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संविदा कर्मियों की छंटनी पर भड़का विद्युत मजदूर संगठन, लखनऊ बैठक में उठी बहाली की मांग

Lucknow News: बिजली कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की छंटनी पर फूटा गुस्सा, विद्युत मजदूर संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी

ऊर्जा विभाग में बड़ा रोष: लखनऊ के श्यामा चौराहा स्थित हम्बरा अपार्टमेंट में 'विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश' की केंद्रीय कार्यकारिणी बैठक संपन्न हुई। बैठक में कार्यकारी सहायक/TG-2 की वेतन विसंगति, मनमाने ट्रांसफर, वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर पदों की कटौती और हजारों संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाले जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। संगठन ने मुख्यमंत्री से ऊर्जा निगम को सेवा निगम में शामिल करने और हटाए गए कर्मचारियों को वापस लेने की मांग की है।

लखनऊ, 12 जुलाई 2026: विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण केंद्रीय कार्यकारिणी बैठक संगठन भवन (जी 107, हम्बरा अपार्टमेंट, श्यामा चौराहा, लखनऊ) में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष विमलचंद पांडे ने की और संचालन प्रदेश प्रभारी आरसी पाल द्वारा किया गया। बैठक में पावर कॉरपोरेशन के तानाशाही रवैये, संविदा कर्मियों के उत्पीड़न और अवर अभियंताओं की लंबित मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर रणनीति तैयार की गई।

📊 बिजली कर्मचारियों व संविदा कर्मियों की मुख्य समस्याएं और मांगें

श्रेणी / विषय प्रमुख समस्याएं एवं मांगें
🛠️ वेतन व पदोन्नति विसंगति कार्यकारी सहायक, TG-2 एवं समकक्ष पदों की वेतन विसंगति दूर हो और समय पर पदोन्नतियां (Promotions) की जाएं।
⚡ संविदा कर्मी व छंटनी वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर की गई छंटनी बंद हो। 2023 की हड़ताल के दौरान निकाले गए हजारों संविदा कर्मियों को तुरंत नौकरी पर वापस रखा जाए।
📐 अवर अभियंता (JE) मांगें चयनित अवर अभियंताओं की वरिष्ठता सूची तुरंत घोषित की जाए और 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके जेई को प्रथम एसीपी (ACP) का लाभ दिया जाए।
🛑 मृतक आश्रित नियम पावर कॉरपोरेशन द्वारा मृतक आश्रितों के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी (Class-4) पर सेवायोजन समाप्त करने का फैसला बदला जाए, ताकि कम पढ़े-लिखे पीड़ित परिवार भुखमरी से बच सकें।

🔍 मैनपावर की कमी से लड़खड़ाई बिजली व्यवस्था, उपभोक्ताओं से हो रही मारपीट

बैठक में मुख्य महामंत्री श्रीचन्द्र और अन्य पदाधिकारियों ने प्रबंधन की नीतियों के कारण जमीनी स्तर पर पैदा हो रही गंभीर परिस्थितियों को सामने रखा:

  • 📉 पदों में कटौती से बढ़ा काम का बोझ: वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर कार्मिकों के बड़े पैमाने पर पद काट दिए गए हैं। हजारों संविदा कर्मियों को बाहर निकालने से बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने में भारी कठिनाई आ रही है।
  • ⚠️ कर्मचारियों के साथ मारपीट की वारदातें: स्टाफ की भारी कमी के कारण रोस्टर और फॉल्ट ठीक होने में देरी होती है, जिसके चलते आए दिन गुस्साए बिजली उपभोक्ताओं द्वारा निर्दोष कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं।
  • 🔄 नीति के विपरीत अंतरजनपदीय ट्रांसफर: कॉरपोरेशन ने अपनी ही स्थानांतरण नीति के विपरीत जाकर छोटे कर्मचारियों के तबादले गृह जिलों से बाहर दूर-दराज के जिलों में कर दिए हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
"ऊर्जा निगमों को भी सेवा निगम के दायरे में शामिल करे सरकार"

"संविदा कर्मियों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा 'सेवा निगम' का गठन किया गया है, लेकिन बेहद खेद का विषय है कि अभी तक ऊर्जा विभाग (UPPCL) को इस निगम में शामिल नहीं किया गया है। हमारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से पुरजोर अपील है कि ऊर्जा निगम को तत्काल सेवा निगम के अधीन लाया जाए। इसके साथ ही आंदोलन और हड़ताल के दौरान किए गए कर्मचारियों के उत्पीड़न को समाप्त किया जाए, अन्यथा कर्मचारियों के भीतर सुलग रहा यह रोष कभी भी बड़े औद्योगिक अशांति/आंदोलन का रूप ले सकता है।"
— विमलचंद पांडे, केंद्रीय अध्यक्ष, विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश

बैठक में ये पदाधिकारी रहे उपस्थित: इस प्रांतीय बैठक को मुख्य रूप से कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक सिन्हा, शोएब हसन, प्रताप सिंह, एस के सिंह, आर वाई शुक्ला, मोहन बाबू आर्य, जलीलुर्हमान, अशोक गुप्ता, राहुल कुमार, विनोद श्रीवास्तव, संदीप कुमार, दीपक कश्यप, ज्ञानेन्द्र शर्मा, कपिल सारस्वत, अवनीश श्रीवास्तव, यशपाल सिंह, रविकांत, आरिफ वेग, पुनीत राय, प्रेम पाल, अरविन्द कुमार, चंद्रकांत और वेद सहित दर्जनों प्रान्तीय नेताओं ने संबोधित कर एकजुटता का संकल्प लिया।

विद्युत मजदूर संगठन की इस बैठक से साफ संकेत मिलते हैं कि उत्तर प्रदेश के बिजली महकमे में आंतरिक असंतोष गहराता जा रहा है। छंटनी का शिकार हुए संविदा कर्मियों की बहाली और अवर अभियंताओं (JE) को समय से प्रथम एसीपी का लाभ देने जैसी बुनियादी मांगों पर यदि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने जल्द सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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