युवा संसद में जनसंचार की छात्रा शिया ने निभाई प्रधानमंत्री की भूमिका: तार्किक अभिव्यक्ति और कुशल वाक्पटुता से हासिल किया तृतीय स्थान
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा में आयोजित 18वीं समूह स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता-2026 में जनसंचार विभाग की मेधावी छात्रा शिया ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तृतीय स्थान प्राप्त किया है। प्रतियोगिता के दौरान सदन में प्रधानमंत्री की अहम व चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाते हुए शिया ने अपने ओजस्वी वक्तृत्व कौशल, सटीक तार्किक क्षमता और संसदीय प्रक्रियाओं की गहन समझ से निर्णायकों व उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग सहित संपूर्ण संस्थान में हर्ष का वातावरण है।
📌 युवा संसद में शिया का उत्कृष्ट प्रदर्शन: मुख्य बिंदु
- सदन में शीर्ष भूमिका: शिया ने काल्पनिक संसद सत्र में 'प्रधानमंत्री' के रूप में सरकारी नीतियों का प्रभावी बचाव किया।
- प्रतियोगिता परिणाम: विश्वविद्यालय के 55 उत्कृष्ट प्रतिभागियों के बीच कड़े मुकाबले में हासिल किया तृतीय स्थान (Third Rank)।
- आयोजन संदर्भ: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ सत्र।
- जनसंचार विभाग का मान: प्रभावी जनसंवाद, निष्पक्ष विश्लेषण और मंच संचालन की दक्षताओं को व्यावहारिक धरातल पर किया सिद्ध।
- निर्णायकों की प्रशंसा: जटिल विधायी प्रश्नों के प्रत्युत्तर, समय प्रबंधन और संसदीय मर्यादा के पालन की हुई विशेष सराहना।
📊 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद: शिया की भागीदारी का विवरण
| विवरण / मानक | तथ्य एवं उपलब्धि |
|---|---|
| प्रतिभागी छात्रा का नाम | शिया |
| अध्ययनरत विभाग | जनसंचार विभाग (Department of Mass Communication, MGAHV) |
| सदन में निर्वहन की गई भूमिका | प्रधानमंत्री (Prime Minister) |
| प्राप्त स्थान / रैंक | तृतीय स्थान (Third Rank) |
| आयोजन संस्था व मंत्रालय | केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार एवं MGAHV वर्धा |
प्रधानमंत्री की भूमिका में दिखा नेतृत्व और वाक्-चातुर्य
संसदीय कार्यप्रणाली में प्रधानमंत्री का पद सदन का नेता होने के कारण सबसे अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण होता है। शून्यकाल में विपक्ष द्वारा उठाए गए तीखे प्रश्नों, जनहितैषी नीतियों पर तार्किक बहस और राष्ट्रीय सुरक्षा व विकास से जुड़े मामलों पर सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की चुनौती शिया के कंधों पर थी।
“संसदीय कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री की भूमिका केवल भाषण देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि पूरे सदन को संतुलित करना, विपक्ष के तर्कों का शालीनता व तथ्यों के साथ प्रत्युत्तर देना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को रेखांकित करना होता है। शिया ने इस दायित्व को अत्यंत परिपक्वता के साथ निभाया।”
सदन के पटल पर रखे गए अनिवार्य मतदान विधेयक तथा अन्य विकासात्मक एजेंडों पर उनकी संतुलित प्रतिक्रिया को निर्णायक मंडल में शामिल वरिष्ठ प्राध्यापकों ने मुक्तकंठ से सराहा।
जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक कौशल का जीवंत मंच
जनसंचार विभाग की छात्रा होने के नाते शिया की यह सफलता मीडिया और अकादमिक क्षेत्र के अंतर्संबंधों को दर्शाती है:
- प्रभावी जनसंवाद: मीडिया के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है कि वे अपनी बात संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावशाली भाषा में रखना सीखें, जिसका व्यावहारिक प्रदर्शन युवा संसद में देखने को मिला।
- समसामयिक विमर्श की पकड़: देश में चल रही राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक नीतियों का गहन अध्ययन ही किसी छात्र को सदन में तर्कसंगत जवाब देने के योग्य बनाता है।
- सार्वजनिक नेतृत्व: युवा संसद जैसे मंच जनसंचार के विद्यार्थियों को भविष्य के पत्रकार, नीति विश्लेषक और जनसंपर्क विशेषज्ञ के रूप में निखारने में सहायक सिद्ध होते हैं।
लोकतांत्रिक चेतना और विधायी प्रक्रिया का संवर्धन
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य भावी पीढ़ी को भारतीय संविधान की आत्मा, संसदीय मर्यादा और विधायी प्रक्रियाओं से अवगत कराना है। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस 18वीं समूह स्तरीय प्रतियोगिता में कुल 55 विद्यार्थियों ने अलग-अलग भूमिकाओं में भाग लिया था, जिनमें से उत्कृष्ट 6 प्रतिभागियों को चुना गया। शिया का शीर्ष तीन में स्थान बनाना उनकी कड़ी मेहनत, निरंतर अभ्यास और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ का प्रत्यक्ष प्रमाण है।


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