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SGPGI लखनऊ: कर्मचारियों की बड़ी मांग, नॉन-टीचिंग स्टाफ की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 63 साल करने के लिए सीएम योगी को भेजा ज्ञापन

एसजीपीजीआई कर्मचारी महासंघ मांग

SGPGI कर्मचारी महासंघ का हल्लाबोल: गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 63 वर्ष करने की उठी मांग

लखनऊ (21 जून, 2026): राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) में सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर एक बार फिर मांग तेज हो गई है। एसजीपीजीआई कर्मचारी महासंघ ने संस्थान के सभी **गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों (नॉन-टीचिंग स्टाफ)** की सेवानिवृत्ति आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 63 वर्ष करने की पुरजोर मांग उठाई है। इस संबंध में महासंघ की ओर से माननीय मुख्यमंत्री और राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन भी भेजा गया है।

📋 कर्मचारी महासंघ की मुख्य मांगें और आपत्तियां:

  • 3 वर्ष का सेवा विस्तार: अनुभवी कर्मचारियों की विशेषज्ञता को बनाए रखने के लिए सभी नियमित नॉन-टीचिंग स्टाफ की सेवानिवृत्ति उम्र 63 वर्ष की जाए।
  • पुनर्नियुक्ति व्यवस्था का विरोध: वर्तमान में कई विभागों में स्टाफ की कमी दूर करने के लिए रिटायरमेंट के बाद 3 वर्ष की पुनर्नियुक्ति दी जा रही है। महासंघ का कहना है कि इसके बजाय सीधे सेवा विस्तार देना अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी होगा।
  • उम्र की असमानता दूर हो: संस्थान में शिक्षण संकाय (टीचिंग स्टाफ) की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष और निदेशक की 68 वर्ष है, तो गैर-शैक्षणिक स्टाफ को भी समान अवसर मिले।
  • मरीज और संस्थान हित: अनुभवी प्रशासनिक और तकनीकी स्टाफ मरीजों को बेहतर सेवाएं देने और नए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।

"पुनर्नियुक्ति के बजाय नियमित रूप से मिले समान अवसर"

कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार और महामंत्री सीमा शुक्ला ने संयुक्त बयान में कहा कि वर्तमान में संस्थान के भीतर ही दोहरे मानदंड चल रहे हैं। जब संस्थान में मैनपावर की कमी के कारण रिटायरमेंट के बाद चुनिंदा लोगों को 3 वर्ष तक पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) के माध्यम से 63 वर्ष की आयु तक काम करने का अवसर मिल रहा है, तो इसे सभी नियमित गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू क्यों नहीं किया जाता?

"गैर-शैक्षणिक कर्मचारी प्रशासनिक, तकनीकी और संस्थागत कार्यों का दशकों का अनुभव रखते हैं। इनकी विशेषज्ञता संस्थान की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में बेहद मददगार है। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि संस्थान और मरीज दोनों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस विसंगति को तत्काल दूर किया जाए।"
— धर्मेश कुमार (अध्यक्ष) एवं सीमा शुक्ला (महामंत्री), SGPGI कर्मचारी महासंघ

कई विभागों में गहरा सकता है स्टाफ का संकट

महासंघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, संस्थान में बड़ी संख्या में अनुभवी कर्मचारी या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या आने वाले महीनों में होने वाले हैं। ऐसे में नए भर्ती होने वाले स्टाफ को संभालने और तकनीकी व चिकित्सीय सेटअप को सुचारू रखने के लिए इन अनुभवी कर्मचारियों का सेवा विस्तार बेहद जरूरी है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और राजभवन की तरफ से पीजीआई कर्मचारियों की इस जायज और पुरानी मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।

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