5-डे बैंकिंग को लेकर आर-पार के मूड में बैंककर्मी: लखनऊ में काला बैज पहनकर किया काम, SBI मुख्य शाखा पर धरना; 28 से 30 सितंबर तक 3 दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का ऐलान
लखनऊ: बैंकों में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह (5-Day Banking) तत्काल प्रभाव से लागू करने और लंबित सेवा संबंधी मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार को राजधानी लखनऊ सहित राज्य भर में बैंककर्मियों ने काला बैज धारण कर कामकाज किया। शाम को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) मुख्य शाखा के प्रांगण में विशाल धरना एवं विरोध प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की उपेक्षापूर्ण नीतियों के विरुद्ध जोरदार हुंकार भरी गई।
📌 बैंक आंदोलन के मुख्य बिंदु एवं आगामी कार्ययोजना:
- प्रमुख मांग: सभी सार्वजनिक और निजी बैंकों में 5 दिवसीय कार्यप्रणाली अविलंब लागू की जाए।
- विरोध का स्वरूप: दिन भर काला बैज पहनकर काम किया गया, शाम 5 बजे एसबीआई मुख्य शाखा पर विशाल प्रदर्शन।
- 25 सितंबर का कार्यक्रम: एसबीआई मुख्य शाखा, लखनऊ पर विरोध प्रदर्शन और पैदल रैली का आयोजन।
- महा-हड़ताल की चेतावनी: मांगें पूरी न होने पर 28, 29 एवं 30 सितंबर को लगातार तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल।
- एकजुटता: यूएफबीयू के सभी सातों घटक संगठनों के वरिष्ठ नेताओं व महिला कर्मचारियों की बड़ी भागीदारी।
📊 UFBU का चरणबद्ध आंदोलन कार्यक्रम (आगामी तिथियां)
| दिनांक | प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम | प्रभाव / स्थल |
|---|---|---|
| 22 सितंबर 2026 | काला बैज लगाकर कार्य संपादन एवं सायं 5 बजे धरना प्रदर्शन | एसबीआई मुख्य शाखा, लखनऊ |
| 25 सितंबर 2026 | गेट मीटिंग, विरोध प्रदर्शन एवं विशाल कर्मचारी रैली | राजधानी लखनऊ के प्रमुख केंद्र |
| 28, 29 व 30 सितंबर 2026 | लगातार 3 दिवसीय अखिल भारतीय बैंक हड़ताल | देशभर की सभी बैंक शाखाएं ठप रहेंगी |
"उपेक्षा और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं करेंगे बैंककर्मी": यूएफबीयू
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय से आईबीए (IBA) और वित्त मंत्रालय के साथ सहमति बनने के बावजूद केंद्र सरकार 5 दिवसीय बैंकिंग की अधिसूचना जारी करने में टालमटोल कर रही है।
"बैंककर्मी तनावपूर्ण माहौल और वर्कलोड के भारी दबाव में काम कर रहे हैं। जब एलआईसी, रिजर्व बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों में 5 दिवसीय कार्यप्रणाली लागू हो सकती है, तो वाणिज्यिक बैंकों के कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? केंद्र सरकार की उपेक्षा के कारण हमें मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा है। जब तक अधिसूचना जारी नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा।"
— अनिल श्रीवास्तव (जिला संयोजक, UFBU, लखनऊ)
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख बैंक नेताओं की सक्रिय अगुवाई
राज्य स्तरीय धरने में फोरम के सभी सातों घटकों के वरिष्ठ बैंक नेताओं ने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया। इनमें कामरेड वाई के अरोड़ा, दिनेश कुमार सिंह, अजय पांडेय, एस के संगतानी, लक्ष्मण सिंह, वी के माथुर, संदीप सिंह, अशोक अग्रवाल तथा सचिन केशरवानी प्रमुख रहे।
इनके अतिरिक्त सभा को कामरेड एस डी मिश्र, वी के सेंगर, शकील अहमद, नदीम सिद्दीकी, आर एन शुक्ला, विंध्य विक्रम, राकेश पाण्डेय, अनूप कुमार, भारती शर्मा, स्वाति सिंह, तारकेश्वर चौहान, धीरज सिंह, आशुतोष वर्मा, पुष्पेंद्र वर्मा, अनुषा दुबे, सुप्रिया गुप्ता, करुणेश शुक्ला, आकाश शर्मा, वी के श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, गुरप्रीत सिंह, ओ एन टंडन, शिव कुमार सिंह, आशीष वर्मा तथा एम जेड हसन ने भी संबोधित किया।
आम जनता को हो सकती है असुविधा, समय रहते निपटाएं जरूरी काम
फोरम के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि 25 सितंबर को एसबीआई मुख्य शाखा पर रैली निकाली जाएगी। इसके बाद यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 28 से 30 सितंबर तक लगातार 3 दिनों की पूर्ण हड़ताल होगी।
यदि यह हड़ताल होती है, तो माह के अंतिम दिनों में चेक क्लीयरेंस, नकद लेनदेन, ड्राफ्ट और शाखा आधारित कामकाज पूरी तरह ठप रह सकते हैं। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि हड़ताल से होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी शासन और बैंक प्रबंधन की हठधर्मिता की होगी।


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