UP Roadways Union: यूपी रोडवेज में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'महा-जंग', वरिष्ठ श्रमिक नेता ने गिनाए 9 गंभीर आरोप; दी आमरण अनशन की चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम मुख्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब वरिष्ठ श्रमिक नेता जसवन्त सिंह ने प्रबंध निदेशक को एक पत्र भेजकर निगम के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार के बड़े खेल को उजागर किया। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि निगम के तमाम अधिकारी मुख्यालय के आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर अपने निजी स्वार्थ और मनमाने रवैये से रोडवेज की छवि धूमिल कर रहे हैं।
🚨 'धनपुत्र' चला रहे पटल, गरीबों को लूटने का संदेश; पत्र में लगाए गए ये 9 बड़े आरोप:
- 📍 तबादलों में धन उगाही: विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरण (Transfer) का खेल चल रहा है, जहां बिना किसी डर के बेखौफ होकर खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है।
- 📍 एक ही पटल पर वर्षों से जमे कार्मिक: कई अधिकारी बदल गए लेकिन कई कर्मचारी सालों से एक ही पटल पर टिके हैं। मुख्यालय के आदेशों को दरकिनार कर इन 'धनपुत्रों' को संरक्षण दिया जा रहा है।
- 📍 बस और मार्ग आवंटन में वसूली: बसों और रूट के आवंटन (Allotment) पर प्रतिदिन पैसा लेने के आरोप लग रहे हैं, जिसकी मुख्यालय स्तर से कभी जांच नहीं कराई गई।
- 📍 निरीक्षकों का 'महीना' फिक्स: यातायात निरीक्षकों और सहायक यातायात निरीक्षकों द्वारा ऑन-स्पॉट केस निस्तारण के नाम पर अलग से अवैध वसूली का धंधा चल रहा है।
- 📍 अफसरों पर कार्रवाई नहीं: बिना टिकट यात्रियों के पकड़े जाने पर RM/ARM को निलंबित करने का स्पष्ट आदेश है, लेकिन आज तक किसी बड़े अधिकारी पर गाज नहीं गिरी।
- 📍 चेकिंग और बैग के नाम पर रिश्वत: परिचालक (Conductor) चोरी न करे, इसके बावजूद उसे चेकिंग, बैग और ड्यूटी रूम में पैसे देने पड़ते हैं, जो बदस्तूर जारी है।
- 📍 बायोमैट्रिक मशीन का न होना: डिपो में बायोमैट्रिक हाजिरी न लगाकर संविदा कर्मियों को अनुपस्थित दिखाया जाता है ताकि रूट ऑफ दिखाकर अवैध वसूली और स्पेयर पार्ट्स की हेराफेरी की जा सके।
- 📍 कार्यशालाओं में खड़ी बसें: सैकड़ों नई बसें आने के बावजूद प्रतिदिन 1 से 2 हजार बसें कार्यशालाओं (Workshops) में खड़ी रहती हैं, जिससे करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन रिकवरी सिर्फ गरीब परिचालक से की जाती है।
- 📍 चालकों का आर्थिक शोषण: कम वेतन, भारी रिकवरी और वर्कशॉप से गाड़ी लाने-ले जाने का किलोमीटर न जोड़ना ही मुख्य वजह है जिससे चालक (Driver) भर्ती होने के बाद भाग रहे हैं।
📅 आंदोलन और अनशन की रूपरेखा
| प्रस्तावित कार्यक्रम | तारीख | स्थान / विवरण |
|---|---|---|
| 🧘♂️ एक दिवसीय उपवास | 16 जुलाई 2026 | निगम मुख्यालय (लखनऊ) स्थित भगवान शिव मंदिर परिसर |
| 🛑 आमरण अनशन (कठोर सुधार न होने पर) | 20 जुलाई 2026 | उसी स्थल से मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन अनशन |
"घर के भेदी लंका जला रहे हैं, संगठन क्षमा नहीं करेगा"
"भ्रष्टाचार रूपी दानव हमारे छोटे और प्रिय कर्मचारियों की खुशियां छीन रहा है और सार्वजनिक रूप से परिवहन निगम को शर्मिंदा कर रहा है। भ्रष्टाचार में देने वाला और लेने वाला दोनों दोषी हैं। चूंकि आप (प्रबंध निदेशक) निगम के मुखिया हैं, इसलिए इसे सुधारने की संपूर्ण जिम्मेदारी आपकी है। यदि मुख्यालय स्तर पर सुधार की कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन के लिए विवश होगा।"
— जसवन्त सिंह, वरिष्ठ श्रमिक नेता, उ०प्र० परिवहन निगम
इस पत्र की प्रतिलिपि अपर प्रबन्ध निदेशक (उ०प्र० परिवहन निगम मुख्यालय, लखनऊ) और प्रान्तीय अध्यक्ष (यू०पी० रोडवेज इम्प्लाइज यूनियन) को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है। श्रमिक संघ ने साफ कर दिया है कि संगठन का अंतिम निर्णय प्रान्तीय अध्यक्ष महोदय राम जी त्रिपाठी का ही होगा। अब देखना यह है कि इस कड़े पत्र के बाद प्रबंधन इन 9 बिंदुओं पर क्या जांच बैठाता है या फिर रोडवेज में एक बड़े चक्का जाम और अनशन की नौबत आती है।


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