लखनऊ में श्रीकांत वर्मा की पुण्यतिथि पर साहित्यकार सम्मेलन
'सत्ता के अंतर्द्वंद्वों को उजागर करते थे श्रीकांत' : दानिश आजाद
लखनऊ, 25 जून 2026। एकाग्रता इण्टरनेशनल फाउंडेशन और श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी संस्थान में साहित्यकार सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार श्रीकांत वर्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में साहित्य जगत की 25 हस्तियों को सम्मानित किया गया।
समकालीन राजनीति के अंतर्द्वंद्वों को प्रभावी ढंग से उजागर किया
मुख्य अतिथि अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि श्रीकांत वर्मा हिंदी की 'नई कविता' धारा के प्रमुख कवि, कथाकार और पत्रकार थे। उन्होंने ऐतिहासिक मिथकों और आधुनिक यथार्थ का उपयोग कर सत्ता, मानवीय महत्वाकांक्षा और समकालीन राजनीति के अंतर्द्वंद्वों को प्रभावी ढंग से उजागर किया।
'गागर में सागर भरना उनकी शैली थी:
विशिष्ट अतिथि राज्य सूचना आयुक्त दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि श्रीकांत वर्मा की कविताएं तत्कालीन राजनीति और सत्ता की क्रूर महत्वाकांक्षा पर गहरी चोट करती थीं। वे समाज के अभाव, भुखमरी और मानवीय संघर्ष को वाणी देने वाले कवि थे। कम शब्दों में गहरा अर्थ भरना उनकी प्रमुख शैली थी।
संघर्ष से सत्ता तक का सफर:
विशिष्ट अतिथि संघ के धर्म जागरण प्रमुख अभय जी ने कहा कि घर की जिम्मेदारियों के बीच श्रीकांत वर्मा ने कभी संघर्ष का साथ नहीं छोड़ा। बीमारी के आखिरी दिनों में अमेरिका में भी उन्होंने डायरी में लिखा- `नहीं जानता यह डायरी जारी रहेगी या यह इसका अंतिम पन्ना होगा मगर इतना अवश्य कहूंगा, मैं जीना चाहता हूं।`
इंदिरा गांधी के करीब, कांग्रेस महासचिव बने:
एकाग्रता इण्टरनेशनल फाउंडेशन के निदेशक डॉ. शक्ति कुमार पाण्डेय ने बताया कि 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीब आने से वे कांग्रेस के महासचिव बन गए। कांग्रेस की राजनीति में कदम रखने पर टाइम्स समूह ने उन्हें 'दिनमान' से अलग कर दिया था।
मगध' से मिली पहचान, साहित्य अकादमी सम्मान:
विशिष्ट अतिथि स्वाभिमान मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गार्गी तिवारी ने कहा कि श्रीकांत वर्मा उन गिने-चुने लोगों में रहे जिनकी पहुंच साहित्य से सियासत तक बनी। वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। 'मायादर्पण', 'जलसाघर' और 'मगध' जैसी कृतियों के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
मुक्तिबोध से मिली प्रेरणा:
अति विशिष्ट अतिथि खादी मंत्री राकेश कुमार सचान ने बताया कि 1954 में गजानन माधव 'मुक्तिबोध' से भेंट के बाद वे बिलासपुर में 'नयी दिशा' पत्रिका का संपादन करने लगे। बाद में नरेश मेहता के साथ दिल्ली में 'कृति' पत्रिका का संपादन किया।
25 साहित्यकार सम्मानित:
समारोह में पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह, डॉ. रामकठिन सिंह, डॉ. डी.एस. शुक्ला, डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित, डॉ. अमिता दुबे, नवीन शुक्ल, डॉ. शोभा दीक्षित 'भावना', सूर्य कुमार पांडेय, अविरल आनन्द, लोकेश त्रिपाठी, मनोरमा लाल, डॉ. मिथिलेश दीक्षित, डॉ. रश्मि शील, साहित्य भूषण कमलेश मौर्य 'मृदुल', सुरेन्द्र अग्निहोत्री, संजीव जायसवाल "संजय", अशोक जैन, नीरज अरोड़ा, कविता तिवारी, डॉ. ज्योत्सना सिंह, वेदव्रत बाजपेयी, मनुव्रत बाजपेयी, विजय त्रिपाठी, डॉ. मंजू शुक्ला को सम्मानित किया गया।
संस्था के राष्ट्रीय समन्वयक हिमांशु पाण्डेय ने बताया कि श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 सितम्बर 1931 को बिलासपुर में हुआ था। समाजसेवी मुरलीधर आहूजा ने कहा कि समृद्ध परिवार के बावजूद उन्हें कठिन दिन देखने पड़े और 1952 तक बेकारी झेलनी पड़ी।


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