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NHM कर्मियों ने खोला मोर्चा: न्यूनतम ₹18,000 वेतन, नियमितीकरण व ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर प्रमुख सचिव को सौंपा मांग-पत्र; 1 अक्टूबर से आंदोलन का ऐलान

NHM कार्मिकों की लंबित मांगों को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रमुख सचिव को सौंपा मांग-पत्र: न्यूनतम ₹18,000 वेतन व नियमितीकरण की मांग, 1 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 28 सितंबर 2026 | 🩺 श्रेणी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), संविदा कर्मचारी आंदोलन, वेतन नीति एवं जनस्वास्थ्य

लखनऊ: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश के अंतर्गत विभिन्न संवर्गों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की लंबित सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ गया है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा गठित संयुक्त संघर्ष समिति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव को एक विस्तृत मांग-पत्र प्रेषित किया है। समिति ने न्यूनतम ₹18,000 प्रतिमाह मानदेय, नियमितीकरण, स्पष्ट स्थानांतरण नीति और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी की मांग करते हुए 1 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की औपचारिक घोषणा कर दी है।

📌 संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख मांग बिंदु:

  • वेतन नीति का निर्धारण: सभी संवर्गों के लिए न्यूनतम ₹18,000 मासिक वेतन और वरिष्ठता व कार्यानुभव के आधार पर नियमित इंक्रीमेंट नीति।
  • समायोजन व नियमितीकरण: केंद्र सरकार की गाइडलाइंस और CHO निर्देशों के तहत राज्य स्वास्थ्य व्यवस्था में स्थायी समावेशन।
  • पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी: रिक्त पदों को तत्काल भरने और गृह जनपद/पारस्परिक स्थानांतरण हेतु सुस्पष्ट नियम लागू करने की मांग।
  • पूर्ण सामाजिक सुरक्षा: ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और व्यापक स्वास्थ्य बीमा का सुरक्षा कवच।
  • आउटसोर्स कार्मिकों का संरक्षण: आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवा सुरक्षा और प्रस्तावित आउटसोर्स सेवा निगम के दायरे में लाना।

📊 चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा: विरोध प्रदर्शन का पूरा कार्यक्रम

प्रस्तावित तिथि आंदोलन / कार्यक्रम का स्वरूप स्थान / स्तर
29 एवं 30 सितंबर 2026 जिला प्रशासन व संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषण समस्त 75 जनपद स्तर पर
1 अक्टूबर 2026 से निरंतर डिजिटल स्ट्राइक एवं बांहों पर काला फीता बांधकर सेवा कार्य राज्यभर के समस्त स्वास्थ्य केंद्र
5, 6 एवं 7 अक्टूबर 2026 मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन सभी जिला सीएमओ (CMO) कार्यालय
8 अक्टूबर 2026 संयुक्त एकत्रीकरण एवं राज्यस्तरीय वृहद आंदोलनात्मक सभा राजधानी लखनऊ मुख्यालय

मांग-पत्र के 5 प्रमुख बिंदु: स्वास्थ्य कर्मियों का भविष्य सुरक्षित करने की गुहार

1. पारदर्शी वेतन नीति एवं न्यूनतम ₹18,000 मानदेय: एनएचएम कर्मियों का न्यूनतम वेतन ₹18,000 प्रतिमाह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कार्मिकों की कार्यावधि, योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर वेतन पुनरीक्षण की स्पष्ट व्यवस्था बने।

2. राज्य कैडर में समावेशन व नियमितीकरण: वर्षों से समर्पित भाव से काम कर रहे संविदा कर्मियों को राज्य की नियमित स्वास्थ्य संरचना में समाहित किया जाए। भारत सरकार द्वारा दीर्घकालिक संविदा कर्मियों और सीएचओ (CHO) के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों को यूपी में तत्काल लागू किया जाए।

3. रिक्त पदों पर भर्ती और ट्रांसफर पॉलिसी: मिशन में स्वीकृत रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की जाए और गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर कार्यरत कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मियों के लिए पारदर्शी स्थानांतरण नीति लाई जाए।

4. वैधानिक सामाजिक सुरक्षा का लाभ: संविदा कर्मियों को सेवानिवृत्ति या असमय अनहोनी की स्थिति में सुरक्षा देने के लिए ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा का लाभ अनिवार्य रूप से दिया जाए।

5. आउटसोर्स कार्मिकों को सेवा संरक्षण: ठेकेदारी व्यवस्था में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों का शोषण रोका जाए और उन्हें प्रस्तावित आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से समायोजित कर जॉब सिक्योरिटी दी जाए।

"स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं NHM कर्मी, अब नीतिगत समाधान जरूरी": अमित तोमर

"एनएचएम संवर्ग के कर्मी प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, संचारी रोग नियंत्रण और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के सफल संचालन की रीढ़ हैं। दशकों की निष्ठावान सेवा के बाद भी ये कर्मी बुनियादी वेतन, सुरक्षा और सम्मान से वंचित हैं। हमने प्रमुख सचिव को ज्ञापन भेजकर आग्रह किया है कि समयबद्ध नीतिगत निर्णय और आवश्यक शासनादेश जारी कर गतिरोध को समाप्त किया जाए।"
— अमित तोमर (संयोजक, संयुक्त संघर्ष समिति, NHM उत्तर प्रदेश)

समाधान से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

समिति ने शासन को आगाह किया है कि स्वास्थ्य कर्मियों में लंबे समय से व्याप्त असंतोष कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। यदि समय रहते इन प्राथमिक मांगों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जाता है, तो इससे न केवल हजारों संविदा कर्मियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण व नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति मिलेगी।

अंतिम आह्वान: संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेशभर के सभी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पतालों में कार्यरत एनएचएम व आउटसोर्स कर्मियों से अपील की है कि वे घोषित तिथियों पर चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करें।

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