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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ देश में नंबर-1: मिला ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार, वार्ड-70 बना भारत का सर्वश्रेष्ठ वार्ड

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ देश में नंबर-1: राष्ट्रीय स्तर पर मिला ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार; वार्ड-70 बना देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड

📍 स्थान: नई दिल्ली / लखनऊ | 📅 दिनांक: 07 सितंबर 2026 | 🌿 श्रेणी: पर्यावरण, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 एवं नगर निगम

लखनऊ/नई दिल्ली: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने ऐतिहासिक गौरव हासिल किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 (राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम - NCAP) के अंतर्गत लखनऊ को देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों में नेशनल लेवल रैंक-1 प्राप्त हुई है। इसके साथ ही लखनऊ नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या 70 को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का नंबर-1 सर्वश्रेष्ठ वार्ड घोषित किया गया।

📌 स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 की बड़ी उपलब्धियां:

  • नेशनल क्लीन एयर सिटी रैंक-1: कैटेगरी-1 में लखनऊ को देश भर में पहला स्थान और ₹1.50 करोड़ का नकद पुरस्कार।
  • सर्वश्रेष्ठ वार्ड सम्मान: जोन-4 के वार्ड संख्या 70 को देश का नंबर-1 वार्ड घोषित करते हुए ₹50 लाख का नकद पुरस्कार।
  • पुरस्कार ग्रहणकर्ता: महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान।
  • प्रमुख आधार: 1,100 इलेक्ट्रिक सफाई वाहन, 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें, 100% वैज्ञानिक कचरा निस्तारण और धूल नियंत्रण।
  • ग्रीन मोबिलिटी: शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट्स की स्थापना।

🏆 लखनऊ को मिले राष्ट्रीय पुरस्कारों का विवरण

श्रेणी / वर्ग प्राप्त राष्ट्रीय रैंक प्रोत्साहन राशि
नेशनल क्लीन एयर सिटी (NCAP) रैंक-1 (कैटेगरी-1, पूरे देश में प्रथम) ₹1.50 करोड़
सर्वश्रेष्ठ वार्ड (30,000+ जनसंख्या) रैंक-1 (वार्ड संख्या 70, जोन-4) ₹50 लाख

किन ठोस कदमों से लखनऊ बना स्वच्छ हवा का राष्ट्रीय मॉडल?

लखनऊ नगर निगम द्वारा वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में निरंतर सुधार लाने के लिए कई तकनीकी व बुनियादी कदम उठाए गए:

  • इलेक्ट्रिक फ्लीट व जीपीएस ट्रैकिंग: डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण हेतु 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-टिपर) का उपयोग। इनकी मॉनिटरिंग कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से होती है।
  • धूल नियंत्रण व मैकेनाइज्ड स्वीपिंग: 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग व पानी का छिड़काव। साथ ही 559.85 किमी सड़कों का एंड-टू-एंड पक्कीकरण।
  • 100% वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण: 2,550 TPD क्षमता के साथ कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और ओपन डंपिंग पर पूरी तरह रोक। कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशनों से कचरा वाहनों के फेरे 240 से घटकर 150 हुए।
  • C&D वेस्ट मैनेजमेंट: निर्माण मलबे के लिए 300 TPD क्षमता का प्रोसेसिंग प्लांट और अवैध डंपिंग पर सख्त निगरानी।
  • ग्रीन बेल्ट एवं मियावाकी वन: वन विभाग और एलडीए के सहयोग से मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण और वर्टिकल गार्डन्स का निर्माण।

शीर्ष मंच पर हुआ सम्मान

यह प्रतिष्ठित सम्मान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा, पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक सुशील कुमार अवस्थी, अपर सचिव आशुतोष अग्निहोत्री और सीपीसीबी (CPCB) के अध्यक्ष डॉ. अमनदीप गर्ग द्वारा प्रदान किया गया।

"सीएम योगी के विजन और जनता की जागरूकता से मिली सफलता": महापौर

"राष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ का प्रथम स्थान प्राप्त करना हर शहरवासी के लिए गौरव का क्षण है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा जी के सहयोग और लखनऊ नगर निगम के स्वच्छता प्रहरियों व जागरूक नागरिकों के संकल्प का परिणाम है। हम लखनऊ को देश का सबसे हरा-भरा और स्वच्छ महानगर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
— सुषमा खर्कवाल (महापौर, लखनऊ)
राष्ट्रीय प्रेरणा: कभी प्रदूषण के उच्च स्तर से जूझने वाले लखनऊ का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में देश का शीर्ष शहर बनना यह सिद्ध करता है कि दीर्घकालिक योजना, इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण संभव है।

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