अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC की बदहाली की तस्वीरें सामने: ₹821 करोड़ खर्च होने के बाद भी अधूरा; अब ₹200 करोड़ के निजी निवेश से पूरा कराने की तैयारी
लखनऊ: राजधानी के पॉश इलाके गोमती नगर स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPNIC) की बदहाली और अधूरे निर्माण की तस्वीरें एक बार फिर सार्वजनिक हुई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में 2013 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब तक ₹821.74 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च की जा चुकी है, फिर भी यह केंद्र पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। वर्तमान में परिसर में काई, सीलन, अधूरे फ्लोर और तिरपाल से ढके महंगे उपकरण प्रशासनिक अनदेखी और योजनागत खामियों की गवाही दे रहे हैं।
📌 JPNIC परियोजना की प्रमुख स्थितियां:
- लागत में भारी उछाल: 2013 में स्वीकृत प्रारंभिक बजट ₹265 करोड़ से बढ़कर 2016 में ₹864 करोड़ तक पहुंचा।
- कुल जारी धनराशि: शासन की ओर से अब तक कुल ₹821.74 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
- अनियमितताओं के आरोप: Non-Scheduled Items के उपयोग और सक्षम स्तर के अनुमोदन बिना आर्किटेक्चरल बदलाव (जैसे रूफटॉप स्विमिंग पूल व VIP रूम्स)।
- कैबिनेट का फैसला: पूर्ववर्ती संचालन समिति भंग कर परियोजना को 'As Is Where Is' आधार पर LDA को सौंपा गया।
- आगामी समाधान: RITES के सर्वे के आधार पर ₹200 करोड़ के अतिरिक्त निजी निवेश से PPP मॉडल पर संचालन की योजना।
📊 JPNIC परियोजना: बजट और लागत संशोधन की टाइमलाइन
| वर्ष / चरण | स्वीकृत / पुनरीक्षित लागत | संबंधित विवरण |
|---|---|---|
| वर्ष 2013 | ₹265 करोड़ | परियोजना की प्रारंभिक स्वीकृत लागत |
| वर्ष 2016 | ₹864 करोड़ | तीसरी बार पुनरीक्षित लागत (3 गुना से अधिक बढ़ोतरी) |
| अब तक जारी राशि | ₹821.74 करोड़ | एलडीए के पक्ष में 30 वर्ष के ऋण के रूप में दर्ज |
| शेष आवश्यक पूंजी | ~₹200 करोड़ | RITES सर्वे के अनुसार कार्य पूर्ण करने हेतु निजी निवेश प्रस्तावित |
Non-Scheduled Items का इस्तेमाल और अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई
शासकीय रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत में बेतहाशा वृद्धि का मुख्य कारण सरकारी निर्माण प्रक्रियाओं में सामान्यतः न उपयोग किए जाने वाले Non-Scheduled Items को बाजार दरों पर शामिल करना था। उदाहरण के लिए, एयर कंडीशनिंग इंस्टॉलेशन के लिए स्वीकृत ₹32 करोड़ की दर को बढ़ाकर ₹42 करोड़ पर टेंडर जारी किया गया, जिसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया।
इसके अलावा, सक्षम स्तर की पूर्व अनुमति के बिना भवन के मूल डिजाइन में बदलाव करते हुए छत पर स्विमिंग पूल, चौथे तल पर जिम व वीआईपी रूम और छठे तल पर कैफेटेरिया जैसी महंगी सुविधाएं जोड़ी गईं। इस संबंध में जांच के उपरांत तत्कालीन जिम्मेदार अभियंताओं व अधिकारियों पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
निजी संचालन समिति और सुविधाओं के उपभोग पर विवाद
सरकारी परियोजनाओं में सार्वजनिक टेंडर के जरिए संचालन सौंपने की सामान्य व्यवस्था के विपरीत, जेपीएनआईसी के लिए एक निजी संचालन समिति गठित की गई थी। इस समिति में कई गैर-सरकारी सदस्यों को आजीवन व संस्थापक सदस्य बनाते हुए परिसर की सुविधाओं के निःशुल्क उपयोग के अधिकार दिए गए थे।
"3 जुलाई 2025 को राज्य कैबिनेट ने पूर्ववर्ती समिति को भंग कर संपूर्ण परियोजना लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंप दी। अब इसे बिना राजकोषीय बोझ डाले पीपीपी (PPP) मॉडल पर निजी भागीदार के माध्यम से पूरा कराया जाएगा।"
— LDA.
पीपीपी मॉडल से क्या मिलेंगी जनसुविधाएं?
एलडीए द्वारा अधिकृत निजी संचालक लगभग ₹200 करोड़ का पूंजीगत निवेश कर शेष कार्यों को पूर्ण करेगा और 30 वर्षों की अवधि में लगभग ₹821 करोड़ शासन को वापस लौटाएगा। कार्य पूर्ण होने पर परिसर में निम्न विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं संचालित होंगी:
- अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधुनिक कन्वेंशन सेंटर एवं ऑडिटोरियम।
- ओलंपिक स्तर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एवं मल्टीपर्पज इंडोर कोर्ट।
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जीवन-दर्शन पर आधारित आधुनिक डिजिटल संग्रहालय।
- मल्टीलेवल कार पार्किंग, व्यावसायिक स्थल एवं अतिथि कक्ष।





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