प्रकृति की गोद में भीमाशंकर के दर्शन से शुरू हुआ असम दौरा: डाकिनी पर्वत पर अविरल जलधारा के बीच विराजे भोलेनाथ; राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने बताया ज्योतिर्लिंग का रहस्य
गुवाहाटी: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में असम-मेघालय मीडिया टूर पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने अपने पूर्वोत्तर भ्रमण का शुभारंभ गुवाहाटी स्थित पौराणिक भीमाशंकर मंदिर के दर्शन-पूजन के साथ किया। घने जंगलों, सुरम्य पहाड़ियों और चट्टानों के बीच से बहती अविरल जलधारा के बीच विराजमान देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर पत्रकारों के दल ने अलौकिक आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।
📌 भीमाशंकर दर्शन एवं मीडिया टूर के मुख्य बिंदु:
- आध्यात्मिक शुरुआत: यूपी मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने गुवाहाटी के डाकिनी पर्वत स्थित भीमाशंकर धाम से की असम दौरे की शुरुआत।
- प्राकृतिक छटा: पहाड़ियों की हरियाली, शांत वन क्षेत्र और प्राकृतिक जलधारा के बीच स्थित स्वयंभू शिवलिंग ने मोहा मन।
- राज्यपाल द्वारा पौराणिक उल्लेख: राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शिव महापुराण के श्लोक 'डाकिन्यां भीमशंकरम्' का संदर्भ देकर स्पष्ट की स्थानीय मान्यता।
- ज्योतिर्लिंग मान्यता: भीमाशंकर को लेकर महाराष्ट्र और असम दोनों क्षेत्रों में गहरी आस्था व मान्यताएं प्रचलित।
- सांस्कृतिक एकात्मता: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के तहत धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को परस्पर जोड़ने पर बल।
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📊 गुवाहाटी भीमाशंकर धाम: पौराणिक एवं भौगोलिक स्वरूप
| आयाम / पहलू | विवरण एवं धार्मिक संदर्भ |
|---|---|
| भौगोलिक अवस्थिति | पमोही वन क्षेत्र, डाकिनी पर्वतमाला, गुवाहाटी (असम) |
| धार्मिक श्लोक संदर्भ | शिव महापुराण: "डाकिन्यां भीमशंकरम्..." |
| प्राकृतिक परिवेश | पहाड़ियों से निरंतर बहती प्राकृतिक जलधारा द्वारा शिवलिंग का निरंतर जलाभिषेक |
| आध्यात्मिक महत्व | असम व पूर्वोत्तर के श्रद्धालुओं द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग स्वरूप में अटूट आस्था |
राज्यपाल ने समझाया डाकिनी पर्वत और ज्योतिर्लिंग का रहस्य
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उत्तर प्रदेश से आए मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान गुवाहाटी स्थित भीमाशंकर की ऐतिहासिकता और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा में शिव महापुराण के अनुसार डाकिनी क्षेत्र में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य की कथा आती है।
"शिव महापुराण में 'डाकिन्यां भीमशंकरम्' का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। असम की समृद्ध लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुवाहाटी की यह सुरम्य डाकिनी पहाड़ी वही पावन स्थली है जहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजे जाते हैं। महाराष्ट्र के साथ-साथ असम के इस पावन धाम को भी श्रद्धालु उसी अगाध श्रद्धा के साथ नमन करते हैं।"
— लक्ष्मण प्रसाद आचार्य (राज्यपाल, असम)
आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
मंदिर परिसर का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। आधुनिक कंक्रीट के निर्माण से दूर, यह देवालय घनी वनस्पति और पर्वतीय ढलानों से घिरा हुआ है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बारहमासी पहाड़ी जलधारा निरंतर प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का अभिषेक करती रहती है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर परिसर की परिक्रमा की, स्थानीय पुजारियों से इस तीर्थ के इतिहास को जाना और असम की समृद्ध जैव विविधता को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' को मिल रही मजबूती
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि असम केवल अपनी प्राकृतिक संपदा और चाय बगानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, तंत्र-मंत्र, शक्ति उपासना और शैव परंपरा का अत्यंत प्राचीन केंद्र है।
उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के मीडियाकर्मी पूर्वोत्तर के ऐसे आध्यात्मिक केंद्रों पर पहुंचते हैं और यहां की आस्था व विरासत को अपनी लेखनी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाते हैं, तो इससे राष्ट्रीय एकता और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का संकल्प और अधिक प्रगाढ़ होता है।


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