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नवयुग कन्या महाविद्यालय में 'ओपन माइक प्रतियोगिता': वैदेही और निकिता ने जीता पहला स्थान; 21 छात्राओं ने कविता व भाषण से उठाए सामाजिक मुद्दे

नवयुग कन्या महाविद्यालय में ‘ओपन माइक प्रतियोगिता’ का भव्य आयोजन: वैदेही यादव और निकिता दीक्षित बनीं संयुक्त विजेता, कविता और भाषण से गूंजे सामाजिक सरोकार

📍 स्थान: नवयुग कन्या महाविद्यालय, राजेंद्र नगर, लखनऊ | 📅 दिनांक: 15 अक्टूबर 2026 | 🎤 श्रेणी: कॉलेज समाचार, साहित्यिक प्रतियोगिता, छात्र सशक्तिकरण, लखनऊ शिक्षा

लखनऊ: राजधानी के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, साहित्यिक अभिरुचि और स्वतंत्र अभिव्यक्ति कौशल को निखारने के उद्देश्य से एक शानदार ‘ओपन माइक प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की अंग्रेजी साहित्यिक समिति ‘ELAN’ (English Literary Association of Navyug) के तत्वावधान में आयोजित इस मंच पर विभिन्न संकायों की 21 छात्राओं ने कविता, ओजस्वी भाषण, व्यंग्य और हास्य प्रस्तुतियों के जरिए लैंगिक समानता, मानसिक दबाव, मानवीय मूल्यों और सामाजिक रूढ़ियों पर सशक्त विचार प्रस्तुत किए।

📌 ओपन माइक प्रतियोगिता के मुख्य बिंदु:

  • 21 छात्राओं का प्रतिभाग: कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों की छात्राओं ने मंच पर आत्मविश्वास के साथ रखे अपने विचार।
  • शीर्ष विजेता: वैदेही यादव और निकिता दीक्षित ने संयुक्त रूप से प्रथम, शुभी सिंह ने द्वितीय तथा निधि बाजपेयी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
  • विविध व ज्वलंत विषय: छात्राओं ने 'हाँ, मैं लड़की हूँ', 'परफेक्ट बनने का दबाव' और 'श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग' जैसे गंभीर विषयों पर प्रस्तुतियां दीं।
  • सशक्त निर्णायक मंडल: मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी और प्रो. मंजुला यादव ने किया प्रतिभागियों का निष्पक्ष मूल्यांकन।
  • सफल संचालन व संयोजन: डॉ. रीमा छाबड़ा के संचालन में प्रो. संगीता कोतवाल, प्रो. सीमा सरकार और डॉ. नेहा पांडेय के संयुक्त प्रयासों से कार्यक्रम संपन्न।

📊 ओपन माइक प्रतियोगिता: परिणाम एवं विजेता सूची

स्थान / पुरस्कार विजेता छात्रा का नाम प्रस्तुति का मूल विषय / विधा
प्रथम स्थान (संयुक्त) वैदेही यादव एवं निकिता दीक्षित अंग्रेजी भाषा दबाव पर व्यंग्य कथा / रूढ़िबद्ध भूमिकाएं
द्वितीय स्थान शुभी सिंह साहित्यिक एवं सामाजिक अभिव्यक्ति
तृतीय स्थान निधि बाजपेयी गीता ज्ञान एवं कर्मनिष्ठा का महत्व
सांत्वना पुरस्कार मुस्कान मिश्रा, दीप्ति सेंगर एवं दर्शना उपाध्याय लैंगिक हिंसा विरोध, गीता दर्शन एवं जीवन मूल्य

'जागरूक और विचारशील नागरिक बनना अनिवार्य': प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय

महाविद्यालय की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की संरक्षिका प्रो. मंजुला उपाध्याय ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर समसामयिक परिवेश से जुड़ने की सलाह दी।

“हमारे व्यक्तिगत जीवन को समाज और राजनीति की कई घटनाएं प्रभावित करती हैं। ऐसे में प्रत्येक युवा का दायित्व है कि वह अपने आसपास घट रही घटनाओं के प्रति संवेदनशील रहे, नियमित अध्ययन करे और महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्वतंत्र सोच विकसित करे। मंच पर आकर बोलना एक जागरूक नागरिक बनने की पहली सीढ़ी है।”
— प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय)

मंच पर गूंजे संवेदना और नारी अस्मिता के स्वर

प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने विविध विषयों पर अपनी आवाज बुलंद कर सभागार में उपस्थित दर्शकों को सोचने पर विवश कर दिया:

  • नारी अस्मिता और रूढ़ियों का विरोध: निकिता सिंह ने ‘हाँ, मैं लड़की हूँ’ कविता से स्त्री सम्मान को रेखांकित किया, वहीं वर्तिका श्रीवास्तव ने ‘परफेक्ट लड़की बनने का दबाव’ विषय पर समाज की दोहरी अपेक्षाओं पर चोट की।
  • न्याय और सामाजिक संवेदनशीलता: दीप्ति सेंगर ने पीड़ितों को दोषी ठहराने (Victim Blaming) की मानसिकता का विरोध किया, जबकि अरुधंति यादव ने इंसानी समानता और दूसरों को आंकने की प्रवृत्ति पर बात रखी।
  • आध्यात्म और दर्शन: मुस्कान मिश्रा और निधि ने श्रीमद्भगवद्गीता की कालजयी शिक्षाओं और निष्काम कर्म के महत्व को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समझाया।
  • हास्य व व्यंग्य: वैदेही यादव ने समाज में अंग्रेजी भाषा और उच्चारण को लेकर बने गैर-जरूरी दबाव को एक हास्यपूर्ण कहानी के जरिए प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
  • मानवता की रक्षा: अंशिका सिंह ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि 'ईश्वर नहीं, बल्कि आज हमारी इंसानियत खतरे में है', जिसे बचाने का संकल्प युवाओं को लेना होगा।

'मंच पर आना ही जीत का परिचायक': निर्णायक मंडल

निर्णायक मंडल की सदस्य मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी ने कहा कि प्रतिभा हर व्यक्ति में निहित होती है, आवश्यकता सिर्फ उसे उचित अभिव्यक्ति देने की होती है। उन्होंने अपनी एक स्वरचित कविता का भावपूर्ण पाठ कर कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी। वहीं, प्रो. मंजुला यादव ने कहा कि जो छात्राएं मंच पर आकर बोलने का साहस जुटाती हैं, वे परिणाम की परवाह किए बिना पहले ही विजेता बन चुकी होती हैं।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रीमा छाबड़ा द्वारा किया गया। अंत में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता कोतवाल ने समस्त अतिथियों, निर्णायकों और छात्राओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर संयोजन समिति की प्रो. सीमा सरकार, डॉ. नेहा पांडेय सहित वरिष्ठ शिक्षिकाएं प्रो. वंदना द्विवेदी और प्रो. विनीता सिंह भी उपस्थित रहीं।

निष्कर्ष: नवयुग कन्या महाविद्यालय का यह ओपन माइक आयोजन केवल एक प्रतियोगिता भर नहीं था, बल्कि इसने छात्राओं को झिझक तोड़कर अपनी मौलिक आवाज, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने का सशक्त अवसर प्रदान किया।

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