‘रंग दे बसंती’ से युवाओं ने दिखाया उत्तर प्रदेश का बदलाव: लखनऊ में ग्रैफिटी वॉल पर उकेरी भयमुक्त यूपी की तस्वीर; ‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’ का दिया संदेश
लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस से पूर्व उत्तर प्रदेश में युवाओं को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करने के लिए 'रंग दे बसंती' अभियान का आगाज़ हुआ है। इस अभियान के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय के पास आयोजित 'ग्रैफिटी वॉल' (Graffiti Wall) कार्यक्रम युवाओं व कलाकारों के आकर्षण का केंद्र बना। यहाँ शहर के युवा कलाकारों ने भित्ति चित्रों (Wall Paintings) के माध्यम से वर्ष 2017 से पहले और उसके बाद के उत्तर प्रदेश में आए सकारात्मक बदलावों को जीवंत रूप में दर्शाया।
🎨 ‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’
इस अभियान की मूल भावना 'बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग' पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को दंगे, हिंसा या दबाव से दूर रखकर रचनात्मक, शांतिपूर्ण और संवाद के माध्यम से अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करना है। 11 से 14 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में कविता, संगीत, चित्रकारी और डिजिटल माध्यमों का प्रयोग किया जा रहा है।
🎨 लाइव पेंटिंग से दिखाया 2017 के पहले व बाद का अंतर
लखनऊ विश्वविद्यालय के पास दीवारों पर कलाकारों ने अपनी कल्पनाशीलता और रंगों से कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर माहौल की तस्वीर उकेरी। युवा चित्रकार **मनीष सरोज** ने 2017 से पहले माफिया राज और उसके बाद के भयमुक्त व विकसित उत्तर प्रदेश के अंतर को अपने चित्रों में प्रदर्शित किया।
💬 युवाओं और छात्रों का संदेश:
- रंजीत (छात्र, लखनऊ विश्वविद्यालय): "भित्ति चित्रों के जरिए मेट्रो के विस्तार, विश्वस्तरीय सड़कों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। हम रंगों के माध्यम से बदलते यूपी की असली तस्वीर लोगों के सामने रख रहे हैं।"
- अमन शुक्ला (युवा प्रतिभागी): "युवाओं को अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन दंगा या हिंसा सही राह नहीं है। अभिव्यक्ति के लिए कला, संगीत और संवाद जैसे रचनात्मक माध्यम ही सबसे बेहतर जरिया हैं।"
📅 'रंग दे बसंती' अभियान के आगामी कार्यक्रम:
- 13 अगस्त (मुजफ्फरनगर): सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित विशेष कॉमिक का वितरण और विभिन्न स्कूलों में युवाओं के साथ परिचर्चा/संवाद कार्यक्रम।
- 14 अगस्त (लॉन्चिंग इवेंट): अभियान का विशेष गीत 'डर से आजादी' लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही रैप, संगीत और डिजिटल आर्ट का शानदार समागम होगा।
“यह अभियान स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले युवाओं में नई सोच और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है। दीवारें केवल चित्रकारी का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और युवाओं के विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बन चुकी हैं।”


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