‘अतिथि देवो भव’: कांवड़ मार्ग पर भक्ति व आधुनिकता का संगम; बिना प्याज-लहसुन के चाइनीज व शाही व्यंजन, हाईटेक रोटियां और ईको-फ्रेंडली व्यवस्था
मेरठ। श्रावण मास की पवित्र कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था, सेवा, स्वच्छता और आधुनिक तकनीकों का एक अद्भुत व भव्य रूप देखने को मिल रहा है। मेरठ में कांवड़ मार्ग पर स्थापित शिविरों में शिवभक्तों के स्वागत के लिए ऐसी शाही व्यवस्थाएं की गई हैं जो किसी बड़े विवाह समारोह से कम नहीं हैं। पूरी तरह सात्विक (बिना प्याज और लहसुन) परंपरा का पालन करते हुए कांवड़ियों को पारंपरिक देसी व्यंजनों के साथ-साथ पिज्जा, पास्ता, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसे आधुनिक पकवान भी परोसे जा रहे हैं।
🍽️ विवाह समारोह जैसा शाही व सात्विक मेन्यू
शिविरों में भोजन व्यवस्था को समय के अनुसार बेहद वैज्ञानिक और रुचिकर तरीके से बांटा गया है:
- प्रातः काल: गरम चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी।
- सुबह का नाश्ता: समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो।
- दोपहर का भोजन: शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, बटर व चूरचूर नान, जीरा राइस के साथ रसमलाई, रबड़ी-जलेबी और रसगुल्ले।
- शाम का नाश्ता: स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज और गर्म सूप।
- रात्रि भोजन: छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, रोटियां, खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड व गुलाब जामुन।
⚙️ ऑटोमैटिक मशीनों ने बढ़ाई हाईटेक रसोई की रफ्तार
कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में तकनीक ने सेवा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। संयोजक **नीरज मित्तल** और संचालक **राजेश खन्ना** ने बताया कि रसोई में 20 किलो आटा एक साथ गूंथने वाली मशीन और **ऑटोमैटिक रोटी मेकर** लगाई गई है।
- रोटी मशीन की क्षमता: 1 मिनट में 16 रोटियां और 1 घंटे में लगभग 900 रोटियां बनकर तैयार हो रही हैं।
- दैनिक उत्पादन: प्रतिदिन 6 से 7 हजार रोटियां और आधुनिक कटर मशीनों से मिनटों में सब्जियां काटी जा रही हैं।
🥛 उपवास रखने वालों के लिए विशेष फलाहार व केसर युक्त दूध
मोदीपुरम शिविर संचालक **सुधीर रस्तोगी** के अनुसार, व्रत रखने वाले शिवभक्तों के लिए कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू की फलाहारी सब्जी और मौसमी फल दिए जा रहे हैं। लंबी पैदल यात्रा से थके कांवड़ियों की थकान मिटाने के लिए **कुल्हड़ में गर्म केसर युक्त दूध** की विशेष व्यवस्था की गई है।
🌱 ईको-फ्रेंडली भंडारों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
योगी सरकार की गाइडलाइन के तहत शिविरों को पूरी तरह **प्लास्टिक व थर्माकोल मुक्त** बनाया गया है। भोजन परोसने के लिए केवल **स्टेनलेस स्टील के बर्तनों** का उपयोग हो रहा है, जिससे स्वच्छता बनी रहे और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।
“हमारा ध्येय केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाना है। सैकड़ों स्वयंसेवक 24 घंटे जुटकर 'अतिथि देवो भव' के संकल्प को पूरा कर रहे हैं। प्रशासन की टीमें भी लगातार गुणवत्ता की जांच कर रही हैं।”
— अमित मूर्ति (संचालक, मां कांवड़ सेवा शिविर)

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