UP Crime News: आगरा में नकली दवा माफिया पर योगी सरकार का सबसे बड़ा प्रहार, 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की रेड में ₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त, 58 लाइसेंस निरस्त
लखनऊ/आगरा, 11 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के काले कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी महाअभियान के तहत आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की गई है। एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ दबिश दी। इस ऐतिहासिक कार्रवाई में 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर सहित अब तक कुल 9 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और 58 थोक लाइसेंस निरस्त या निलंबित कर दिए गए हैं।
📊 आगरा महाअभियान: अब तक हुई बड़ी कार्रवाई के मुख्य आंकड़े
| 👩✈️ नेतृत्व व टीम | FSDA आयुक्त और 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीम |
| 🏢 एक साथ जांची गईं फर्में | 13 प्रमुख दवा फर्में (आगरा) |
| 💊 जब्त अवैध व नकली दवाएं | ₹3.63 करोड़ से अधिक की जीवनरक्षक दवाएं |
| 🛑 निरस्त/निलंबित थोक लाइसेंस | 58 थोक दवा लाइसेंस |
| ⚖️ दर्ज कुल मुकदमे (FIR) | 09 एफआईआर (3 नई एफआईआर सहित) |
🚨 FSDA के निशाने पर आईं आगरा की ये 13 प्रमुख दवा फर्में
औषधि निरीक्षकों की टीमों ने कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार, कृष्णा कॉम्प्लेक्स और नवबिया मार्केट में निम्नलिखित दुकानों व गोदामों पर छापेमारी की:
- 📍 पूर्णतः सील की गईं फर्में: मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला) और मनी मेडिकल (मुबारक महल) के परिसरों को गड़बड़ियां मिलने पर पूरी तरह सील कर दिया गया।
- 📍 बिक्री पर तत्काल रोक: नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स) और मनु फार्मा (कोतवाली के सामने) पर औषधि अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत तत्काल प्रभाव से कामकाज पर रोक लगा दी गई।
- 📍 अन्य जांची गईं फर्में: वंश फार्मा, प्रशांत मेडिकल, पोरवाल मेडकेयर, एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस, डॉली ड्रग हाउस, आरडीएम फार्मास्युटिकल्स, इनाया फार्मा और नूर फार्मा। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के सैंपल लेकर लैब भेजे हैं।
🔍 नकली दवाओं और 'Not for Sale' की री-लेबलिंग का पूरा खेल बेनकाब
- 📦 विभोर मेडिकल से कोलकाता-गोरखपुर कनेक्शन: शिकायत के बाद हुई जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी (आगरा) के फर्जी बिल पकड़े गए। यह सिंडिकेट गोरखपुर की गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स के साथ मिलकर 'Chymoral Forte' और 'Shelcal' जैसी नामी कंपनियों की नकली दवाएं खपा रहा था।
- 🏷️ सरकारी दवाओं की री-लेबलिंग: युग फार्मा, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा के सिंडिकेट से खुलासा हुआ कि गाजियाबाद एसटीएफ की मदद से पकड़े गए आरोपी सरकारी व ESI सप्लाई की दवाओं से 'Not for Sale' का ठप्पा मिटाते थे। इसके बाद उन पर फर्जी लेबल और नई एमआरपी लगाकर उन्हें महंगे दामों में खुले बाजार में बेचा जाता था।
- 🚗 फर्जी बिलिंग और लग्जरी गाड़ियों से तस्करी: वी.ए. मेडिकोज और रुद्रा एंटरप्राइजेज की जांच में करीब ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग पकड़ी गई। ये माफिया बकायदा लग्जरी कारों (UP-80 EL-0069) और ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल कर नकली दवाओं को वैध दिखाने के लिए फर्जी कागजात के साथ सप्लाई करते थे।
"अवैध वसूली करने वालों पर भी कसा जाएगा शिकंजा, सिंडिकेट को जड़ से मिटाएंगे"
"यह विशेष अभियान केवल दुकानों पर छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नकली दवाओं के इस पूरे अंतरराज्यीय सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक रीढ़ की हड्डी को तोड़ना हमारा मुख्य लक्ष्य है। इसके साथ ही, विभाग को कुछ ड्रग एसोसिएशनों द्वारा छोटे व वैध दवा व्यापारियों से कथित तौर पर अवैध वसूली करने की शिकायतें मिली हैं। स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि किसी भी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है, तो अवैध वसूली (Extortion) का मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
— खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश शासन
योगी सरकार के इस बड़े और कड़े ऐक्शन के बाद उत्तर प्रदेश के दवा बाजार में हड़कंप मच गया है। जीवनरक्षक दवाओं के नाम पर आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट के तार कई राज्यों से जुड़े होने के कारण अब अन्य जिलों में भी पैनी नजर रखी जा रही है। वैध और ईमानदार दवा व्यापारियों को सुरक्षा देने और मिलावटखोरों को जेल भेजने के संकल्प के साथ यह प्रदेशव्यापी अभियान आगे भी जारी रहेगा।


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