📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...

Pages

जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर रोक के लिए राज्यपाल को ज्ञापन, मुस्लिम शिष्टमंडल की बड़ी मांग

UP News: जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर ध्वस्तीकरण रोकने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन, छात्रों के भविष्य की रक्षा की मांग

जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने की मांग, राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

मुस्लिम शिष्टमंडल ने उठाई नियमितीकरण की मांग; कहा- कार्रवाई से पहले हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को दी जाए प्राथमिकता

📢 VOC | 📍 लखनऊ | 📅 18 जुलाई, 2026
  • प्रशासनिक हस्तक्षेप: रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर तत्काल रोक लगाने के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील।
  • कानूनी विकल्प: भवन संबंधी अनियमितताओं के समाधान हेतु आर्थिक शमन, संशोधित मानचित्र और नियमितीकरण (Regularisation) को प्राथमिकता देने की मांग।
  • संवैधानिक संरक्षण: प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक कार्रवाई में संविधान के अनुच्छेद 30(1) और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन पर दिया जोर।

लखनऊ: रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में आज एक बड़े मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल (शिष्टमंडल) ने जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल ने मांग की कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संस्थान में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उच्च शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान पूरी तरह से संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा की गरिमा प्रभावित न हो।

ज्ञापन में रखी गईं 4 प्रमुख वैधानिक मांगें:

  1. ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक: रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण आदेश पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए और कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो।
  2. वैकल्पिक कानूनी उपाय: उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों के नियमों के अंतर्गत उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों जैसे—नियमितीकरण (Regularisation), संशोधित मानचित्र की स्वीकृति या आर्थिक शमन (शमन शुल्क) को प्राथमिकता देकर मामले को सुलझाया जाए।
  3. संवैधानिक अधिकारों की रक्षा: किसी भी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30(1) (अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकार), प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत, सार्वजनिक हित तथा अनुपातिकता के सिद्धांत (Principle of Proportionality) का पूर्ण पालन हो।
  4. राज्य सरकार का हस्तक्षेप: उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की छवि और हजारों छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की रक्षा के लिए राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले में आवश्यक कदम उठाए।

"कानून का पालन भी हो और शिक्षा का नुकसान भी न हो"

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों से जुड़े मामलों में हमेशा ऐसा बीच का रास्ता या समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे नियमों व कानूनों का पालन भी सुनिश्चित हो सके और विद्यार्थियों के भविष्य पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

शिष्टमंडल (Delegation) में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद:
इस अवसर पर मुख्य रूप से ओबेदुल्ला नासिर, अख्तर मालिक, हुस्न आरा, मसूद अहमद, रेहान गनी, हम्माम वहीद, अनीस अख्तर, नदीमुद्दीन, इरफ़ान उल्लाह, काशिफ सिद्दीकी, मोज़ज़म खान, अहमद रज़ा, मोहम्मद ओवैस, शहाबुद्दीन सिद्दीकी, मोहम्मद नौमान, रफीक अहमद, शमशेर अली सहित बड़ी संख्या में समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उक्त पूरे घटनाक्रम और ज्ञापन सौंपे जाने की आधिकारिक जानकारी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रवक्ता चौधरी सलमान क़ादिर द्वारा प्रेस को जारी एक बयान में दी गई है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें