काशी को मेगा सौगात: ₹10,998 करोड़ की लागत से बनेगा 43 किमी लंबा वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर, एयरपोर्ट का सफर मात्र 20 मिनट में होगा पूरा
- कैबिनेट (CCEA) ने दी मंजूरी; छावनी, वाराणसी जंक्शन, फुलवरिया और चौकाघाट को मिलेगी भीषण जाम से मुक्ति।
- रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट पहुंचने का समय 60 मिनट से घटकर रह जाएगा सिर्फ 20 मिनट; हर यात्रा में 40 मिनट की बचत।
- भविष्य की जरूरत: वर्ष 2044 के ट्रैफिक लोड (59,000+ PCU प्रतिदिन) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है आधुनिक 4/6 लेन डिजाइन।
वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार काशी और पूरे पूर्वांचल की यातायात व परिवहन व्यवस्था को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा परियोजना को धरातल पर उतारने जा रही है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने बहुप्रतीक्षित वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को आधिकारिक हरी झंडी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी कॉरिडोर 43.218 किलोमीटर लंबा होगा, जिसके निर्माण में लगभग ₹10,998.32 करोड़ की भारी-भरकम लागत आने का अनुमान है। यह मेगा प्रोजेक्ट छावनी, वाराणसी जंक्शन, फुलवरिया और चौकाघाट जैसे शहर के सबसे व्यस्त एवं घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात को पूरी तरह सुगम बनाएगा।
परियोजना के मुख्य आंकड़े और दो पैकेज संरचना
वरुणा नदी के आस-पास का संपूर्ण क्षेत्र वाराणसी के व्यावसायिक और रोजमर्रा के जनजीवन की मुख्य धुरी माना जाता है। वर्तमान में संकरी सड़कों, ई-रिक्शा, पैदल यात्रियों, कारों और भारी मालवाहक वाहनों के मिश्रित दबाव तथा नदी पर बने पुराने पुलों की सीमित क्षमता के कारण यहाँ हमेशा वाहनों की रफ्तार थमी रहती थी। नया एलिवेटेड वायाडक्ट (जमीन से ऊपर बना रास्ता) नीचे की सड़कों की भीड़भाड़ को प्रभावित किए बिना वाहनों को एक निर्बाध और तेज गति वाला गलियारा प्रदान करेगा।
पैकेज-1 और पैकेज-2 का विनिर्देश
इस विशाल कॉरिडोर के निर्माण को गति देने के लिए इसे दो प्रमुख हिस्सों (पैकेजेस) में विभाजित किया गया है:
1. पैकेज-I (लंबाई 28.498 किमी): यह मार्ग नेशनल हाईवे-31 (NH-31) से शुरू होकर फुलवरिया जंक्शन तक जाएगा। इसमें 11.744 किलोमीटर का 6-लेन मुख्य कैरिजवे होगा और इसके साथ 16.754 किलोमीटर की लंबाई में आवश्यक फ्लाईओवर, कनेक्टिंग रैंप, लूप तथा सर्विस लेन का निर्माण किया जाएगा।
2. पैकेज-II (लंबाई 14.720 किमी): यह मार्ग फुलवरिया जंक्शन से आगे बढ़ते हुए काशी रेलवे स्टेशन तक संपर्क स्थापित करेगा। इसमें 7.676 किलोमीटर लंबा 4/6-लेन का मुख्य मार्ग और 7.044 किलोमीटर के कनेक्टिंग रैंप शामिल होंगे। इस पूरे एलाइनमेंट में 15.78 किमी ग्रीनफील्ड और 3.64 किमी ब्राउनफील्ड एलाइनमेंट का एक बेहतरीन संतुलन बनाया गया है।
एयरपोर्ट और स्थानीय यात्रियों के लिए वरदान
वाराणसी के निवासियों, देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (बाबतपुर एयरपोर्ट) तक समय पर पहुंचना रही है। इस नए कॉरिडोर के चालू हो जाने के बाद वाराणसी मुख्य रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट जाने में लगने वाला समय 60 मिनट से नाटकीय रूप से घटकर मात्र 20 मिनट रह जाएगा। हर एक फेरे में लगभग 40 मिनट की यह सीधी बचत हवाई यात्रियों के लिए अभूतपूर्व राहत लेकर आएगी।
यह कॉरिडोर न केवल हाईवे के भारी ट्रैफिक को संभालेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों की सुविधा हेतु इसमें सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, चौकाघाट और कैंट रेलवे स्टेशन जैसे अत्यधिक भीड़ वाले नोड्स पर सीधे उतरने और चढ़ने के लिए विशेष लूप व रैंप डिजाइन किए गए हैं, जिससे कैंट जैसे संवेदनशील इलाकों को परमानेंट जाम से आजादी मिलेगी।
वर्ष 2044 के विजन को ध्यान में रखकर तैयार ढांचा
यह परियोजना केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान नहीं है, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक स्मार्ट सिटी और शहरी नियोजन का एक अहम हिस्सा है। आधुनिक ट्रैफिक असेसमेंट स्टडीज के अनुसार, वर्ष 2044 तक इस कॉरिडोर पर वाहनों का दबाव बढ़कर प्रतिदिन 59,000 पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) को पार कर जाने की संभावना है। इसी सुदूर भविष्य की आवश्यकता को भांपते हुए सरकार आज ही से 4 और 6 लेन की मजबूत एलिवेटेड आधारशिला रख रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक विकसित, सुव्यवस्थित और जाम-मुक्त काशी विरासत में मिल सके।

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