केजीएमयू शिक्षकों को एसजीपीजीआई के समान मिलेंगे सेवानिवृत्तिकालीन लाभ: 1 जनवरी 2016 से प्रभावी व्यवस्था; डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर आदेश जारी
लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के वरिष्ठ संकाय सदस्यों (चिकित्सा शिक्षकों) के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब 65 वर्ष की अधिवर्षिता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाले केजीएमयू के शिक्षकों को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के शिक्षकों के समान सेवानिवृत्तिकालीन (रिटायरमेंट) लाभ प्रदान किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में केजीएमयू प्रशासन को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
📌 शासनादेश एवं निर्णय के प्रमुख बिंदु:
- समानता का सिद्धांत: केजीएमयू के शिक्षकों को अब एसजीपीजीआई के समकक्ष सेवानिवृत्तिकालीन परिलाभ मिलेंगे।
- प्रभावी तिथि: यह व्यवस्था 1 जनवरी 2016 से भूतलक्षी प्रभाव (नियम के दायरे में) से लागू मानी जाएगी।
- दिवंगत शिक्षकों को संबल: जिन सेवानिवृत्त शिक्षकों का निधन हो चुका है, उनके आश्रित परिवारों को भी नियमानुसार बकाया देय लाभ मिलेंगे।
- 65 वर्ष अधिवर्षिता आयु: जहां 65 वर्ष आयु वृद्धि के लिए अलग से विकल्प नहीं दिया गया था, वहां सामान्य सेवानिवृत्ति मानकर लाभ अनुमन्य होंगे।
- समयबद्ध निस्तारण: चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने केजीएमयू कुलसचिव को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
📊 केजीएमयू सेवानिवृत्तिकालीन लाभ: पात्रता एवं नियम
| पात्रता श्रेणी | कट-ऑफ तिथि | अनुमन्य परिलाभ |
|---|---|---|
| सेवानिवृत्त शिक्षक (65 वर्ष आयु) | 01 जनवरी 2016 के बाद | SGPGI के समकक्ष पूर्ण सेवानिवृत्ति लाभ |
| दिवंगत शिक्षकों के आश्रित | 01 जनवरी 2016 के बाद दिवंगत | परिवार को नियमानुसार देय वित्तीय लाभ |
| बिना विकल्प वाले सामान्य मामले | 65 वर्ष पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त | सामान्य रूप से हुई सेवानिवृत्ति के आधार पर लाभ |
लंबे समय से लंबित प्रकरण का हुआ स्थायी समाधान
केजीएमयू के चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60/62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने के उपरांत सेवानिवृत्तिकालीन लाभों में एसजीपीजीआई के समान समता (Parity) का मामला लंबे समय से लंबित चल रहा था। विकल्प के अभाव और तकनीकी पेच के कारण सैकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों और दिवंगत डॉक्टरों के परिवारों के भुगतान अटके हुए थे।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा केजीएमयू के कुलसचिव (Registrar) को प्रेषित पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार के निर्णय के तहत 65 वर्ष की आयु में सामान्य रूप से सेवानिवृत्त हुए सभी संकाय सदस्यों को यह सुविधा बिना किसी विसंगति के तत्काल प्रभाव से दी जाए।
"शिक्षकों और आश्रित परिवारों को मिलेगा उनका पूरा हक": ब्रजेश पाठक
"चिकित्सा शिक्षकों ने अपने जीवन का अमूल्य समय प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और योग्य चिकित्सकों को तैयार करने में समर्पित किया है। उनके सेवानिवृत्तिकालीन परिलाभों को लेकर किसी भी प्रकार की देरी न्यायसंगत नहीं है। केजीएमयू प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पात्र शिक्षकों तथा दिवंगत शिक्षकों के आश्रित परिवारों के प्रकरणों में बिना किसी हीलाहवाली के शीघ्र भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए।"
— ब्रजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री, उ.प्र.)


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