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Reliance Strand Life Sciences: अब सिर्फ ब्लड टेस्ट से होगी शुरुआती कैंसर की पहचान, रिलायंस की कंपनी को मिला बड़ा पेटेंट

Reliance Strand Life Sciences: अब सिर्फ ब्लड टेस्ट से होगी शुरुआती कैंसर की पहचान, रिलायंस की कंपनी को मिला बड़ा पेटेंट

Strand Life Sciences AI based cancer detection liquid biopsy blood test kit

बेंगलुरु, 7 जुलाई: मेडिकल साइंस और कैंसर के इलाज की दिशा में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज (Strand Life Sciences) को एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट मिला है, जो सिर्फ एक साधारण ब्लड सैंपल के जरिए शरीर में कैंसर की शुरुआती पहचान कर सकती है। यह तकनीक न सिर्फ कैंसर का पता लगाएगी, बल्कि शरीर में उसके संभावित स्रोत (Source) की भी पहचान करने में सक्षम है।

यह नया प्लेटफॉर्म मानव शरीर के सेल-फ्री डीएनए (cfDNA) का विश्लेषण करता है। इस पूरी प्रक्रिया में जीनोम सीक्वेंसिंग, बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस और एडवांस मशीन लर्निंग (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया जाता है।

कैंसर डिटेक्शन तकनीक: कैसे काम करेगा यह नया प्लेटफॉर्म?

प्रमुख पहलू विवरण और कार्यप्रणाली
जांच का माध्यम मरीज को किसी जटिल बायोप्सी से नहीं गुजरना होगा, जांच सिर्फ एक ब्लड सैंपल (Liquid BioPsy) से होगी।
मुख्य कोर टेक्नोलॉजी सेल-फ्री डीएनए विश्लेषण, जीनोम सीक्वेंसिंग, बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग (ML)।
डीएनए पैटर्न की पहचान यह प्लेटफॉर्म कैंसर से जुड़े डीएनए पैटर्न में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को बेहद शुरुआती स्तर पर ही पकड़ लेता है।
सबसे बड़ा फायदा बीमारी का पता फर्स्ट स्टेज में चलने से मरीजों को तुरंत सही इलाज मिलेगा, जिससे उनकी जान बचाना आसान होगा।
"कैंसर स्क्रीनिंग को सुलभ और सटीक बनाना हमारा लक्ष्य" — रमेश हरिहरन
स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज के सीईओ रमेश हरिहरन ने कहा, "यह पेटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लिक्विड बायोप्सी टेक्नोलॉजी के विकास की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कंपनी का उद्देश्य ऐसे मेडिकल समाधान तैयार करना है जो कैंसर स्क्रीनिंग को अधिक सटीक, सुलभ, किफायती और बड़े पैमाने पर लागू करने योग्य बना सकें।"

कैंसर के खिलाफ लड़ाई में क्यों गेम-चेंजर है यह तकनीक?

वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मरीजों में कैंसर की पहचान तब होती है जब बीमारी अपने तीसरे या चौथे (गंभीर) चरण में पहुंच चुकी होती है। ऐसे एडवांस स्टेज में इलाज काफी जटिल और खर्चीला हो जाता है, साथ ही मरीज के बचने की संभावना भी कम हो जाती है। रिलायंस की कंपनी द्वारा विकसित इस तकनीक से सालाना लाखों लोगों की समय पर स्क्रीनिंग कर कैंसर को गंभीर रूप लेने से पहले ही रोका जा सकेगा।

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