सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए दो दिवसीय वेंडर विकास कार्यक्रम-2026 का समापन: प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील बोले— 'सिर्फ ऋण देना पर्याप्त नहीं, MSME को बाजार और ऑर्डर से जोड़ना जरूरी'
लखनऊ: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (भारत सरकार) के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर तथा PHDCCI के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए वेण्डर विकास कार्यक्रम-2026” का शुक्रवार को गोमती नगर स्थित पीएचडी हाउस में भव्य समापन हुआ। इस कॉन्क्लेव में 200 से अधिक एमएसई उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों, वित्तीय विशेषज्ञों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
📌 कार्यक्रम के प्रमुख निष्कर्ष एवं बिंदु:
- 200+ उद्यमी शामिल: राज्य भर से आए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों ने सरकारी खरीद और बाजार तंत्र को समझा।
- फॉरवर्ड लिंकेज पर बल: MSMEs और SHGs को बड़े कॉर्पोरेट्स व सरकारी प्रोक्योरमेंट से जोड़ने की रणनीति।
- CM YUVA योजना: ऋण के साथ-साथ युवाओं को स्थायी ऑर्डर और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल देने पर जोर।
- विशेषज्ञ सत्र: TReDS, एक्सपोर्ट फाइनेंस, साइबर सुरक्षा, AI और बौद्धिक संपदा (IPR) पर तकनीकी मार्गदर्शन।
'वित्त से उत्पादन और बाजार से ऑर्डर तक की मजबूत कड़ी जरूरी': प्रमुख सचिव
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन) शशि भूषण लाल सुशील ने वित्तीय सहायता को सीधे बाजार और स्थायी कारोबारी अवसरों से जोड़ने का आह्वान किया।
"CM YUVA जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ ऋण या सब्सिडी वितरित करना नहीं होना चाहिए। सिर्फ ऋण देना पर्याप्त नहीं है—हमें 'वित्त से उत्पादन, उत्पादन से बाजार, बाजार से ऑर्डर और अंततः ऑर्डर से स्थायी राजस्व' तक एक पूरी मजबूत श्रृंखला (Value Chain) तैयार करनी होगी ताकि उद्यमी आत्मनिर्भर बन सकें।"
— शशि भूषण लाल सुशील (प्रमुख सचिव, MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन, उप्र)
TReDS और संस्थागत खरीदारों से जुड़ेंगे उद्यमी
प्रमुख सचिव ने उद्यमियों के साथ सीधे संवाद के दौरान TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) जैसे वित्तीय प्लेटफॉर्म्स के व्यापक उपयोग पर बल दिया, जिससे एमएसएमई इकाइयों को समय पर भुगतान मिल सके।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सचिव (एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन) प्रांजल यादव तथा निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अतिरिक्त आयुक्त पवन अग्रवाल उपस्थित रहे। एमएसएमई-डीएफओ कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा (IEDS) ने स्वागत संबोधन में कहा कि यह मंच लघु इकाइयों को पीएसयू और रक्षा/सरकारी खरीद में वेंडर बनने का सीधा अवसर देता है।
निर्यात, साइबर सुरक्षा, एआई और प्रोक्योरमेंट पर तकनीकी सत्र
दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय व वैश्विक विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:
- निर्यात व जोखिम प्रबंधन: GJEPC के संजय मदान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार अवसरों, ECGC के मो. शाहिद ने जोखिम प्रबंधन और EXIM बैंक के आशीष सोनी ने ट्रेड फाइनेंस पर मार्गदर्शन दिया।
- रिसर्च व पेटेंट: CSIR-CIMAP के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. श्रीवास्तव ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तथा आईपीआर अटॉर्नी नवदीप श्रीधर ने पेटेंट/कॉपीराइट पर चर्चा की।
- पीएसयू प्रोक्योरमेंट: गेल (GAIL) की सीनियर मैनेजर ट्विंकल गौर ने ई-प्रोक्योरमेंट व टेंडरिंग प्रक्रिया की जानकारी दी।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: शैलेन्द्र खरे ने एमएसएमई सेक्टर में AI और साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक उपयोग पर सत्र लिया।
अशोक लेलैंड सहित प्रमुख औद्योगिक घरानों की मौजूदगी
कार्यक्रम में अशोक लेलैंड के सप्लाई चेन लीड मनोज शुक्ला सहित कई बड़े उद्योगपतियों ने वेंडर आवश्यकताओं को साझा किया। कार्यक्रम के संयोजन में पीएचडीसीसीआई के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक अतुल श्रीवास्तव तथा एमएसएमई-डीएफओ कानपुर के सहायक निदेशक अमित बाजपेयी, नीरज कुमार एवं सोनिका रस्तोगी की प्रमुख भूमिका रही।


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