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वेतन न मिलने से टीबी कर्मचारियों के घरों में छाया आर्थिक संकट, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

वेतन न मिलने से टीबी कर्मचारियों के घरों में छाया आर्थिक संकट, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

लखनऊ | न्यूज़ डेस्क | अपडेटेड: 2026-05-10

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 'राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम' (NTEP) के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारियों के सामने इस समय आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले मार्च माह से मानदेय (वेतन) न मिलने के कारण कर्मचारी दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। इस संबंध में उत्तर प्रदेश क्षयरोग वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संघ (रजि.) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

दो माह से रुका है मानदेय, परिवार भुखमरी की कगार पर

संघ के प्रदेश अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्र ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कार्यरत कर्मचारी विगत दो माह से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। मानदेय न मिलने से कर्मचारियों के सामने बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया, दवाइयां और दैनिक राशन जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन हो गया है। कई परिवारों के सामने तो भोजन तक का संकट उत्पन्न हो गया है।

"कर्मचारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार करने में इनका बड़ा योगदान है, लेकिन आज इनके खुद के घरों में अंधेरा है।" — करुणा शंकर मिश्र

गंभीर बीमारियों और मानसिक तनाव के बीच कार्य

टीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अभियान में सेवा देने वाले ये कर्मचारी वर्तमान में भारी मानसिक तनाव में हैं। स्वास्थ्य विभाग का हिस्सा होने के बावजूद इन संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान भारत जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी के चलते बीमार कर्मचारी अपना और अपने परिवार का इलाज कराने में भी असमर्थ हैं।

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मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें:

  • रुका हुआ मानदेय: मार्च माह से लंबित वेतन को तत्काल जारी किया जाए।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा: सभी स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि हजारों परिवारों को राहत मिल सके।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही मानदेय जारी नहीं किया गया, तो उनके सामने कार्य बहिष्कार के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हैं।

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