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लखनऊ ईको गार्डन में 59 दिनों से धरना: 68500 शिक्षक भर्ती में OBC आरक्षण विसंगति पर आमरण अनशन तेज; सरकार से त्वरित निर्णय की गुहार

68,500 शिक्षक भर्ती आरक्षण विसंगति: भूख हड़ताल के तीसरे दिन दो अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी, लोकबंधु अस्पताल में भर्ती; ईको गार्डन में 59 दिनों से जारी है आंदोलन

📍 स्थान: ईको गार्डन, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 29 अक्टूबर 2026 | 🎓 श्रेणी: बेसिक शिक्षा, शिक्षक भर्ती आंदोलन, आरक्षण विसंगति, लखनऊ समाचार

लखनऊ: 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 में आरक्षण विसंगति को दूर कर न्यायसंगत नियुक्ति की मांग को लेकर राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में धरना दे रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 59 दिनों से चल रहे अनवरत धरने के बीच शुरू हुई भूख हड़ताल के तीसरे दिन दो अभ्यर्थियों—दीपक पटेल (चित्रकूट) और नसीम फरीदी (बरेली)—की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पुलिस-प्रशासन ने मौके पर एंबुलेंस बुलाकर दोनों को तुरंत लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की गहन निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।

📌 68,500 शिक्षक भर्ती आंदोलन: मुख्य बिंदु

  • अनशनकारियों की हालत बिगड़ी: 26 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे चित्रकूट के दीपक पटेल और बरेली के नसीम फरीदी लोकबंधु अस्पताल में भर्ती।
  • 59 दिनों से अनवरत धरना: अभ्यर्थी करीब दो महीने से लगातार ईको गार्डन में धरनारत हैं।
  • मुख्य मांग: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण नियमों के तहत संशोधित परिणाम जारी कर तत्काल नियुक्ति दी जाए।
  • आयोगों की संस्तुतियां लागू करने की अपील: राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों के अनुपालन की मांग।
  • त्योहारों पर भी धरना: नवरात्रि और दशहरा आंदोलन स्थल पर मनाने के बाद करवा चौथ और दीपावली भी धरने पर ही बिताने को विवश हैं अभ्यर्थी।

📊 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 विवाद: एक नजर में

विवरण / मानक आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का पक्ष व स्थिति
भर्ती का संदर्भ 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (2018)
धरना स्थल व अवधि ईको गार्डन, लखनऊ | लगातार 59 दिनों से जारी
भूख हड़ताल प्रारंभ 26 अक्टूबर 2026 से क्रमिक अनशन शुरू
अस्पताल में भर्ती अभ्यर्थी दीपक पटेल (चित्रकूट) एवं नसीम फरीदी (बरेली)
प्रमुख मांगें आरक्षण विसंगति दूर कर परिणाम संशोधन, पात्रों को नियुक्ति और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई

बेसिक शिक्षा मंत्री स्तर पर वार्ता के बाद भी निर्णय लंबित

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि अभ्यर्थी पिछले 59 दिनों से शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर डटे हुए हैं। जब शासन स्तर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो विवश होकर 26 अक्टूबर से भूख हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।

“विगत दिनों बेसिक शिक्षा मंत्री जी के साथ उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रकरण पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उस दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि प्रकरण के अंतिम समाधान के लिए कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव ले जाने और मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन की आवश्यकता है। इसके बावजूद अब तक कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ, जिससे अभ्यर्थियों में भारी हताशा है।”
— तूफान सिंह (आंदोलन नेतृत्वकर्ता)

राष्ट्रीय एवं राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों का अनुपालन जरूरी

अभ्यर्थियों का कहना है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षित पदों के आवंटन में गंभीर नियमों की अनदेखी हुई है।

  • संवैधानिक आयोगों के आदेश: राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) दोनों ने अभ्यर्थियों के पक्ष में अंतरिम व स्पष्ट संस्तुतियां दी हैं, जिनका क्रियान्वयन अब तक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा नहीं किया गया।
  • परिणाम संशोधन की मांग: भर्ती में आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस छात्रों को उनके वैध अधिकार के अनुरूप समायोजित कर संशोधित कटऑफ व परिणाम जारी किए जाएं।
  • जवाबदेही तय हो: वर्ष 2018 में परिणाम तैयार करने के दौरान आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्कालीन विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

त्योहारों में भी धरने पर बैठने को मजबूर; परिवारों से दूर अभ्यर्थी

महिला मोर्चा प्रमुख रंजना जायसवाल और धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने व्यथा साझा करते हुए कहा कि अभ्यर्थी वर्षों से सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी का पावन पर्व अभ्यर्थियों ने ईको गार्डन की धूल भरी जमीन पर ही बिताया।

वर्तमान में करवा चौथ और आगामी दीपावली का महापर्व सामने है। शादीशुदा महिला और पुरुष अभ्यर्थी धरना स्थल से ही वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवारों से जुड़ने को मजबूर हैं। अभ्यर्थियों की एक स्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भावुक अपील है कि इस मानवीय मुद्दे पर कैबिनेट की मुहर लगाकर अभ्यर्थियों को दीपावली अपने घरों में खुशी-खुशी मनाने का अवसर दिया जाए।

निष्कर्ष: अनशनरत अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य में गिरावट के बाद प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग पर समाधान तलाशने का दबाव बढ़ गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शासन को शीघ्र निर्णायक पहल करनी होगी।

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