यूपी रेरा का बड़ा फैसला: IFMS राशि के लिए अलग बैंक खाता अनिवार्य, दरें तय; RWA को हस्तांतरित होगी पूरी रकम
- यूपी रेरा ने सामान्य विनियम, 2019 में 12वां संशोधन किया अधिसूचित; वेबसाइट पर प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी।
- प्रमोटर्स को आवंटियों से एकत्रित IFMS फंड को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना होगा; प्रबंधन में आएगी पूरी पारदर्शिता।
- कॉमन एरिया हैंडओवर के समय RWA को पूरी राशि के साथ ऑडिट ट्रेल और ट्रांसफर स्टेटमेंट देना होगा अनिवार्य।
लखनऊ / गौतमबुद्ध नगर: उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यूपी रेरा ने उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 में 12वां संशोधन अधिसूचित किया है। इसके अंतर्गत विनियम-47 के तहत इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) के संग्रह, प्रबंधन, हस्तांतरण और उपयोग के लिए एक व्यापक व विस्तृत व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह नया नियम प्राधिकरण की वेबसाइट पर लाइव होते ही पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।
IFMS राशि के लिए अलग बैंक खाता और FD अनिवार्य
संशोधित विनियमों के अनुसार, अब बिल्डर्स या प्रमोटर्स को बिक्री, लीज या सब-लीज डीड के पंजीकरण के समय ही आवंटियों से आईएफएमएस की राशि एकत्र करनी होगी। इस राशि को किसी भी अन्य मेंटेनेंस चार्ज के साथ मिक्स नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए किसी अनुसूचित बैंक (Scheduled Bank) में एक अलग नामित (Designated) बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। प्रमोटर को विभिन्न बैंकों से कोटेशन प्राप्त कर सबसे अधिक ब्याज देने वाली सुरक्षित फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना में इस राशि को निवेश करना होगा ताकि आवंटियों का फंड पूरी तरह सुरक्षित रहे और उस पर अधिकतम रिटर्न मिले।
परियोजना के प्रकार के अनुसार निर्धारित नई दरें
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यूपी रेरा ने प्रोजेक्ट्स के आकार, श्रेणी और प्रकृति के आधार पर आईएफएमएस की दरें निर्धारित कर दी हैं:
| परियोजना का प्रकार (Project Type) | निर्धारित आईएफएमएस (IFMS Rate) |
|---|---|
| बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग (आवासीय) | ₹20 से ₹100 प्रति वर्ग फुट (श्रेणी के अनुसार) |
| व्यावसायिक (Non-Central Air Conditioned) | ₹40 प्रति वर्ग फुट |
| व्यावसायिक (Central Air Conditioned) | ₹50 प्रति वर्ग फुट |
| प्लॉटेड आवासीय एवं प्लॉटेड व्यावसायिक | अलग-अलग विशेष दरें निर्धारित |
पूरी राशि आरडब्ल्यूए (RWA) को देना होगा अनिवार्य
नए संशोधन के तहत, जब भी किसी परियोजना के साझा क्षेत्रों (Common Area) का हस्तांतरण किया जाएगा, तब प्रमोटर को आईएफएमएस की पूरी मूल राशि और उस पर अर्जित ब्याज रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या आवंटियों के संघ को सौंपना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रमोटर को एक विस्तृत हस्तांतरण विवरण (Transfer Statement) भी देना होगा, जिसमें हर एक यूनिट से प्राप्त राशि, मेंटेनेंस पर किए गए व्यय, ऑडिट ट्रेल और अंतिम शेष राशि का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा।
फंड का उपयोग और चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इस निधि का उपयोग केवल परियोजना के साझा क्षेत्रों, बड़े उपकरणों (जैसे लिफ्ट, जनरेटर) व सामूहिक सेवाओं के संचालन, रखरखाव, मरम्मत और आवश्यक रिप्लेसमेंट के लिए ही किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, आरडब्ल्यूए को इस पूरी निधि का उचित लेखा-जोखा रखना होगा और सामान्यतः स्वीकार किए गए लेखा सिद्धांतों (GAAP) के अनुसार किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से इसका ऑडिट कराना होगा। यह ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के तीन महीने के भीतर वार्षिक आम सभा (AGM) या विशेष आम सभा (EGBM) में प्रस्तुत करनी अनिवार्य होगी।
अध्यक्ष का वक्तव्य: आवंटियों के हितों की प्रभावी सुरक्षा
"इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य आईएफएमएस के संग्रह, प्रबंधन, निवेश और हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। घर खरीदार यह राशि परियोजना की साझा सुविधाओं के लंबे समय के रखरखाव के लिए जमा करते हैं, इसलिए यह निधि पूरी तरह सुरक्षित रहनी चाहिए। नए प्रावधानों से आवंटियों के हितों की प्रभावी सुरक्षा होगी और आरडब्ल्यूए की भूमिका अधिक मजबूत होगी।"
- श्री संजय आर. भूसरेड्डी, अध्यक्ष, यूपी रेरा

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