UP संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी: 'हमें समायोजित कर परमानेंट कर दें, पूरा परिवार आपकी जय-जयकार करेगा' — करुणा शंकर मिश्र की सीएम योगी से मार्मिक अपील
लखनऊ, 7 जुलाई: उत्तर प्रदेश क्षय रोग वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्र ने सूबे के हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और उनके परिवारों की पीड़ा को सरकार के समक्ष रखा है। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की पहल का स्वागत करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से एक बेहद भावुक अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों से रीढ़ की हड्डी बने संविदा कर्मियों को भी चिकित्सा सुरक्षा और स्थायी भविष्य (परमानेंट) प्रदान किया जाए।
करुणा शंकर मिश्र ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शासन और सरकार की ओर से संविदा कर्मचारियों के हितों को लेकर विभाग को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन विभाग द्वारा सकारात्मक प्रस्ताव तैयार करने में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों की उम्मीदें प्रभावित हो रही हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की बदहाली और मुख्य मांगें
| प्रमुख बिंदु | विवरण (संघ के प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार) |
|---|---|
| लंबी सेवा अवधि | प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारी पिछले 10 से 25 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात हैं। |
| राष्ट्रीय अभियानों में योगदान | कोरोना महामारी, टीबी (TB) उन्मूलन अभियान और अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इन कर्मचारियों ने हमेशा फ्रंटलाइन पर काम किया। |
| कैशलेस चिकित्सा की मांग | स्वास्थ्य सेवाओं में दिन-रात कार्य करने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी आयुष्मान या कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाया जाए। |
| गंभीर बीमारियों का दंश | टीबी, कैंसर, किडनी और लीवर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई संविदा कर्मी आर्थिक तंगी के कारण दम तोड़ रहे हैं और उनके परिवार बेसहारा हो रहे हैं। |
"हम सरकार से दया की भीख मांगते हैं, हमारे परिवारों की रक्षा करें" — करुणा शंकर मिश्र
"माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय उपमुख्यमंत्री जी, हमने अपने जीवन के 10 से 25 वर्ष प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित कर दिए हैं। हमें समायोजित कर परमानेंट कर दें। यदि सरकार हमारे समायोजन और चिकित्सा सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक निर्णय लेती है, तो प्रदेश का पूरा संविदा स्वास्थ्य परिवार आपकी जय-जयकार करेगा और जीवन भर आपका आभारी रहेगा।"
विभाग स्वयं निर्णय न करे, सकारात्मक प्रस्ताव सरकार को भेजे
संघ के अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से विनम्र अनुरोध किया है कि वे कर्मचारियों के भविष्य का निर्णय खुद दबाकर न बैठें। विभाग को चाहिए कि वह संविदा कर्मियों की लंबी सेवा, अनुभव और उनके परिवारों की दयनीय आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक सकारात्मक और मजबूत प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष रखे, क्योंकि समायोजन पर अंतिम और निर्णायक फैसला सरकार को ही लेना है।
उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री संविदा कर्मचारियों के दर्द को जरूर समझेंगे और वर्षों से सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने वाले इन बेसहारा परिवारों को अपना संरक्षण प्रदान करेंगे।


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