बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में बड़ा हादसा: सावन सोमवार पर मची भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत और 12 से अधिक घायल
लखीसराय: बिहार के लखीसराय स्थित ऐतिहासिक व प्रसिद्ध अशोक धाम (इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर) में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के अवसर पर एक दर्दनाक हादसा हो गया। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के अनियंत्रित होने से मची भगदड़ में कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
📌 हादसे से जुड़े प्रमुख बिंदु:
- घटनास्थल: इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर, अशोक धाम (लखीसराय, बिहार)।
- हताहत: 7 श्रद्धालुओं की मौत, 12 से अधिक घायल अस्पताल में भर्ती।
- संयोग व दबाव: सावन सोमवार व नाग पंचमी के चलते सुबह से ही लाखों भक्तों का जमावड़ा।
- संभावित कारण: दो ट्रेनों के आगमन से अचानक भीड़ का अत्यधिक दबाव और बिजली के तार से जुड़ी प्राथमिक अफवाह/घटना।
- प्रशासनिक कार्रवाई: राहत एवं बचाव कार्य तेज, क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच शुरू।
सुबह जलाभिषेक के दौरान अनियंत्रित हुई भीड़
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का विशेष संयोग होने के कारण भोर से ही मंदिर प्रांगण में हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध थे। सुबह के समय अचानक दो ट्रेनों से बड़ी संख्या में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का जत्था स्टेशन से सीधे मंदिर पहुंचा, जिससे प्रवेश द्वारों और परिसर पर अचानक अत्यधिक दबाव बन गया।
शुरुआती सूचनाओं में बिजली के पोल अथवा तार से संबंधित किसी घटना के बाद मची अफरा-तफरी का उल्लेख है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।
राहत व बचाव कार्य जारी, घायलों का इलाज
भगदड़ मचते ही मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस और स्थानीय सेवादारों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे और भीड़ के बीच दबे लोगों को बाहर निकाला।
घायलों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों की विशेष टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती के साथ स्थिति को नियंत्रित किया गया है।
घटना ने श्रावण मास में इतने बड़े धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) की पूर्व तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच के बाद जवाबदेही तय की जाएगी।


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