102 एंबुलेंस बनी जीवनरक्षक: शिशु के गले में फंसी थी गर्भनाल, एंबुलेंस कर्मियों की सूझबूझ से रास्ते में कराया गया सुरक्षित प्रसव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित 102 एंबुलेंस सेवा एक बार फिर एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु के लिए वरदान साबित हुई है। राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर में एक जटिल (हाई रिस्क) प्रेगनेंसी केस में एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और कुशलता से एंबुलेंस के अंदर ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
🚨 शिशु के गले में फंसा था गर्भनाल (Umbilical Cord) का फंदा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरोजिनी नगर के चक अमावा निवासी कोमल (पत्नी कौशल कुमार) को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उन्हें 102 एंबुलेंस की मदद से सीएचटी बेहटा ले गए। अल्ट्रासाउंड जांच में पाया गया कि शिशु के गले में गर्भनाल फंसी हुई थी, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए मरीज को तत्काल एमसीएच हॉस्पिटल सरोजिनी नगर (हायर सेंटर) के लिए रेफर कर दिया।
🚑 एंबुलेंस को रास्ते में रोककर ईएमटी ने लिया बड़ा फैसला
सूचना मिलते ही 102 एंबुलेंस के ईएमटी (EMT) ऊषा देवी और पायलट सुनील कुमार मरीज को लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए। लेकिन रास्ते में प्रसूता की प्रसव पीड़ा अचानक बहुत बढ़ गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एंबुलेंस को रास्ते में ही सुरक्षित स्थान पर रोका गया।
✨ कुशलता से निकाला गर्भनाल का फंदा, जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित
ईएमटी ऊषा देवी ने अदम्य साहस और कुशलता का परिचय देते हुए नवजात शिशु के गले में फंसी गर्भनाल को सुरक्षित बाहर निकाला और एंबुलेंस में मौजूद स्पेशल डिलीवरी किट की मदद से सफल प्रसव कराया। प्रसव के तुरंत बाद ईएमटी ने कॉल सेंटर में मौजूद डॉ. सत्या को स्थिति की जानकारी दी और उनके निर्देशानुसार मरीज को नॉर्मल सलाइन व आवश्यक प्राथमिक उपचार दिया।
🙏 परिजनों ने जताया सरकार और एंबुलेंस टीम का आभार
सुरक्षित प्रसव के उपरांत जच्चा-बच्चा को सीएचसी सरोजिनी नगर में भर्ती कराया गया, जहां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। परिजनों ने राहत की सांस लेते हुए प्रदेश सरकार की 102 एंबुलेंस सेवा, ईएमटी ऊषा देवी और पायलट सुनील कुमार का हृदय से धन्यवाद किया और कहा कि यह त्वरित सहायता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थी।


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