लखनऊ: इंद्रप्रस्थ एस्टेट के 500 निवासियों की सुरक्षा पर संकट, पास में हो रहे होटल निर्माण से दरकी इमारत; LDA से तकनीकी जांच व मरम्मत की मांग
लखनऊ: राजधानी के इंद्रप्रस्थ एस्टेट में रहने वाले लगभग 140 परिवारों के करीब 500 नागरिक पिछले तीन वर्षों से गंभीर सुरक्षा संकट और मानसिक तनाव के साये में जीने को मजबूर हैं। सोसायटी के निकट चल रहे बड़े होटल निर्माण के चलते आवासीय परिसर में हो रहे नुकसान, दरारों और संरचनात्मक क्षति को लेकर अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप, तकनीकी जांच और सुरक्षात्मक मरम्मत की गुहार लगाई है।
📌 मामले से जुड़े मुख्य बिंदु एवं तथ्य:
- प्रभावित आबादी: सोसायटी में स्थित 140 फ्लैट्स में रहने वाले लगभग 500 स्थानीय निवासी।
- विवाद का कारण: पास में हो रहे बहुमंजिला होटल निर्माण के कारण इंद्रप्रस्थ एस्टेट परिसर को पहुंच रही संरचनात्मक क्षति।
- पिछली कार्रवाई: पूर्व में शिकायतों के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जांच होने तक काम रुकवाया था, लेकिन बाद में पुनः कार्य शुरू हो गया।
- मानसून में बढ़ता खौफ: बारिश के मौसम में बेसमेंट और दीवारों में नमी/दरारों से बड़े हादसे का अंदेशा।
3 साल से शिकायतें, निरीक्षण के बाद भी नहीं सुलझी समस्या
इंद्रप्रस्थ एस्टेट के निवासियों और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, वे पिछले 3 वर्षों से लगातार एलडीए और जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्राचार कर रहे हैं।
विगत वर्ष निवासियों की गंभीर शिकायतों के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रुकवाते हुए तकनीकी टीम से निरीक्षण कराने के आदेश दिए थे। हालांकि, टीम के निरीक्षण के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू तो करा दिया गया, लेकिन निवासियों की सुरक्षा और इमारत को हो रहे नुकसान की प्रभावी निगरानी का आश्वासन कागजों तक ही सीमित रह गया।
सोसायटी निवासियों की 3 प्रमुख मांगें
एसोसिएशन और प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के समक्ष तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- 1. तत्काल तकनीकी एवं संरचनात्मक जांच: किसी स्वतंत्र और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान द्वारा सोसायटी के प्रभावित हिस्सों, नींव और परिसर का व्यापक सुरक्षा ऑडिट (Structural Safety Audit) कराया जाए।
- 2. हुए नुकसान की तत्काल मरम्मत: होटल निर्माण गतिविधियों के कारण इंद्रप्रस्थ एस्टेट परिसर की दीवारों, बाउंड्री और बेसमेंट में आए नुकसान की बिल्डर/डेवलपर से तुरंत जवाबदेही तय कर मरम्मत कराई जाए।
- 3. स्पष्ट समय-सीमा की घोषणा: संबंधित अधिकारियों और बिल्डर द्वारा सभी सुधारात्मक और सुरक्षात्मक कार्यों को पूरा करने के लिए एक निश्चित और बाध्यकारी समय-सीमा (Timeframe) घोषित की जाए।
"हम शहर के विकास या निर्माण गतिविधियों के विरोध में कतई नहीं हैं। हमारी केवल इतनी मांग है कि किसी भी व्यावसायिक विकास की कीमत 140 परिवारों और लगभग 500 मासूम निवासियों की जिंदगी व सुरक्षा को दांव पर लगाकर नहीं वसूली जानी चाहिए।"
— निवासी एवं पदाधिकारी, अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (इंद्रप्रस्थ एस्टेट)


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