसे इलाके में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। 

स्मार्ट सिटी के नाम किया जा रहा बेढ़ंगा काम

जेसी बोस वार्ड के पार्षद सैयद यावर हुसैन रेशू ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर कैसरबाग, लालबाग जैसे इलाकों में सड़कों के दोनों किनारों पर आठ आठ फुट चौड़ा फुटपाथ बनाया जा रहा है। इससे सड़कों की चौड़ाई कम हो रही है। जाम लग रहा है। नालियां एक फुट ऊंची बना दी गई हैं, जिससे पानी नहीं निकल पाता है। उन्होंने कहा कि कल्याण कोष से मृतक कर्मचारियों के परिजनों को राहत नहीं मिल पा रही है। 

दस साल बाद भी नहीं हटे अतिक्रमण

मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में 2013 में नालों पर हुए अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, लेकिन आज तक हटाए नहीं गए। इसकी वजह से नाले साफ नहीं हो पाए।

सभी वार्ड को भी मॉडल बनाया जाए

चौक वार्ड के पार्षद अनुराग मिश्रा अन्नू ने नालों की सफाई न होने पर सवाल पूछा। कहा कि गुलाला घाट पर विद्युत शवदाह गृह बना था। यह 6 महीने से खराब चल रहा है। वार्ड में 18 कर्मचारी कम करने से सफाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि सीवर की 17 डैमेज लाइन में से तीन की समस्या का ही निदान हुआ। कई पार्षदों ने सदन में कहा कि जिस तरह पेपर मिल कॉलोनी को मॉडल वार्ड बनाया जा रहा, उसी तरह उनके वार्डों को भी मॉडल बनाया जाए। नगर आयुक्त ने कहा कि यह मॉडल वार्ड की शुरूआत है। आने वाले दिनों में शहर के कुछ अन्य वार्डों को भी मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

अधिशासी अभियंता के खिलाफ नाराजगी

सदन में नगर निगम के जोन 6 के अधिशासी अभियंता तथा आरआर विभाग के प्रभारी पीके सिंह के खिलाफ पार्षदों ने नाराजगी जताई। भाजपा, सपा, कांग्रेस व बसपा पार्षदों ने एक स्वर में अधिशासी अभियंता के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। कहा कि वह काम नहीं सुनते हैं। खुद भाजपा पार्षद दल के नेता सुशील तिवारी पम्मी भी खड़े हो गए। कहा कि ऐसे इंजीनियर को जवाब देने के लिए खड़ा किया जाए। वह खुद खड़े होकर जवाब दें कि वह आखिर ऐसा क्यों करते हैं। पार्षदों के फोन क्यों नहीं उठाते हैं। उनकी समस्याओं का निदान क्यों नहीं कराते। नगर आयुक्त ने इंजीनियर का बीच-बचाव किया। खुद जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सदन की बैठक के बाद सभी लापरवाह लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। कहा कि नगर निगम के सभी अधिकारी व कर्मचारियों को चौबीस घंटे, 365 दिन काम करना होगा। अगले सदन में कार्रवाई न होने पर उनकी जिम्मेदारी बनेगी। मेयर ने भी कहा पार्षदों की ओर से उन्हें जवाब देना होगा।  

दुकानों के बाहर स्टील की रेलिंग लगेगी

शहर के प्रमुख चौराहों के 50 मीटर के दायरे में यातायात सुचारु रखने के लिए अब दुकानों के बाहर स्टील की रेलिंग लगाई जाएगी। इससे दुकानों का सामान बाहर नहीं रखा जाएगा और उनके सामने गाड़ियां भी नहीं खड़ी होंगी। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने मुख्य अभियंता महेश वर्मा को सदन में ही निर्देशित किया कि वह ऐसे चौराहों पर तत्काल स्टील की रेलिंग लगाने का काम शुरू कराएं। 31 अगस्त तक इसे पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। इसका फैसला मुख्यमंत्री के यहां बैठक में हुआ है। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्ट्रीट लाइट लगेंगी, आरआर वर्कशाप में लगेगा सीएजनी पंप

लखनऊ। नगर निगम के पुराने क्षेत्रों व सीमा विस्तारित 88 गांवों में सड़क, सफाई व मार्ग प्रकाश व्यवस्था सुधरेगी। शहर के पुराने इलाकों में मार्ग प्रकाश व्यवस्था के लिए 731 लाख रुपये खर्च होंगे वहीं 88 गांवों में स्ट्रीट लाइट के लिए 4682 लाख रु के प्रस्ताव को पास कर दिया गया। इसे शासन भेजा जागा। इसके अलावा आरआर वर्कशाप में सीएनजी पंप लगाने व सफाई व्यवस्था के लिए गाड़ियां खरीदे जाने का प्रस्ताव को पास कर दिया गया है। 

शहर में नई स्ट्रीट लाइट लगाने व मेंटीनेंस की जिम्मेदारी निजी संस्था ईईएसएल को दी गई है लेकिन यह कंपनी काम नहीं कर रही है। इसी वजह से अब नगर निगम ने नई एलईडी लाइट लगाने का जिम्मा उठाया है। इस काम के लिए 731 लाख रुपये का प्रस्ताव को पास किया गया। विस्तारित 88 गांव भी एलईडी लाइट से रौशन होंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री सृजन योजना के अंतर्गत 4682 लाख रु का प्रस्ताव पास कर दिया गया है। शासन से मंजूर होने व बजट मिलने के बाद काम हो सकेगा। इसके अलावा 141 लाख रुपये खर्च कर विभिन्न वार्डों, स्थलों व मार्गों पर मार्ग प्रकाश व्यवस्था व जर्जर पोलों को बदलने का काम होगा। 

मिनी कार्यशाला की स्थापना व नई गाड़ियां खरीदेगा निगम

केंद्रीय कार्यशाला में गाड़ियों की मरम्मत के लिए 225 लाख से तीन शेड की मरम्मत व दो नए शेड का निर्माण, गिंदनखेड़ा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में कार्यरत विभागीय वाहनों की मरम्मत के लिए 190 लाख, नए सीएनजी वाहनों के र्इंधन के लिए आरआर वर्कशाप में 200 लाख, ट्रेलर के लिए 48 लाख तथा मिनी कार्यशाला की स्थापना के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इनके अतिरिक्त शहर में सफाई व नाला सफाई के लिए गाड़ियां व मशीनें खरीदी जाएंगी। इनमें 50 लाख की 2 के्रन, 110 लाख में 10 बायोडिग्रेबल मोबाइल टॉयलेट, करीब एक करोड़ से छोटी-बड़ी 20 हाइड्रोलिक क्रेवलर, 137 लाख में दो फांसी मशीन, 416 लाख में 10 डंपर, 76 लाख में 2 मिनी सीवर जेटिंग मशीन, 98 लाख में 2 ट्रंक माउंटेड जेटिंग मशीन, 63.60 लाख में 60 डंपर प्लेसर बिन्स, 110 लाख में 1 पोंटोन माउंटेड कन्वेयर सिस्टम, 60 लाख में ट्रक माउंटेड मोबाइल फ्यूल डिस्पेंसिंग यूनिट, 416 लाख में 16 स्कीड स्टिर लोडर व 1088 लाख में 32 टिपर तथा 88 लाख में 1100 नए हत्थू ठेले खरीदे जाएंगे। 

कूड़ा प्रबंधन पर फैसला छह सितंबर के बाद 

लंच के बाद करीब डेढ़ घंटे की बहस के बाद भी ईकोग्रीन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। नगर निगम प्रशासन की ओर से प्रस्ताव दिया गया कि शिवरी प्लांट में पहुंचने वाले फ्रेश वेस्ट के निस्तारण के लिए अलग से कंपनी का चयन कर लिया जाए। शिवरी प्लांट में करीब 18 लाख मीट्रिक टन कूडेÞ का पहाड़ बन गया है। कंपनी की ओर से कूड़े का निस्तारण न किए जाने से नए कूडेÞ की जगह नहीं मिल रही है। स्थिति यह है कि प्लांट में 75 प्रतिशत हिस्से में कूडेÞ के पहाड़ बना हुआ है। ऐसे में जोनवार कूड़ा उठान के लिए जिम्मेदारी दी जाए। इस पर पार्षदों ने कहा कार्यदायी संस्थाओं को ही सफाई के साथ-साथ डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी दे दी जाए। लेकिन सेंकेडरी व्यवस्था क्या होगी? ईकोग्रीन को हटाने में विधिक अड़चन तो नहीं? कार्यदायी संस्थाओं को ही डीजल, गाड़ी का जिम्मा भी लेना होगा, इसकी क्या व्यवस्था होगी? यूजर चार्ज की वसूली का क्या सिस्टम होगा? इन सवालों के चलते निर्णय लिया गया कि पहले वार्ड का डाटा जुटा लिया जाए। वहीं ईकोग्र्रीन को 60 दिन की टर्मिनेशन नोटिस दी गई है जिसका समय छह सितंबर को पूरा हो रहा है। इसके बाद ही इस सम्बंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा। तब तक के लिए नगर निगम वेंडरों के माध्यम से काम कराएगा। 

पुराने व नए कूड़ा निस्तारण के लिए टेंडर होगा

प्लांट पर पहुंचने वाले फ्रेश कूडेÞ का निस्तारण किए जाने के लिए टेंडर मांग लिया जाए।  इसके साथ ही पुराना करीब 18 लाख टन कूडे के निस्तारण को लेकर भी नई कंपनी का चयन होगा। 

गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने के लिए गठित होगी पीएमयू

नगर निगम में अधिकारियों, कर्मचारियों की कमी है। इससे विकास कार्यों को कराना चुनौती भरा है जबकि विस्तार होने के बाद 88 गांव और बढ़ गए हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्वक काम कराने व सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट(पीएमयू) का गठन होगा। इसमें स्ट्रक्चर इंजीनियर, मैनेजर सिविल, मैनेजर इलेक्ट्रिकल, सहायक मैनेजर, अर्बन प्लानर, पर्यावरण अभियंता, स्वच्छ भारत मिशन विशेषज्ञ व प्रिक्योरमेंट एक्सपर्ट को रखा जाएगा। 

तंबाकू उत्पाद के प्रचार पर लगेगी रोक

शहर में अब किसी भी प्रकार की होर्डिंग्स, बैनर, ग्लोसाइन समेत अन्य किसी भी तरह के प्रचार माध्यमों से तंबाकू उत्पादों का प्रचार नहीं होगा। एक निजी संस्था के प्रस्ताव पर सदन ने प्रस्ताव कर दिया है। ऐसा प्रचार करने वालों पर जुर्माना लगेगा। 

जलकल के कर्मचारियों पर फैसला नहीं

जलकल विभाग के कर्मचारियों को 250 रुपये प्रतिमाह भत्ता दिए जाने व अवकाश के मद में भुगतान किए जाने पर फैसला लिया गया कि मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी एवं मुख्य नगर लेखा परीक्षक की संयुक्त समिति का परीक्षण कराकर आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। 


यह निर्णय भी लिये गये

कार्यदायी संस्था से तैनात सफाई श्रमिकों का मानदेय 388 रुपये किया गया

झूलेलाल वाटिका के आवंटन में धार्मिक, कामर्शियल के लिए अलग अलग किराया तय किया गया। 


कांग्रेस पार्षद ने महापौर पर लगाया विश्वासघात का आरोप

कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने आरोप लगाए कि महापौर ने 110 वार्ड के लोगों के साथ विकास के नाम पर विश्वासघात किया है। महापौर ने अपनी विकास निधि 30 करोड़ कर ली लेकिन वार्ड विकास निधि 1.25 करोड़ से नहीं बढ़ाई जबकि सदन स्थगित करके सभी पार्षद दल के नेताओं को कमरे में बुलाकर बात करने के बाद चार पार्षदों को कमरे में बुलाकर 1.50 करोड़ करने व जीएसटी अलग से देने का वादा किया और कहा कि सदन में पहुंचकर इसकी घोषणा करेंगे मगर सदन में पहुंचते ही महापौर अपने वादे से मुकर गईं। महापौर ने कमरे में सफाई कर्मचारी देने पर भी सहमति दी थी, सदन में आते ही मुकर गर्इं। महापौर ने सत्ता पक्ष के पार्षदों को संतुष्ट करने के लिए त्योहार के नाम पर 10-10 कर्मचारी देने का प्रेस नोट जारी किया है जबकि सदन में इसकी चर्चा हुई ही नहीं।

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