ग्राम रोजगार सेवकों का धैर्य टूटा, ईको गार्डन में गूंजी अधिकारों की आवाज: नियमितीकरण और ₹44,000 मानदेय समेत 7 सूत्रीय मांगों पर अड़े; कार्य बहिष्कार की चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में मनरेगा, आवास योजना और डिजिटल सर्वेक्षणों को जमीन पर उतारने वाले संविदा ग्राम रोजगार सेवकों का सब्र आखिरकार टूट गया। उत्तर प्रदेश संविदा ग्राम रोजगार सेवक संघ (पंजीकृत) के आह्वान पर सोमवार को राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन धरना स्थल पर प्रदेशभर से आए हजारों महिला एवं पुरुष रोजगार सेवकों ने विशाल प्रदर्शन किया। 20 वर्षों की अनवरत सेवा के बाद भी स्थायीकरण, सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा न मिलने से आक्रोशित कर्मचारियों ने शासन को दो टूक चेतावनी दी कि ठोस निर्णय न होने पर वे पूरे प्रदेश में कार्य बहिष्कार और आमरण अनशन शुरू करेंगे।
📌 ग्राम रोजगार सेवक आंदोलन के मुख्य बिंदु:
- 20 साल की सेवा के बाद असुरक्षा: वर्ष 2006 से मनरेगा, मस्टररोल फीडिंग और आवास सर्वे में अहम योगदान के बाद भी अल्प संविदा मानदेय।
- नियमितीकरण व मानदेय मांग: राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए; नियमित होने तक न्यूनतम ₹44,000 प्रतिमाह मानदेय निर्धारित हो।
- VDO भर्ती में 50% कोटा: ग्राम विकास अधिकारी की सीधी भर्ती में रोजगार सेवकों को 50% आरक्षण अथवा आयु में छूट व विशेष भारांक मिले।
- पदनाम परिवर्तन: संविदा ग्राम रोजगार सेवक के पद का नाम बदलकर स्थायी संवर्ग में 'ग्राम विकास सहायक' किया जाए।
- ईपीएफ और बकाया भुगतान: ईपीएफ कटौती में अनियमितता की उच्चस्तरीय जांच हो तथा महीनों से लंबित मानदेय का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
📊 ग्राम रोजगार सेवक संघ का 7-सूत्रीय मांग पत्र
| क्र. | प्रमुख मांग | मांग का स्वरूप एवं विस्तृत तर्क |
|---|---|---|
| 1 | नियमितीकरण व राज्य कर्मचारी दर्जा | अन्य राज्यों की भांति सभी संविदा रोजगार सेवकों को नियमित कर स्थायी कर्मचारी घोषित किया जाए। |
| 2 | ₹44,000 न्यूनतम मानदेय | नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी होने तक महंगाई के दृष्टिगत मानदेय ₹44,000 प्रतिमाह किया जाए। |
| 3 | लंबित मानदेय का भुगतान | विभिन्न जनपदों एवं ब्लॉकों में महीनों से रुके हुए मानदेय का तुरंत एकमुश्त भुगतान हो। |
| 4 | संविदा श्रम उन्मूलन अधिनियम | शोषणकारी ठेका व संविदा व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानून बने। |
| 5 | VDO भर्ती में 50% कोटा / वरीयता | ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती में 50% आरक्षण या अनुभव भारांक और आयु सीमा में छूट। |
| 6 | EPF विसंगतियों की जांच | कर्मचारी भविष्य निधि में अनियमितताओं की जांच कराकर अंशदान खातों में सही प्रविष्टि सुनिश्चित हो। |
| 7 | पदनाम 'ग्राम विकास सहायक' | पद का नाम बदलकर स्थायी पद 'ग्राम विकास सहायक' के रूप में सृजित किया जाए। |
20 वर्षों से रीढ़ हैं रोजगार सेवक, फिर भी भविष्य अंधकार में: संघ
ईको गार्डन में एकत्र विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्राम रोजगार सेवक वर्ष 2006 से लगातार सेवा दे रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGS) का संचालन हो, प्रत्येक कार्य की जियो-टैगिंग करनी हो, दैनिक मस्टररोल ऑनलाइन भरना हो या प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का सत्यापन—रोजगार सेवक हर सरकारी योजना को रात-दिन एक कर सफल बनाते हैं।
"ग्रामीण विकास के पहिए को अपनी मेहनत से खींचने वाले रोजगार सेवक आज स्वयं बदहाली के शिकार हैं। 20 वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद भी हमारा भविष्य अंधकारमय है। अल्प मानदेय और संविदा का ठप्पा हमारे आत्मसम्मान पर चोट पहुंचाता है। अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका है।"
— शिव शंकर सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, उप्र संविदा ग्राम रोजगार सेवक संघ)
सुल्तानपुर के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार ने संवेदनशील पहलू उठाते हुए कहा कि सेवाकाल के दौरान बीमारी, दुर्घटना या कार्य के दबाव में कई रोजगार सेवकों की असमय मृत्यु हो गई, लेकिन शासन स्तर से उनके आश्रित परिवारों को कोई पेंशन या अनुकंपा नियुक्ति की सुरक्षा नहीं दी गई।
महीनों से मानदेय ठप, परिवार के भरण-पोषण का संकट
संघ के प्रदेश संगठन मंत्री विजय सिंह ने जमीनी समस्याओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कमरतोड़ महंगाई के इस युग में वर्तमान मानदेय पहले ही अत्यधिक कम है। उस पर भी कई जनपदों और विकासखंडों में पिछले 4 से 6 महीनों से मानदेय का भुगतान ही नहीं हुआ है।
रोजगार सेवकों के सामने बच्चों के स्कूल की फीस, बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों और राशन का प्रबंध करना तक असंभव हो गया है। उन्होंने मांग की कि सभी लंबित देयकों का तत्काल एकमुश्त भुगतान कराया जाए और संविदा प्रथा के नाम पर हो रहे दोहन को समाप्त करने के लिए राज्य में संविदा श्रम उन्मूलन कानून लाया जाए।
"आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए": आमरण अनशन की दी चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रमुख सचिव (ग्राम्य विकास) को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। पदाधिकारियों ने साफ किया कि इस बार आंदोलन केवल मौखिक आश्वासनों के भरोसे समाप्त नहीं होगा।
"यदि शासन ने हमारी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक और ठोस शासनादेश जारी नहीं किया, तो प्रदेश की सभी 58,000 ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवक पूर्ण कार्य बहिष्कार कर देंगे। इसके बाद ईको गार्डन में क्रमिक भूख हड़ताल और आमरण अनशन प्रारंभ होगा, जिसकी संपूर्ण प्रशासनिक और नैतिक जिम्मेदारी शासन की होगी।"
— विजय सिंह (प्रदेश संगठन मंत्री)


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