📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...
Voice of Capital को Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएं
ताजा खबरों के लिए हमें Google पर Follow करें

Pages

69000 शिक्षक भर्ती: लखनऊ शिक्षा निदेशालय पर आरक्षित वर्ग का बड़ा धरना, 21 जुलाई की सुनवाई से पहले बढ़ा तनाव

69000 शिक्षक भर्ती: बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर अभ्यर्थियों का जोरदार धरना, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

69000 शिक्षक भर्ती: बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर अभ्यर्थियों का जोरदार धरना, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

📍 लखनऊ | 📅 14 जुलाई
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया 6 सप्ताह का समय बीतने के बाद भी लिस्ट री-विजिट न होने से आक्रोश।
  • निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय के गेट के बाहर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने की नारेबाजी।
  • 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होनी है अगली सुनवाई; हीलाहवाली न करने की अभ्यर्थियों की चेतावनी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की चर्चित 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का सब्र एक बार फिर टूट गया है। अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में पीड़ित अभ्यर्थी निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय के सामने पहुंचे और गेट के बाहर नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के मुताबिक काम नहीं कर रही है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को दिया गया 6 सप्ताह का समय पूरा बीत चुका है, लेकिन अभी तक लिस्ट को री-विजिट नहीं किया गया है। गौरतलब है कि 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार के अधिवक्ता ने 13 अगस्त 2024 के हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार लिस्ट री-विजिट करने के लिए 6 सप्ताह का समय मांगा था। इसी हीलाहवाली को लेकर अभ्यर्थियों ने सरकार को घेरा है।

"69000 शिक्षक भर्ती मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 21 जुलाई को होनी है। ऐसे में अभ्यर्थी अब सरकार की तरफ से किसी भी तरह की टालमटोल या ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।"

आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप

अभ्यर्थी विक्रम और अमित मौर्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की इस भर्ती में आरक्षण नियमों की गंभीर अनदेखी की गई है, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के हजारों योग्य अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। पीड़ित छात्र पिछले लगभग 6 वर्षों से लगातार सड़कों पर और न्यायालयों में अपने हक और आरक्षण नियमों के सही पालन की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि लंबे आंदोलन और जटिल न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक स्पष्ट फैसला सुनाया था, जिसमें नियमों का पालन करते हुए पात्र अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति दिए जाने का आदेश था। लेकिन इसके बावजूद आरक्षित वर्ग के इन पीड़ितों को अभी तक न्याय नसीब नहीं हुआ है।

"दलित और पिछड़ों को न्याय देने में देरी"

धरने में शामिल धनंजय गुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार दलित और पिछड़े समाज के इन पीड़ित छात्रों को न्याय देने में लगातार हीलाहवाली कर रही है। प्रशासन की इसी बेरुखी के चलते मजबूर होकर अभ्यर्थियों को बारिश और भीषण गर्मी के बीच दोबारा निदेशालय के बाहर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें