‘क्षितिजा’ युवती सम्मेलन में गूंजा नारी सशक्तिकरण और साइबर सजगता का संदेश: BNS की कानूनी धाराओं से लेकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचाव तक, छात्राओं को मिले सुरक्षा सूत्र
लखनऊ: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (लखनऊ पश्चिम, अवध प्रांत) के तत्वावधान में राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में ‘क्षितिजा: आँगन से अंतरिक्ष तक’ भव्य युवती सम्मेलन का आयोजन किया गया। मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुए इस गरिमामयी सत्र में छात्राओं को आधुनिक साइबर अपराधों से बचाव, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत प्रदत्त सुरक्षा अधिकारों, 'पंच परिवर्तन' और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया गया।
📌 ‘क्षितिजा’ युवती सम्मेलन के मुख्य बिंदु:
- नारी अस्मिता और संघर्ष: राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि आज समाज में महिलाओं की प्रतिष्ठा उनके निरंतर संघर्ष और योग्यता की देन है।
- BNS के कानूनी अधिकार: छात्राओं को भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), धारा 77 (निजता हनन/तस्वीर-वीडियो) और धारा 78 (स्टॉकिंग) की जानकारी दी गई।
- साइबर सुरक्षा के आधुनिक सूत्र: प्रो. सीमा पांडेय ने डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग, जूस जैकिंग और डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए '5 सेकंड टेस्ट' व 'सीक्रेट फैमिली पासवर्ड' अपनाने पर बल दिया।
- डिजिटल उपवास का संकल्प: स्मार्टफोन से गर्दन पर पड़ने वाले 27 किलो वजन (Tech-Neck) से बचाव हेतु दैनिक 1 घंटे 'डिजिटल उपवास' और खेल से जुड़ने की सीख।
- पंच परिवर्तन का आह्वान: स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा।
📊 युवती सम्मेलन: प्रमुख विषय एवं वक्ता मैट्रिक्स
| वक्ता / दायित्व | प्रमुख विषय | मुख्य संदेश / सूत्र |
|---|---|---|
| डॉ. प्रियंका मौर्या (सदस्य, उ.प्र. राज्य महिला आयोग) |
महिला अधिकार एवं कानूनी सजगता | भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 77 व 78 के तहत अन्याय का डटकर मुकाबला करना। |
| प्रो. सीमा पांडेय (प्रांत प्रमुख, खेलो भारत) |
परंपरा, आधुनिकता व साइबर सजगता | '5 सेकंड साइबर टेस्ट', सीक्रेट फैमिली पासवर्ड, टेक-नेक से बचाव व 'डिजिटल उपवास'। |
| प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या एवं प्रांत उपाध्यक्ष, अभाविप) |
सम्मेलन प्रस्तावना व युवा दिशा | युवाओं को वैचारिक भटकाव से बचाकर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना। |
| डॉ. प्रतिमा घोष (महानगर छात्रा प्रमुख) |
पंच परिवर्तन संकल्प | स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता एवं नागरिक कर्तव्य का पालन। |
"अन्याय के विरुद्ध निडर होकर आवाज उठाएं": डॉ. प्रियंका मौर्या
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का परचम लहरा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में महिलाओं को मिला सम्मानजनक स्थान किसी की कृपा का परिणाम नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस और योग्यता से अर्जित किया गया है।
"कानून की जानकारी ही महिला सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है। नए आपराधिक कानूनों यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) में महिलाओं की सुरक्षा हेतु अत्यंत सख्त प्रावधान किए गए हैं। छेड़छाड़ या शोषण सहने की बजाय कानून का सहारा लें।"
— डॉ. प्रियंका मौर्या (सदस्य, उ.प्र. राज्य महिला आयोग)
उन्होंने छात्राओं को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की महत्वपूर्ण धाराओं के प्रति जागरूक किया:
- धारा 75: यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान।
- धारा 77: किसी महिला की सहमति के बिना तस्वीर खींचने, वीडियो बनाने या उसकी निजता (Voyeurism) का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई।
- धारा 78: भौतिक रूप से या इंटरनेट/सोशल मीडिया पर पीछा करने (Stalking) के विरुद्ध सख्त कानूनी प्रावधान।
स्क्रीन के उस पार: साइबर खतरे, डिजिटल अरेस्ट और बचाव के मंत्र
मुख्य वक्ता एवं खेलो भारत (अवध प्रांत) की प्रमुख प्रो. सीमा पांडेय ने ‘परंपरा व आधुनिकता, साइबर सजग: स्क्रीन के उस पार’ विषय पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने इसरो की महिला वैज्ञानिकों, पैरा-तीरंदाज शीतल देवी और निशानेबाज मनु भाकर का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्कारों की जड़ें जितनी गहरी होंगी, सफलता का क्षितिज उतना ही विशाल होगा।
उन्होंने आधुनिक साइबर अपराधों से सावधान करते हुए छात्राओं को व्यावहारिक सुरक्षा उपाय समझाए:
- डीपफेक व वॉयस क्लोनिंग से बचाव: किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल या रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने वाले फोन पर तुरंत विश्वास न करें। इसके लिए घर के सदस्यों के साथ एक 'सीक्रेट फैमिली पासवर्ड' तय रखें।
- डिजिटल अरेस्ट और फेक जॉब्स: पुलिस, कस्टम या सीबीआई के नाम पर धमकाने वाले कॉल्स से न डरें; कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
- जूस जैकिंग (Juice Jacking): रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डों पर लगे अनधिकृत पब्लिक चार्जिंग पोर्ट्स से मोबाइल चार्ज करने से बचें, इससे डेटा चोरी हो सकता है।
- टेक-नेक (Tech-Neck) और डिजिटल उपवास: लगातार झुककर मोबाइल चलाने से गर्दन पर लगभग 27 किलोग्राम का अवांछित दबाव पड़ता है। इससे बचने के लिए प्रतिदिन कम से कम 1 घंटे का 'डिजिटल उपवास' रखें और मैदानी खेलों से जुड़ें।
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर: हर छात्रा के फोन में होने जरूरी
- 1930: राष्ट्रीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन नंबर।
- cybercrime.gov.in: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल।
- 1090: वूमेन पावर लाइन (पहचान पूरी तरह गोपनीय रखकर सहायता)।
- 181: महिला हेल्पलाइन (घरेलू व सामाजिक संकट के समय सहायता)।
वंदे मातरम् गान के साथ संपन्न हुआ सम्मेलन
कार्यक्रम में जिला प्रमुख डॉ. शालिनी साहनी ने छात्राओं को हर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया। अंत में महानगर मंत्री सुश्री सरिता पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन को सफल बनाने में जिला छात्रा प्रमुख सुश्री काजल अवस्थी, अभाविप के नवीन आज़ाद दुबे सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्मेलन का समापन उपस्थित शिक्षिकाओं व छात्राओं के सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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