NHM कर्मचारियों का लखनऊ में महाप्रदर्शन: नियमितीकरण और समान वेतन पर अड़े संविदा कर्मी; वार्ता विफल होने के बाद 12 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत लाखों संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का असंतोष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर शुक्रवार को राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में कर्मचारियों का विशाल महाजमावड़ा हुआ। स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक के साथ विभागीय स्तर पर हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद संयुक्त एनएचएम कर्मचारी संघ ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा कर दी है। संगठन ने 12 अक्टूबर 2026 को पूरे प्रदेश में कार्य बहिष्कार के साथ प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
📌 आंदोलन और मांगों के प्रमुख बिंदु:
- विभागीय वार्ता विफल: स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक स्तर की बातचीत में कोई ठोस सहमति न बनने से गतिरोध बढ़ा।
- 12 अक्टूबर को संपूर्ण हड़ताल: सभी 75 जिलों में 12 अक्टूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार और प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान।
- स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित: ओपीडी (OPD), नियमित टीकाकरण और राष्ट्रीय पोर्टल्स पर दैनिक रिपोर्टिंग का कार्य बाधित होने का दावा; आपातकालीन सेवाएं जारी।
- उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग: कर्मचारी संगठनों ने अब मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) या मुख्यमंत्री स्तर पर सीधी वार्ता की मांग रखी।
- सभी संवर्गों की एकजुटता: सीएचओ, एएनएम, स्टाफ नर्स, आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट और प्रबंधन संवर्ग के कार्मिक एक मंच पर।
📊 NHM कर्मचारी आंदोलन: एक नजर में
| पहलू / घटक | वर्तमान स्थिति व विवरण |
|---|---|
| प्रदर्शन स्थल | इको गार्डन, लखनऊ एवं सभी जिला मुख्यालय |
| केंद्रीय नेतृत्व | संयुक्त एनएचएम कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश |
| प्रमुख मांगें | संवर्गवार नियमितीकरण एवं समान कार्य के लिए समान वेतन |
| वार्ता की वर्तमान स्थिति | मिशन निदेशक व स्वास्थ्य मंत्री स्तर पर विफल |
| आगामी बड़ी तारीख | 12 अक्टूबर 2026 (प्रदेशव्यापी पूर्ण आंदोलन) |
वार्ता विफल: अब शासन स्तर पर सीधी बातचीत की मांग
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि शुक्रवार को आंदोलन के बीच शासन के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य मंत्री और एनएचएम के मिशन निदेशक के साथ चली लंबी वार्ता में उनकी मूलभूत मांगों पर कोई लिखित या ठोस सहमति नहीं बन सकी।
“हम दशकों से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं। महामारी से लेकर नियमित टीकाकरण तक हमने अपनी जान जोखिम में डाली, लेकिन जब हमारे भविष्य और सेवा सुरक्षा की बात आती है तो केवल आश्वासन मिलते हैं। विभागीय वार्ताएं विफल हो चुकी हैं, अब हम केवल मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) या सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर ही वार्ता करेंगे।”
— संयुक्त एनएचएम कर्मचारी संघ
ओपीडी और टीकाकरण प्रभावित, इमरजेंसी सेवाएं जारी
इको गार्डन में जुटे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), एएनएम, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों और ब्लॉक प्रोग्राम प्रबंधकों के सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं आंशिक रूप से लड़खड़ा गईं:
- ओपीडी सेवाएं: पर्चा काउंटर, दवा वितरण और डॉक्टरों के सहयोग में लगे संविदा कर्मियों के अनुपस्थित रहने से कतारें लंबी हो गईं।
- टीकाकरण अभियान: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण सत्र प्रभावित हुए।
- डिजिटल पोर्टल ठप: मातृत्व स्वास्थ्य, यू-विन और आईडीएसपी जैसे केंद्रीय स्वास्थ्य पोर्टल्स पर डेटा फीडिंग का काम बंद रहा।
- आपातकालीन सेवाएं: मरीजों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए ट्रॉमा और आपातकालीन सेवाओं को कार्य बहिष्कार से अलग रखा गया है।
संयुक्त एनएचएम कर्मचारी संघ के महामंत्री योगेश उपाध्याय ने आम जनता और मरीजों को होने वाली असुविधा पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
12 अक्टूबर: प्रदेश भर में महाहड़ताल की तैयारी
इको गार्डन में प्रदर्शन के साथ ही रायबरेली, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ सहित कई जिलों में कर्मचारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयों और जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारी संघ ने सभी जनपदों की इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि 12 अक्टूबर को शत-प्रतिशत संविदा कर्मचारी अपने कार्यस्थलों को बंद रखकर सड़क पर उतरें, ताकि सरकार तक अपनी बात पुरजोर तरीके से पहुंचाई जा सके।


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