नवयुग कन्या महाविद्यालय में प्रतियोगिताओं का भव्य समापन: गोस्वामी तुलसीदास व स्वामी करपात्री के प्राकट्योत्सव पर छात्राओं को मिले नकद पुरस्कार
लखनऊ: आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल तथा नवयुग कन्या महाविद्यालय के संस्कृत एवं हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज एवं गोस्वामी तुलसीदास महाराज के पावन प्राकट्योत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित चित्रकारी, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता का भव्य समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को नकद धनराशि, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
📌 समापन समारोह के मुख्य बिंदु:
- पावन प्रसंग: गोस्वामी तुलसीदास एवं धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज का प्राकट्योत्सव।
- आयोजक: संस्कृत एवं हिन्दी विभाग, नवयुग कन्या महाविद्यालय व शंकर भारतोद्भासक मण्डल।
- पुरस्कार वितरण: प्रथम (₹3000), द्वितीय (₹2000), तृतीय (₹1000) एवं सांत्वना पुरस्कार (₹500)।
- पर्यावरण संदेश: अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्रम, रामचरितमानस एवं स्मृति चिन्ह के साथ पौध भेंट कर किया गया।
- सहभागिता: 200 से अधिक छात्राओं और प्राध्यापकों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग।
दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, गोस्वामी तुलसीदास एवं स्वामी करपात्री की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा मुस्कान मिश्रा ने सुमधुर स्वर में दीप प्रज्ज्वलन मंत्र एवं सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. वन्दना द्विवेदी ने संपूर्ण विषय-वस्तु की स्थापना करते हुए प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रस्तुत की।
"तुलसी की वाणी और करपात्री की तपस्या युवा पीढ़ी की मार्गदर्शक"
बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) मनोज ने कहा कि आधुनिक दौर में युवाओं को ज्ञान-विज्ञान के साथ अपनी सनातन सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास का साहित्य मर्यादा का मार्ग सिखाता है और स्वामी करपात्री की तपस्या धर्मनिष्ठा की प्रेरणा देती है।
"तुलसीदास जी हमें बताते हैं कि महानता केवल ज्ञान में नहीं बल्कि श्रेष्ठ आचरण और चरित्र में होती है। धर्म का मूल लोकमंगल है— 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।' स्वामी करपात्री जी हमें संस्कृति और शास्त्रों का अध्ययन श्रद्धा के साथ-साथ विवेक और तर्क से करने की प्रेरणा देते हैं।"
— प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय)
धवल चरित्र और लोकमंगल की भारतीय परंपरा
शंकर उद्भासक मंडल के प्रमुख रामबाबू पांडे ने कहा कि तुलसीदास ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के धवल चरित्र को जन-जन के हृदय तक पहुंचाया, वहीं स्वामी करपात्री ने भारतीय शास्त्र परंपरा की वैचारिक रक्षा की। मंडल के महासचिव डॉ. विशाल शुक्ला ने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री के जीवन, तपस्या और उनकी कृतियों पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
पुरस्कार वितरण एवं गरिमामयी उपस्थिति
निबंध, चित्रकारी और भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि एवं प्राचार्या द्वारा:
- प्रथम पुरस्कार: ₹3,000 नकद, प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह
- द्वितीय पुरस्कार: ₹2,000 नकद, प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह
- तृतीय पुरस्कार: ₹1,000 नकद, प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह
- सांत्वना पुरस्कार: ₹500 नकद, प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह
समारोह में प्रोफेसर संगीता कोतवाल, डॉ. (मेजर) मनमीत कौर सोढ़ी, प्रो. संगीता शुक्ला, प्रो. सुषमा त्रिवेदी, प्रो. नीतू सिंह, डॉ. ऐश्वर्या सिंह, श्रीमती नीलम यादव, प्रो. सीमा पाण्डेय, डॉ. अंकिता पांडेय, डॉ. मेघना यादव, योगेश तिवारी, हरि वर्मा सहित 200 से अधिक छात्राएं उपस्थित रहीं। मंच का कुशल संचालन डॉ. अपूर्वा अवस्थी द्वारा किया गया तथा प्राचार्या ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।



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