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'आरक्षण भीख नहीं अधिकार': संजय निषाद के आवास पर 68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन; राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के अनुपालन की मांग

68,500 सहायक अध्यापक भर्ती: अभ्यर्थियों ने घेरा कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का आवास; मुख्यमंत्री से वार्ता कर संयुक्त बैठक कराने का मिला आश्वासन

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 10 अक्टूबर 2026 | 📚 श्रेणी: बेसिक शिक्षा, 68500 शिक्षक भर्ती, छात्र आंदोलन, राजनीतिक समाचार

लखनऊ: वर्ष 2018 की 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी की आरक्षण विसंगति को दूर करने और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का पालन कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश गहरा गया है। लगातार 40 दिनों से ईको गार्डन धरना स्थल पर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत मत्स्य कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के आवास का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों से मिलकर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आरक्षण किसी की भीख नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है और वे इस गंभीर प्रकरण पर मुख्यमंत्री के साथ वार्ता कर विभागीय मंत्री व अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाएंगे।

📌 प्रदर्शन और प्रमुख मांगों के मुख्य बिंदु:

  • 40 दिनों से ईको गार्डन में धरना: न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थी शनिवार सुबह 11 बजे 'दस्तक दो अभियान' के तहत मंत्री आवास पहुंचे।
  • राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का आदेश: अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग द्वारा विसंगति दूर करने के आदेश के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिणाम संशोधित नहीं किया गया।
  • प्रमुख मांगें: ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का लाभ देकर संशोधित चयन सूची जारी करना, रिक्त पदों पर नियुक्ति देना और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई।
  • मंत्री का आश्वासन: डॉ. संजय निषाद ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अभ्यर्थियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक कराएंगे।

📊 68,500 शिक्षक भर्ती विवाद: एक नजर में

पहलू / बिंदु तथ्य एवं वर्तमान स्थिति
भर्ती का संदर्भ उत्तर प्रदेश 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती (वर्ष 2018)
मुख्य शिकायत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण नियमों का समुचित अनुपालन न होना
संवैधानिक संस्था का आदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा आरक्षण विसंगति सुधारने का निर्देश
वर्तमान आंदोलन स्थल ईको गार्डन धरना स्थल, लखनऊ (विगत 40 दिनों से जारी)
प्रमुख प्रतिनिधि तूफान सिंह, आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी (धरना प्रभारी)

"आरक्षण भीख नहीं, संवैधानिक अधिकार है": डॉ. संजय निषाद

आवास घेराव के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने खुद बाहर आकर अभ्यर्थियों से सीधी बातचीत की और उनकी पीड़ा को सुना। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि एनडीए सरकार सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।

“आरक्षण किसी की कृपा या भीख नहीं है, यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यदि आरक्षण व्यवस्था के क्रियान्वयन में किसी स्तर पर अधिकारियों द्वारा विसंगति पैदा की गई है, तो उसका त्वरित और पारदर्शी समाधान होना चाहिए। मैं इस विषय को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखूंगा और अधिकारियों व विभागीय मंत्री के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कराकर पात्र युवाओं को न्याय दिलाने का प्रयास करूंगा।”
— डॉ. संजय निषाद (कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश)

सकारात्मक माहौल में हुई वार्ता के बाद मंत्री ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को जलपान कराया। इसके पश्चात सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने अभ्यर्थियों को बसों के माध्यम से वापस ईको गार्डन धरना स्थल भेज दिया।

आयोग के आदेश के बावजूद अधिकारी क्यों साध रहे चुप्पी?

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थी तूफान सिंह और उनके सहयोगी आशुतोष वर्मा ने कहा कि माननीय राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस भर्ती में ओबीसी वर्ग के साथ हुई विसंगतियों की पुष्टि करते हुए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए थे। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी फाइल को दबाए बैठे हैं।

  • परिणाम का संशोधन: आयोग के आदेश के तहत ओबीसी श्रेणी के वास्तविक कट-ऑफ और आरक्षण रोस्टर को लागू कर संशोधित मेरिट सूची जारी की जाए।
  • पात्रों को नियुक्ति पत्र: विसंगति के कारण मेरिट से बाहर हुए पात्र अभ्यर्थियों को अविलंब काउंसलिंग कराकर विद्यालयों में पदस्थापित किया जाए।
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: रोस्टर नियमों की अनदेखी करने वाले विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए विभागीय जांच बैठाई जाए।

न्याय मिलने तक जारी रहेगा सत्याग्रह: नवीन चौधरी

धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने दो टूक कहा कि जब तक शासन स्तर से संशोधित आदेश का शासनादेश (GO) जारी नहीं होता, तब तक ईको गार्डन में उनका आंदोलन निरंतर चलता रहेगा। घेराव प्रदर्शन में मुख्य रूप से अखिल कुमार, रंजना जायसवाल, राकेश साहनी, मनीष पटवा, सच्चिदानंद, आरती वर्मा सहित सैकड़ों महिला व पुरुष अभ्यर्थी शामिल रहे।

निष्कर्ष: 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती का विवाद लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक पेच में उलझा हुआ है। कैबिनेट मंत्री द्वारा संयुक्त बैठक कराने के आश्वासन के बाद अब अभ्यर्थियों की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय और बेसिक शिक्षा विभाग की आगामी पहल पर टिकी हैं।

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