बिजली निजीकरण और लेबर कोड के खिलाफ 29 जुलाई को दिल्ली में महासम्मेलन, UP में 586 दिनों से आंदोलन जारी
लखनऊ, 6 जुलाई: संयुक्त किसान मोर्चा और देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आगामी 29 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों का एक विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस महासम्मेलन में बिजली के निजीकरण, चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों के अनुसार, इस सम्मेलन में देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बिजली संगठनों और विभिन्न उद्योगों के श्रमिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इससे पहले 12 फरवरी, 2026 को भी देशव्यापी हड़ताल की गई थी, लेकिन सरकारों की नीतियों में सकारात्मक बदलाव न होने के कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।
29 जुलाई के राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य मुद्दे और एजेंडा
| प्रमुख विषय | विरोध का कारण और विवरण |
|---|---|
| इलेक्ट्रिसिटी बिल 2025 | केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक-2025 का विरोध, जो बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देता है। |
| विद्युत वितरण का निजीकरण | उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के निजीकरण की तेज होती प्रक्रिया। |
| चार श्रम संहिताएं (Labor Codes) | श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले नए चार लेबर कोड्स को वापस लेने की मांग। |
| प्रस्तावित बीज विधेयक | किसानों के हितों के खिलाफ बताए जा रहे नए बीज विधेयक (Seeds Bill) का पुरजोर विरोध। |
"UP में पिछले 586 दिनों से जारी है बिजली कर्मियों का आंदोलन"
संघर्ष समिति ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी पिछले 586 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान हजारों कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां की गई हैं, जिससे ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ हुए समझौते को लागू करने की मांग
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि 19 मार्च, 2023 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ हुए समझौते का पूरी तरह पालन किया जाए। मार्च 2023 के आंदोलन और पिछले 586 दिनों के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुचित, प्रतिशोधात्मक और दंडात्मक कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
समिति का कहना है कि इन कार्रवाइयों को वापस लेने से ही ऊर्जा निगमों के भीतर औद्योगिक शांति, सौहार्द और आपसी विश्वास का माहौल दोबारा कायम हो सकेगा। यदि 29 जुलाई के राष्ट्रीय सम्मेलन में किसी भी राष्ट्रव्यापी आंदोलन का फैसला होता है, तो उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी उसमें पूरी एकजुटता के साथ भाग लेंगे।


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