आईआईएम रोड से किसान पथ के बीच बनेंगे 12 फ्लड पम्पिंग स्टेशन: ग्रीन कॉरिडोर किनारे ₹148.87 करोड़ से होगा निर्माण; गोमती तटीय इलाकों को मिलेगी जलभराव से मुक्ति
लखनऊ: गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने और मानसून की भारी बारिश के दौरान तटीय रिहायशी बस्तियों में उत्पन्न होने वाली भीषण जलभराव की समस्या से शहरवासियों को स्थायी निजात मिलने जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने आई.आई.एम. रोड से किसान पथ तक ग्रीन कॉरिडोर के किनारे कुल 12 अत्याधुनिक फ्लड पम्पिंग स्टेशन स्थापित करने का व्यापक मास्टरप्लान तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजा है। लगभग ₹148.87 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाले इन स्टेशनों से वर्षा जल और बैकवाटर की त्वरित निकासी सुनिश्चित की जा सकेगी।
📌 परियोजना के मुख्य बिंदु:
- 12 रणनीतिक लोकेशन: आईआईएम तिराहे से लेकर सुल्तानपुर रोड, सीजी सिटी और किसान पथ तक फैले संवेदनशील जलभराव वाले पॉइंट चिन्हित।
- उच्च क्षमता के पम्प: 400 किलोलीटर (KL) क्षमता के 08 स्टेशन तथा 600 किलोलीटर (KL) क्षमता के 04 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- कुल लागत: परियोजना पर लगभग ₹148.87 करोड़ का व्यय अनुमानित है; शासन से वित्तीय मंजूरी मिलते ही निर्माण शुरू होगा।
- संयुक्त क्रियान्वयन: शासन की संस्तुति के बाद एलडीए और लखनऊ नगर निगम मिलकर इस परियोजना को धरातल पर उतारेंगे।
- स्थायी समाधान: भारी बारिश में गोमती के बैकवाटर और ड्रेनेज ओवरफ्लो से रिहायशी सोसायटियों में पानी घुसने की समस्या समाप्त होगी।
📊 फ्लड पम्पिंग स्टेशन परियोजना: एक नजर में
| परियोजना घटक | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| नोडल संस्था | लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) एवं लखनऊ नगर निगम |
| कॉरिडोर दायरा | आई.आई.एम. रोड से किसान पथ तक (ग्रीन कॉरिडोर के किनारे) |
| पम्पिंग स्टेशनों की कुल संख्या | 12 फ्लड पम्पिंग स्टेशन |
| क्षमता वर्गीकरण | 08 स्टेशन: 400 किलोलीटर (KL) | 04 स्टेशन: 600 किलोलीटर (KL) |
| अनुमानित बजट | ₹148.87 करोड़ |
सर्वे के आधार पर तैयार हुआ ब्लूप्रिंट: उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और गोमती नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण सीमावर्ती इलाकों में पैदा हुए हालात का तकनीकी सर्वे कराया गया था।
"नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारों पर स्थित कालोनियों और विस्तार क्षेत्रों में पानी का निकास अवरुद्ध हो गया था। भविष्य में नागरिकों को ऐसे जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से सुरक्षित रखने के लिए ग्रीन कॉरिडोर के किनारे अलग-अलग चैनेज पर 12 फ्लड पम्पिंग स्टेशन स्थापित करने की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। हरी झंडी मिलते ही इसका निर्माण युद्धस्तर पर शुरू कराया जाएगा।"
— प्रथमेश कुमार (उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
📍 किन 12 स्थानों पर बनेंगे नए फ्लड पम्पिंग स्टेशन?
प्राधिकरण द्वारा किए गए विस्तृत स्थलीय निरीक्षण के बाद शहर के इन 12 अत्यंत संवेदनशील और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का चयन किया गया है:
- आई.आई.एम. इंटरसेक्शन: रिंग रोड व सीतापुर रोड कनेक्टिविटी क्षेत्र।
- कैटिल कालोनी (बसंतकुंज योजना): हरदोई रोड व दुबग्गा से सटी बसावट।
- गऊ घाट ब्रिज के निकट: पुराने लखनऊ का डाउनस्ट्रीम जल निकासी क्षेत्र।
- सेक्टर-7, गोमती नगर विस्तार: पॉश रिहायशी सोसायटियों से सटा ड्रेनेज पॉइंट।
- ग्राम-घैला (प्रबंध नगर योजना): आईआईएम रोड से लगा ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्र।
- सीतापुर बंधा रोड: नदी के दबाव वाले किनारे का क्षेत्र।
- इकाना अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निकट: अमर शहीद पथ व सुल्तानपुर रोड जंक्शन।
- सी.जी. सिटी ड्रेन के निकट: मेदांता, कैंसर अस्पताल व चक गंजरिया क्षेत्र।
- ग्राम-बक्कास (आई.टी. सिटी): सुल्तानपुर रोड के पास विकसित हो रहा आधुनिक हब।
- ग्राम-चौरासी (वेलनेस सिटी परियोजना): प्रस्तावित नई टाउनशिप का दायरा।
- ग्राम-नूरपुर बेहटा (वेलनेस सिटी): मोहनलालगंज व किसान पथ से जुड़ता इलाका।
- किसान पथ के निकट: आउटर रिंग रोड का अंतिम जल निकासी चैनल।
हाई-कैपेसिटी ऑटोमैटिक पम्पिंग से कैसे होगा बचाव?
सामान्य परिस्थितियों में नालों का पानी गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) के जरिए स्वतः गोमती में समाहित होता है। परंतु जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच जाता है, तो नदी का पानी उल्टी दिशा में नालों के जरिए शहर की बस्तियों में भरने लगता है (Backflow)।
इन 12 फ्लड पम्पिंग स्टेशनों पर स्लूस गेट और 400 से 600 किलोलीटर क्षमता के हैवी-ड्यूटी पम्प लगाए जाएंगे। बैकफ्लो की स्थिति में गेट बंद कर दिए जाएंगे और शहर से आने वाले पानी को सीधे लिफ्ट करके बिना रुकावट नदी के मुख्य बहाव में फेंक दिया जाएगा, जिससे रिहायशी इलाकों में पानी जमा नहीं हो सकेगा।


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