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डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिला NMO का प्रतिनिधिमंडल: DGME नियुक्ति, रिसर्च अलाउंस, हॉस्टल सुधार और वेतन विसंगतियों पर हुई विस्तृत चर्चा

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिला NMO का प्रतिनिधिमंडल: DGME नियुक्ति, रिसर्च अलाउंस, वेतन विसंगतियों और हॉस्टल सुधार पर हुई अहम चर्चा; मिले सकारात्मक निर्देश

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 09 सितंबर 2026 | 🩺 श्रेणी: चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सुधार एवं प्रशासनिक नीतियां

लखनऊ: नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन (NMO) के प्रादेशिक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री बृजेश पाठक से उच्चस्तरीय शिष्टाचार भेंट की। बैठक में संगठन ने स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के हित में सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों के लिए उपमुख्यमंत्री का आभार जताया। इसके साथ ही इंटर्न छात्रों के स्टाइपेंड में वृद्धि और नॉन-पीजी रेजिडेंट्स के वेतन में एकरूपता लाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की सराहना करते हुए चिकित्सा शिक्षा व संकाय सदस्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर चर्चा की गई।

📌 बैठक के प्रमुख विमर्श बिंदु:

  • डीजीएमई पद: चिकित्सा शिक्षा विभाग में महानिदेशक (DGME) पद पर वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक की ही तैनाती की मांग।
  • अकादमिक प्रोत्साहन: चिकित्सकों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोधपत्र प्रस्तुति हेतु कॉन्फ्रेंस व रिसर्च अलाउंस।
  • वेतन एवं पदोन्नति: डॉक्टरों को पे-प्रोटेक्शन का लाभ और प्रोन्नति (Promotion) के लिए समयबद्ध इंटरव्यू प्रक्रिया।
  • दवा आपूर्ति में विस्तार: यूपीएमएससीएल (UPMSCL) द्वारा अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक दवाओं का कोटा बढ़ाना।
  • छात्र कल्याण: मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टलों में न्यूनतम मानक निर्धारण और प्रत्येक कॉलेज में 'स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी' का गठन।
  • विशेष स्वास्थ्य पहल: BHU वाराणसी में NHM सहयोग से कॉकलियर इंप्लांट लगाने तथा ऑटिज्म केयर हेतु विशेषज्ञों की प्राथमिकता पर भर्ती।

📊 बैठक के प्रमुख मुद्दे एवं उप मुख्यमंत्री द्वारा प्रदत्त आश्वासन

विषय / मांग प्रस्तावित समाधान एवं शासन का रुख
महानिदेशक (DGME) की नियुक्ति प्रशासनिक अनुभव वाले वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक को जिम्मेदारी देने का आग्रह
शोध एवं कॉन्फ्रेंस भत्ता रिसर्च पेपर्स प्रस्तुति व चिकित्सीय नवाचार हेतु विशेष वित्तीय सहायता
पे प्रोटेक्शन व समयबद्ध प्रोन्नति शिक्षकों के वेतन संरक्षण और पदोन्नति साक्षात्कारों को नियमित करने पर सहमति
दवा आपूर्ति (UPMSCL) हॉस्पिटलों में ओपीडी व आईपीडी के अनुरूप दवाओं के वॉल्यूम में वृद्धि के निर्देश
हॉस्टल व छात्र कल्याण प्रत्येक संस्थान में न्यूनतम मानक सुविधा और स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी की स्थापना
BHU में कॉकलियर इंप्लांट व ऑटिज्म प्रबंधन एनएचएम मदद से इंप्लांट सुविधा और संस्थानों में ऑटिज्म विशेषज्ञ स्टाफ की प्राथमिकता भर्ती

उपमुख्यमंत्री ने दिए तत्काल निस्तारण के निर्देश

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखे गए बिंदुओं को अत्यंत गंभीरता से सुना और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए चिकित्सकों और छात्रों के हितों की रक्षा का पूर्ण भरोसा दिया। उन्होंने कुछ प्राथमिक मुद्दों को तत्काल प्रभाव से सुलझाने हेतु संबंधित सक्षम अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

"प्रदेश सरकार चिकित्सकों, मेडिकल फैकल्टी और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है। स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक उत्कृष्ट बनाने में डॉक्टरों की भूमिका सर्वोच्च है। संगठन द्वारा प्रस्तुत जनहितैषी सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
— बृजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री, उ.प्र.)

बैठक में उपस्थित NMO पदाधिकारी एवं विशेषज्ञ

इस महत्वपूर्ण संवाद में समन्वयक की भूमिका नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर विश्वम्बर सिंह एवं डॉ. भूपेंद्र सिंह ने निभाई।

बैठक में संगठन के विभिन्न प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें:

  • डॉ. विनोद: महामंत्री, एनएमओ पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र
  • प्रोफेसर ज्ञानेश्वर टोंक: अध्यक्ष, मेरठ प्रांत
  • डॉ. कपिल शर्मा एवं डॉ. जयराम: संगठन मंत्री, अवध प्रांत
  • प्रोफेसर आरती लाल चंदानी: अध्यक्षा, कानपुर प्रांत
  • डॉ. अमित सिंह: महामंत्री, गोरक्ष प्रांत
  • डॉ. कमलाकर सिंह: अध्यक्ष, एनएमओ पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • डॉ. राजेश राय: महामंत्री, काशी प्रांत
  • डॉ. अतुल सिंह: प्रतिनिधि, सेवा भारती
सकारात्मक परिणाम: शासन और चिकित्सकों के इस सीधे संवाद से न केवल चिकित्सा शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबित समस्याओं का निस्तारण होगा, बल्कि मेडिकल हॉस्टलों की सुविधाओं और ऑटिज्म जैसे संवेदनशील स्वास्थ्य क्षेत्रों में राज्य स्तर पर ठोस सुधार देखने को मिलेंगे।

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