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रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं ली सैलरी, FY26 में रिलायंस को ₹95,754 करोड़ का प्रॉफिट

Mukesh Ambani Zero Salary Reliance Industries Profit 2026

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल कंपनी से कोई वेतन नहीं लिया है। कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक FY 2020-21 से FY 2025-26 तक उन्होंने रिलायंस से न सैलरी ली, न भत्ता, न कोई सुविधा, न रिटायरमेंट लाभ, न कमीशन और न ही कोई स्टॉक ऑप्शन। यह फैसला कॉरपोरेट जगत में एक अलग उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य बातें: रिलायंस का रिकॉर्ड मुनाफा और शून्य सैलरी

  • लगातार छठा साल: वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 तक मुकेश अंबानी ने रिलायंस से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया।
  • कोविड काल में लिया था फैसला: जून 2020 में महामारी के दौरान देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्वेच्छा से पूरा वेतन छोड़ने का निर्णय लिया था, जो अब भी जारी है।
  • अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा: FY26 में रिलायंस ने ₹95,754 करोड़ का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।

रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद फैसले पर अडिग

खास बात यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना अब तक का सबसे बड़ा सालाना मुनाफा कमाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में रिलायंस का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) ₹18,19,103 करोड़ (यानी 191.8 अरब डॉलर) रहा। इसके बावजूद मुकेश अंबानी अपने वेतन न लेने के फैसले पर पूरी तरह अडिग रहे।

पहले भी 12 वर्षों तक सीमित रखा था वेतन

कोविड से पहले भी मुकेश अंबानी अपने वेतन को लेकर एक संयमित रुख रखते थे। रिलायंस के कारोबार और मुनाफे में लगातार बड़ी वृद्धि के बावजूद, उन्होंने वित्त वर्ष 2008-09 से अपने कुल वार्षिक वेतन को ₹15 करोड़ पर सीमित कर दिया था। यह सीमा लगातार 12 वर्षों तक जारी रही थी।

"कंपनी के अनुसार रिलायंस की रेम्यूनरेशन पॉलिसी प्रदर्शन आधारित है और उद्योग की प्रचलित व्यवस्था के अनुरूप है। इस नीति की पूरी समीक्षा मानव संसाधन, नामांकन और पारिश्रमिक समिति (HR, Nomination and Remuneration Committee) द्वारा की जाती है।"

कॉरपोरेट गवर्नेंस: दुनिया भर में शीर्ष अधिकारियों (CEOs) के भारी-भरकम वेतन और भत्तों को लेकर अक्सर शेयरधारकों के बीच सवाल उठते रहे हैं। ऐसे दौर में रिलायंस जैसे बड़े साम्राज्य के प्रमुख का छह वर्षों तक 'शून्य वेतन' लेना कॉरपोरेट गवर्नेस के लिहाज से एक मिसाल माना जा रहा है।

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