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तकनीक से पर्यावरण जागरूकता: नवयुग कॉलेज में वृक्षों की पहचान के लिए QR कोड पहल, छात्राओं ने लिया संरक्षण का संकल्प

नवयुग कन्या महाविद्यालय में तकनीक से पर्यावरण संरक्षण: परिसर के वृक्षों पर लगे QR कोड, स्कैन करते ही मिलेगी वनस्पति की संपूर्ण जानकारी

📍 स्थान: नवयुग कन्या महाविद्यालय, राजेंद्र नगर, लखनऊ | 📅 दिनांक: 22 अगस्त 2026 | 🌿 श्रेणी: पर्यावरण, शिक्षा एवं नवाचार

लखनऊ: राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पर्यावरण संरक्षण और जैव-विविधता जागरूकता की दिशा में एक अनूठी पहल की गई। कॉलेज की इको रेस्टोरेशन कमेटी एवं फ्लोरा-फॉना कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में स्थित विभिन्न औषधीय व छायादार वृक्षों पर QR कोड लगाए गए। इस डिजिटल नवाचार के माध्यम से छात्राएं अब केवल एक स्कैन में पेड़ों की प्रजाति, वैज्ञानिक नाम और उनकी उपयोगिता जान सकेंगी।

📌 QR कोड वृक्ष जागरूकता पहल के मुख्य बिंदु:

  • संरक्षक: महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय के मार्गदर्शन में आयोजन।
  • आयोजक: इको रेस्टोरेशन कमेटी एवं फ्लोरा-फॉना कमेटी, नवयुग कन्या महाविद्यालय।
  • डिजिटल जानकारी: QR कोड स्कैन करते ही सामान्य नाम, वानस्पतिक (वैज्ञानिक) नाम, औषधीय गुण और विशेषताएं उपलब्ध।
  • प्रमुख वृक्ष: शरीफा, आम, मेहंदी, बेल, नीम, कचनार, अशोक आदि पेड़ों पर लगाए गए कोड।
  • उद्देश्य: छात्राओं में वनस्पति विज्ञान, जैव-विविधता और हरित परिसर के प्रति रुचि विकसित करना।

स्मार्टफोन स्कैन से खुलेगा वृक्षों का डिजिटल संसार

महाविद्यालय प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस तकनीक आधारित पहल के तहत परिसर में लगे प्रमुख वृक्षों के तनों पर विशेष मेटल/लेमिनेटेड QR कोड प्लेट्स लगाई गई हैं। छात्राएं और आगंतुक अपने स्मार्टफोन के कैमरे या स्कैनर से कोड को स्कैन करके संबंधित पौधे का संपूर्ण वनस्पति डेटाबेस देख सकते हैं।

  • वानस्पतिक पहचान: वृक्ष का सामान्य और वानस्पतिक (बॉटनिकल) नाम।
  • पारिस्थितिक महत्व: पर्यावरण संतुलन, ऑक्सीजन उत्पादन और कार्बन अवशोषण में भूमिका।
  • आयुर्वेदिक व घरेलू उपयोग: पारंपरिक चिकित्सा और दैनिक जीवन में पत्तियों, छाल व फलों का महत्व।

छात्राओं ने उत्साहपूर्वक स्कैन कर जानी पेड़ों की खूबियां

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया और अपने मोबाइल से नीम, कचनार, बेल और शरीफा जैसे पेड़ों के QR कोड स्कैन करके जानकारी प्राप्त की।

"यह पहल आधुनिक तकनीक और प्रकृति के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है। जब युवा पीढ़ी अपने आसपास की वनस्पति को उसके वैज्ञानिक और औषधीय गुणों के साथ पहचानेगी, तभी पर्यावरण संरक्षण की भावना वास्तविक रूप से जाग्रत होगी।"
— प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय)

शिक्षिकाओं और छात्राओं ने लिया हरित परिसर का संकल्प

इस जागरूकता अभियान में समिति की सदस्य शिक्षिकाओं—प्रो. सरोज रानी, डॉ. अलका सिंह, सुश्री दीक्षा, डॉ. गगनप्रीत एवं डॉ. दीपशिखा ने सक्रिय रूप से भाग लिया और छात्राओं को स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। सभी उपस्थित प्राध्यापकों एवं छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर को अधिक हरित, स्वच्छ और जैव-विविधता से परिपूर्ण बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

निष्कर्ष: नवयुग कन्या महाविद्यालय का यह डिजिटल कदम अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल है, जो पर्यावरण शिक्षा को कक्षा के कमरों से बाहर निकालकर व्यावहारिक और संवादात्मक बनाता है।

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