लाओस में हाथियों के इलाज और संरक्षण के लिए वनतारा का बड़ा कदम: मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू, बनेगा विशेष अस्पताल; 43 वर्षीय हथिनी 'मे खामनॉय' को मिला नया जीवन
लुआंग प्रबांग (लाओस): भारत में वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास की मिसाल बन चुके 'वनतारा' (Vantara) ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लाओस में बीमार, वृद्ध और घायल हाथियों के त्वरित उपचार के लिए वनतारा ने स्थानीय संस्था मांडलाओ एलीफेंट कंजर्वेशन (MandaLao Elephant Conservation) के साथ मिलकर एक व्यापक संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के अंतर्गत आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित मोबाइल वेटरनरी यूनिट और रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई है, साथ ही गंभीर हाथियों के लिए एक विशेष अस्पताल भी स्थापित किया जाएगा।
📌 लाओस में वनतारा मिशन के प्रमुख बिंदु:
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: वनतारा और मांडलाओ एलीफेंट कंजर्वेशन का संयुक्त आपातकालीन स्वास्थ्य कार्यक्रम।
- मोबाइल वेटरनरी यूनिट: दूरदराज के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में ऑन-साइट इलाज के लिए पूरी तरह सुसज्जित चिकित्सा वाहन।
- विशेष हाथी अस्पताल: गंभीर चोटों और दीर्घकालिक देखभाल की आवश्यकता वाले हाथियों के लिए विशेष अस्पताल का निर्माण प्रस्तावित।
- सफल रेस्क्यू: भारी लकड़ी ढुलाई और पर्यटन के शोषण से 43 वर्षीय हथिनी 'मे खामनॉय' को सुरक्षित बचाकर पुनर्वास केंद्र लाया गया।
- घटती आबादी पर फोकस: लाओस में मात्र ~400 जंगली और ~400 पालतू हाथी शेष, दोनों श्रेणियों के हाथियों का होगा संरक्षण।
📊 लाओस में हाथी संरक्षण पहल: एक नजर
| घटक / पहलू | विवरण एवं कार्ययोजना |
|---|---|
| सहयोगी संस्थाएं | वनतारा (Vantara, India) एवं मांडलाओ एलीफेंट कंजर्वेशन (लाओस) |
| आपातकालीन चिकित्सा ढांचा | रैपिड रिस्पॉन्स टीम और अत्याधुनिक मोबाइल वेटरनरी वैन |
| स्थायी स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर | गंभीर व दीर्घकालिक उपचार हेतु विशेष एलीफेंट हॉस्पिटल का निर्माण |
| लाओस में हाथियों की स्थिति | लगभग 400 जंगली और 400 पालतू हाथी (आबादी में लगातार गिरावट) |
| ताजा रेस्क्यू ऑपरेशन | 43 वर्षीय मादा हाथी 'मे खामनॉय' (Mae Khamnoy) |
'दस लाख हाथियों की भूमि' में घटती आबादी बना बड़ा संकट
ऐतिहासिक रूप से लाओस को 'लैन झांग' (Lane Xang) यानी 'दस लाख हाथियों की भूमि' के नाम से जाना जाता रहा है। किंतु आधुनिक काल में वनों की कटाई, अवैध शिकार और अनियंत्रित व्यावसायिक दोहन के कारण यहां हाथियों की संख्या घटकर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। वर्तमान में देश में केवल करीब 400 जंगली हाथी बचे हैं और लगभग इतने ही देखरेख (कैप्टिविटी) में हैं।
दोनों ही श्रेणियों में हाथियों की घटती संख्या जैव विविधता के लिए गंभीर चेतावनी है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वनतारा ने केवल जंगली हाथियों के उपचार तक सीमित न रहकर, निजी स्वामित्व या पर्यटन में प्रयुक्त अस्वस्थ हाथियों की समग्र देखभाल का बीड़ा उठाया है।
दशकों की प्रताड़ना के बाद 'मे खामनॉय' को मिला सुरक्षित आशियाना
"43 वर्षीय हथिनी मे खामनॉय ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा भारी लकड़ी ढुलाई (लॉगिंग इंडस्ट्री) के कठिन परिश्रम में बिताया। इसके बाद उसे पर्यटन उद्योग में भारी वजन ढोने के लिए इस्तेमाल किया गया। वर्षों के शारीरिक और मानसिक तनाव के बाद अब उसे मांडलाओ केंद्र में लाया गया है, जहां वनतारा के पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसे गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन मिलेगा।"
मोबाइल वेटरनरी यूनिट और अस्पताल से बदलेगी जमीनी तस्वीर
लाओस के दुर्गम क्षेत्रों में समय पर प्राथमिक उपचार न मिल पाना हाथियों की अकाल मृत्यु का प्रमुख कारण रहा है। वनतारा द्वारा उपलब्ध कराई गई मोबाइल वेटरनरी यूनिट में पोर्टेबल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड मशीनें, आपातकालीन दवाइयां और वन्यजीव विशेषज्ञ तैनात रहेंगे, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन या दवाएं उपलब्ध कराएंगे।
इसके अलावा, जो हाथी गंभीर बीमारियों या फ्रैक्चर से पीड़ित हैं, उनके लिए बनने वाला विशेष अस्पताल आईसीयू (ICU), हाइड्रोथेरेपी और पुनर्वास की वैश्विक तकनीकों से लैस होगा।


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