30 कार्यदिवस का अल्टीमेटम: यूपी एनएचएम संविदाकर्मियों की वेतन नीति पर आर-पार की तैयारी; सहमति लागू न होने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत हजारों संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की वेतन नीति और मानदेय विसंगतियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने मिशन निदेशक को आधिकारिक पत्र प्रेषित कर वार्ता में बनी सहमति के आधार पर 30 कार्यदिवस के भीतर नई वेतन नीति लागू करने और शासनादेश जारी करने का अल्टीमेटम दिया है। कर्मचारी संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में ठोस परिणाम सामने नहीं आए, तो प्रदेशभर के संविदा कर्मी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत पुनः व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे।
📌 एनएचएम वेतन नीति विवाद के मुख्य बिंदु:
- 30 कार्यदिवस की समय-सीमा: वेतन नीति समिति की रिपोर्ट को सक्षम स्तर से अनुमोदित कराकर तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग।
- सहमति पर अमल का दबाव: 12, 14 और 15 अक्टूबर को शासन एवं मिशन के उच्चाधिकारियों के साथ हुई वार्ताओं में बनी सहमति को धरातल पर उतारने की अपील।
- लिखित समय-सारिणी की मांग: विभाग अब तक की गई कार्रवाई और आगामी प्रक्रिया का आधिकारिक विवरण लिखित रूप में साझा करे।
- दोबारा आंदोलन की चेतावनी: समयबद्ध क्रियान्वयन न होने की दशा में पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित करने वाले धरने का ऐलान।
- नेतृत्व का हस्ताक्षर: संघ के प्रदेश अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह और प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने 16 अक्टूबर 2026 को मिशन निदेशक को सौंपा पत्र।
📊 एनएचएम संविदा कर्मचारी मांग पत्र: प्रमुख बिंदु व समय-सीमा
| पहलू / विषय | संघ की मांग एवं वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| प्रमुख मांग | वेतन विसंगति का निवारण और पारदर्शी वेतन नीति (Salary Policy) का क्रियान्वयन |
| प्रशासनिक अल्टीमेटम | 30 कार्यदिवस (सक्षम स्तर से कैबिनेट/शासकीय अनुमोदन हेतु) |
| पूर्व वार्ता की तिथियां | 12, 14 और 15 अक्टूबर 2026 (शासन व मिशन अधिकारियों के साथ) |
| पत्र प्रेषण दिनांक | 16 अक्टूबर 2026 (मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उप्र) |
| प्रतिनिधित्व | मयंक प्रताप सिंह (प्रदेश अध्यक्ष) एवं योगेश उपाध्याय (प्रदेश महामंत्री) |
धरना-प्रदर्शन के बाद बनी थी सहमति, अब आदेश की प्रतीक्षा
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, लंबित वेतन विसंगतियों को लेकर राजधानी लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया था। आंदोलन के दबाव में शासन और एनएचएम प्रबंधन ने संघ प्रतिनिधियों को वार्ता की मेज पर बुलाया।
12, 14 और 15 अक्टूबर को हुई लगातार मैराथन बैठकों में संविदा कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर बिंदुवार मंथन हुआ। इन बैठकों में वेतन नीति समिति (Salary Policy Committee) की कार्यवाही को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और न्यायसंगत मानदेय संरचना तय करने पर दोनों पक्षों में सहमति बनने का दावा किया गया था।
'सहमति का समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी': कर्मचारी संघ
संघ के प्रदेश अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह एवं प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला चिकित्सालयों में दिन-रात सेवाएं देने वाले संविदा कर्मी वर्षों से अल्प मानदेय और वेतन विसंगतियों का दंश झेल रहे हैं।
“वार्ता के दौरान बनी सहमति को समयबद्ध तरीके से लागू करना शासन और प्रशासन के प्रति संविदा कर्मियों का विश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। यदि 30 कार्यदिवस में समिति की रिपोर्ट पर सक्षम स्तर से औपचारिक मुहर नहीं लगी और शासनादेश निर्गत नहीं हुआ, तो कर्मचारियों के पास आंदोलन के मार्ग पर दोबारा लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
— मयंक प्रताप सिंह व योगेश उपाध्याय (उ.प्र. एनएचएम कर्मचारी संघ)
लिखित समय-सीमा और प्रशासनिक कदम पर टिकी नजरें
कर्मचारी संगठन ने मिशन निदेशक से यह भी अपेक्षा की है कि अब तक हुई प्रशासनिक प्रगति और शेष प्रक्रिया को पूर्ण करने की चरणबद्ध समय-सारिणी लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाए।
राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एएनएम, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक और डेटा ऑपरेटर सहित हजारों कर्मी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में इस अल्टीमेटम के बाद स्वास्थ्य विभाग और मिशन प्रबंधन पर समय रहते शासनादेश जारी कराने का दोहरा दबाव बन गया है।


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