नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद यूपी के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट: सीएम योगी ने महाराजगंज और कुशीनगर प्रशासन को दिए 24 घंटे निगरानी के निर्देश
लखनऊ: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीमावर्ती जनपद महाराजगंज और कुशीनगर के जिला प्रशासन को सभी एहतियाती व सुरक्षात्मक उपाय तत्काल सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
📌 अलर्ट और प्रशासनिक तैयारियों के मुख्य बिंदु:
- प्रभावित नदियां: नेपाल के पानी से गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में तीव्र वृद्धि की आशंका।
- हाई अलर्ट पर जिले: महाराजगंज और कुशीनगर के तराई व तटवर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी।
- सीएम के निर्देश: बाढ़ राहत चौकियों, नावों, राहत सामग्री और मेडिकल टीमों को 24 घंटे मुस्तैद रखने के आदेश।
- सद्भावना संदेश: मुख्यमंत्री ने नेपाल त्रासदी पर दुख जताया और भगवान पशुपतिनाथ से सभी की कुशलता की प्रार्थना की।
गंडक और नारायणी नदियों के तटवर्ती इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
नेपाल के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों और रसुवा में अत्यधिक बारिश व भोटेकोशी नदी के उफान के चलते भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाली गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में अचानक उछाल आने की संभावना है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को तटबंधों (Embankments) की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग करने तथा संवेदनशील प्वाइंट्स पर बालू की बोरियों और फ्लड फाइटिंग सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश दिए गए हैं।
"आपदा प्रबंधन दल रहें पूरी तरह तैयार": मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री ने दोनों जनपदों के जिलाधिकारियों, पुलिस कप्तानों और आपदा प्रबंधन इकाइयों को निर्देशित किया है कि निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जाए।
"नेपाल में बाढ़ के कारण उत्पन्न स्थिति और हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है। हम पड़ोसी मित्र राष्ट्र के नागरिकों की सुरक्षा के लिए भगवान श्री पशुपतिनाथ जी से प्रार्थना करते हैं। सीमावर्ती जिलों में प्रशासन स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखे और जन-धन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करे।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन मुस्तैद
प्रशासनिक स्तर पर संभावित जलभराव से निपटने के लिए:
- तटवर्ती गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी गई है।
- बाढ़ शरणालयों (Flood Shelters) की साफ-सफाई और राशन किट की व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है।
- एसडीआरएफ (SDRF) और पीएसी की फ्लड यूनिट्स को मोटरबोट्स के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

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