CMS रोड पर 5 महीने से अधूरा पड़ा नाला निर्माण: सड़क पर मलबा और संकरा रास्ता बना आफत; स्कूल समय में घंटों जाम, हादसों का खतरा
लखनऊ: राजधानी के लाला लाजपत राय वार्ड अंतर्गत व्यस्त CMS रोड पर कार्यदायी संस्था की सुस्ती और विभागीय लापरवाही स्थानीय नागरिकों पर भारी पड़ रही है। करीब पांच से छह महीने बीत जाने के बाद भी यहां नाला निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका है। सड़क पर चारों तरफ फैले मलबे, गिट्टी और संकरे रास्ते के कारण रोजाना भीषण जाम लग रहा है। विशेष रूप से सुबह स्कूल खुलने और दोपहर में छुट्टी के समय स्कूली बच्चों, अभिभावकों और एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को भी इस जाम में जूझना पड़ रहा है।
📌 CMS रोड पर व्याप्त मुख्य समस्याएं:
- 5 से 6 महीने की लेटलतीफी: तय समयसीमा से कहीं अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण अधूरा।
- सड़क पर फैला मलबा: खुदाई से निकली मिट्टी और मलबे के कारण मुख्य मार्ग का बड़ा हिस्सा पूरी तरह अवरुद्ध।
- स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर संकट: स्कूल टाइम पर वाहनों की लंबी कतारें, बच्चों को पैदल निकलने में भी भारी जोखिम।
- रात में सड़क हादसों की आशंका: स्ट्रीट लाइट की कमी और सुरक्षा बैरिकेडिंग न होने से रात के समय वाहनों के गड्ढे में गिरने का डर।
- जनता की मांग: समयसीमा तय कर तुरंत नाले को ढका जाए और मलबा हटाकर मार्ग सुचारु किया जाए।
📊 CMS रोड निर्माण संकट: स्थिति का विवरण
| बिंदु / पहलू | जमीनी हकीकत |
|---|---|
| प्रभावित क्षेत्र | लाला लाजपत राय वार्ड, CMS रोड, लखनऊ |
| कार्य की प्रकृति व अवधि | नाला निर्माण एवं मरम्मत (विगत 5-6 माह से अधूरा) |
| प्रमुख प्रभावित वर्ग | स्कूली छात्र, अभिभावक, दोपहिया चालक व स्थानीय व्यापारी |
| मुख्य शिकायत | सड़क पर बिखरा मलबा, सुरक्षा संकेतक नदारद, अत्यधिक धीमी गति |
| नागरिकों की मांग | तुरंत कार्य पूर्ण कर सड़क को साफ व सुचारु बनाया जाए |
पीक आवर्स में हालात बेकाबू, रेंगते रहते हैं वाहन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीएमएस रोड एक प्रमुख लिंक मार्ग है, जहां से हजारों वाहन और स्कूली बच्चे रोजाना गुजरते हैं। सड़क का आधा से ज्यादा हिस्सा नाला खुदाई और मलबे से घिरा होने के कारण वाहनों की आवाजाही केवल एक संकरी पट्टी पर सिमट गई है। सुबह जब स्कूल वाहन निकलते हैं और दोपहर को जब छुट्टी होती है, तो दोनों ओर से आने वाले वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं। देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है, जिसमें स्कूली वैन, ऑटो, कार और बाइक सवार घंटों फंसे रहते हैं।
"छह महीने से यह काम कछुआ गति से चल रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो ठेकेदार तेजी दिखा रहा है और न ही जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मुआयना करते हैं। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हो जाती, क्या तब तक प्रशासन जागेगा नहीं?"
— स्थानीय निवासी व अभिभावक
सड़क पर पसरा अंधेरा और खुला नाला: कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
दिन के समय धूल और जाम से जूझने वाले राहगीरों के लिए रात का सफर और भी जानलेवा साबित हो रहा है। निर्माण स्थल के आसपास कोई चेतावनी बोर्ड (Caution Board) या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए हैं। सड़क पर बिखरी गिट्टी के कारण दोपहिया वाहन अक्सर फिसल रहे हैं। इसके अलावा खुले नाले में किसी के गिरने का खतरा लगातार बना रहता है।
जिम्मेदार कौन? समयसीमा तय करने की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों और व्यापारियों ने नगर निगम व संबंधित कार्यदायी विभाग से सीधे सवाल किए हैं:
- जब कार्य स्वीकृत हुआ था, तो उसकी डेडलाइन (समाप्ति तिथि) क्या थी और अब तक ठेकेदार पर पेनाल्टी क्यों नहीं लगाई गई?
- सड़क पर पड़े मलबे को तत्काल हटाकर वाहनों के आवागमन योग्य चौड़ाई क्यों नहीं बनाई जा रही?
- स्कूल के निकटतम व्यस्त मार्ग पर सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण के इंतजाम क्यों नहीं हैं?


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