ईको गार्डन में NHM कर्मचारियों का आंदोलन तेज: तीसरे दिन भी गूंजा नियमितीकरण व समान वेतन का मुद्दा; CHO ने खून से पत्र लिखकर शासन से लगाई न्याय की गुहार
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हजारों संविदा कर्मचारियों का आंदोलन शनिवार को तीसरे दिन और उग्र हो गया। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे चिकित्सकों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्टों और एएनएम ने शासन के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। आंदोलन के दौरान एक CHO द्वारा अपने खून से पत्र लिखकर शासन का ध्यान आकर्षित करने की घटना ने कर्मचारियों की गहरी पीड़ा, आक्रोश और न्याय की उत्कट अपेक्षा को उजागर कर दिया।
📌 NHM महाआंदोलन के प्रमुख बिंदु:
- लगातार तीसरे दिन धरना: 75 जनपदों से पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने ईको गार्डन में डेरा डाला।
- खून से लिखा पत्र: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) ने अपने खून से पत्र लिखकर सरकार से नियमितीकरण व सेवा सुरक्षा की गुहार लगाई।
- सभी संवर्ग एकजुट: डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, एएनएम, काउंसलर, ऑप्टोमेट्रिस्ट और डेंटल सर्जन एक मंच पर।
- समान कार्य-समान वेतन की मांग: वर्षों से सीमित मानदेय पर काम कर रहे कर्मियों को ग्रेड-पे के अनुसार वेतन और समयबद्ध वेतनवृद्धि देने की मांग।
- आर-पार की लड़ाई: संयुक्त संघर्ष समिति ने दो टूक कहा कि जब तक ठोस शासनादेश जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
📊 संयुक्त संघर्ष समिति की 5 प्रमुख मांगें: एक नजर में
| क्र.सं. | प्रमुख मांग | विस्तृत विवरण व अपेक्षाएं |
|---|---|---|
| 1 | समान कार्य-समान वेतन | पारदर्शी वेतन नीति लागू हो, पद और कार्य के अनुसार ग्रेड-पे तय किया जाए एवं सेवाकाल के आधार पर वार्षिक इंक्रीमेंट मिले। |
| 2 | नियमितीकरण व समायोजन | राज्य स्वास्थ्य संवर्ग में समायोजन; 2011 व 2018 के भारत सरकार के निर्देशों के तहत CHO संवर्ग को नियमित किया जाए। |
| 3 | पारदर्शी स्थानांतरण नीति | पारिवारिक परिस्थितियों, महिला कर्मियों की समस्याओं और आपसी सहमति (म्यूचुअल) के आधार पर गृह जनपद में ट्रांसफर की सुविधा। |
| 4 | सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा | समस्त पात्र NHM कर्मचारियों को ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी तथा व्यापक स्वास्थ्य बीमा का वैधानिक लाभ मिले। |
| 5 | आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा | ठेकेदारी शोषण बंद कर आउटसोर्स कर्मियों को DHS अथवा प्रस्तावित आउटसोर्स सेवा निगम में समायोजित कर सेवा सुरक्षा दी जाए। |
दूरदराज के गांवों में रीढ़ हैं एनएचएम कर्मी, फिर भी भविष्य असुरक्षित
संयुक्त संघर्ष समिति के वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (HWC) पर मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन और संचारी रोग नियंत्रण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने का काम एनएचएम संविदा कर्मी ही कर रहे हैं।
“कोरोना महामारी से लेकर सामान्य दिनों तक सीमित संसाधनों में 24 घंटे सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों को न तो जॉब सिक्योरिटी मिली है और न ही सामाजिक सुरक्षा। समान कार्य करने के बावजूद नियमित कर्मचारियों से एक-चौथाई वेतन पर काम कराना सीधे तौर पर श्रम का शोषण है।”
— संयुक्त एनएचएम संघर्ष समिति प्रतिनिधिमंडल
धरना स्थल पर प्रमुख संगठनों की एकजुटता
ईको गार्डन में आयोजित इस व्यापक सत्याग्रह में विभिन्न संवर्गों के प्रांतीय नेताओं ने मंच साझा किया:
- संयुक्त एनएचएम संघ: प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता, महामंत्री योगेश उपाध्याय और वरिष्ठ उपाध्यक्ष अम्मार जाफरी।
- आरबीएसके (RBSK) व चिकित्सक संवर्ग: डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डेंटल सर्जन एवं आयुष चिकित्सक।
- नर्सिंग एवं पैरामेडिकल: हरिओम सिंह (नर्सिंग संवर्ग), प्रेमलता पाण्डेय (एएनएम संघ), सुरेंद्र पाल (बीपीसीएम महामंत्री)।
- परामर्शदाता एवं तकनीकी विंग: ज्योतिर्मि राय (काउंसलर संवर्ग), विजय बाजपेई, कमलेश कश्यप सहित टीबी कार्यक्रम, लैब टेक्नीशियन और ऑप्टोमेट्रिस्ट के प्रतिनिधि।
सार्थक संवाद से ही निकलेगा समाधान: शासन से अपील
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी जनसेवा और स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन वर्षों से अनसुनी की जा रही मांगों ने उन्हें सड़क पर उतरने को मजबूर किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से अपील की कि वे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाएं और समयबद्ध समाधान की घोषणा करें।


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