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'शिक्षा से ही सशक्त होगा पसमांदा समाज': मंत्री दानिश आजाद अंसारी व NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने रखी सशक्तिकरण की रूपरेखा

पसमांदा मुस्लिम संवाद: शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय पर जोर; अंतिम पंक्ति तक सरकारी योजनाओं की पहुंच और सम्मानजनक भागीदारी का संकल्प

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 06 अक्टूबर 2026 | 🤝 श्रेणी: पसमांदा सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा एवं शासन

लखनऊ: अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के तत्वावधान में राजधानी लखनऊ में ‘पसमांदा मुस्लिम संवाद: हालात, समस्या और समाधान’ विषयक राज्यस्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जावेद मलिक के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में पसमांदा समाज के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक उत्थान पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना, आधुनिक शिक्षा का विस्तार और सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करना ही वास्तविक सशक्तिकरण का मार्ग है।

📌 पसमांदा संवाद कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:

  • मूल संकल्प: ‘शिक्षित समाज, आत्मनिर्भर परिवार, सक्षम युवा और सम्मानजनक भागीदारी’ को जमीनी स्तर पर उतारने का आह्वान।
  • मानवाधिकार आयोग की पहल: एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने समाज की समस्याओं और सुझावों को लिखित रूप में शासन स्तर पर प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया।
  • अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच: यूपी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कौशल विकास, आधुनिक शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
  • बेटियों की शिक्षा व डिजिटल क्रांति: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शाहिद अख्तर ने उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और डिजिटल साक्षरता पर जोर दिया।
  • पारंपरिक हुनर को बाजार: पारंपरिक कारीगरी और कुटीर उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आर्थिक स्वावलंबन बढ़ाने की रूपरेखा पेश की गई।

📊 ‘पसमांदा मुस्लिम संवाद’ — वक्ता एवं विचार मैट्रिक्स

प्रमुख अतिथि / वक्ता पद / दायित्व मुख्य विचार / वक्तव्य
प्रियंक कानूनगो सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) शिक्षा ही बुनियादी जरूरतों की पूर्ति का सबसे बड़ा माध्यम; समस्याओं को लिखित दस्तावेज बनाकर सरकार तक ले जाएंगे।
दानिश आजाद अंसारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उत्तर प्रदेश सरकार कौशल विकास और शिक्षा से जुड़े बिना विकास अधूरा; योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाना लक्ष्य।
डॉ. शाहिद अख्तर कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्था बेटियों की शिक्षा, उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति और डिजिटल साक्षरता ही प्रगति की स्थायी नींव है।
गुरु प्रकाश पासवान राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सच्चा लोकतंत्र तभी सफल है जब हर वर्ग को समान अवसर और विकास में सकारात्मक साझेदारी मिले।
इदरीश मुल्तानी अध्यक्ष, पसमांदा अध्ययन समिति (महाराष्ट्र) समस्याएं गिनाने के बजाय तथ्य आधारित नीति और पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता।

"अधिकारों की जानकारी ही सुरक्षा का पहला माध्यम": प्रियंक कानूनगो

समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि पसमांदा समाज की बुनियादी समस्याओं को जिस संगठित रूप से नीति-निर्माताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए था, उसमें लंबे समय तक कमी रही है।

"मानवाधिकार का वास्तविक अर्थ केवल कागजी कानून नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसरों की उपलब्धता है। अधिकारों की सही समझ ही उनके संरक्षण की सबसे मजबूत ढाल है। इस संवाद के निष्कर्षों को ठोस प्रस्ताव बनाकर शासन स्तर पर निस्तारण हेतु भेजा जाएगा।"
— प्रियंक कानूनगो (सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग)

शिक्षा और कौशल को प्राथमिकता दे पसमांदा परिवार: दानिश आजाद अंसारी

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि डबल इंजन सरकार की नीतियों में तुष्टीकरण की जगह 'सबका साथ, सबका विकास' का भाव निहित है। प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और छात्रवृत्ति योजनाओं का सर्वाधिक लाभ पिछड़े और वंचित वर्गों को मिल रहा है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा और वोकेशनल ट्रेनिंग से जोड़ें ताकि युवा केवल नौकरी मांगने वाले न रहें, बल्कि आधुनिक बाजार में अपनी प्रतिभा के दम पर आत्मनिर्भर उद्यमी बन सकें।

पारंपरिक कारीगरी और डिजिटल इकोनॉमी का मेल

महाराष्ट्र सरकार की पसमांदा अध्ययन समिति के अध्यक्ष इदरीश मुल्तानी और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने रेखांकित किया कि पसमांदा समाज में बुनकर, दस्तकार, धातु शिल्पी और कुटीर उद्योगों से जुड़े हुनरमंदों की विशाल आबादी है।

इन पारंपरिक पेशों को आधुनिक पैकेजिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और मुद्रा ऋण योजनाओं से जोड़कर आय में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। विरोध और उपेक्षा की पुरानी राजनीति से बाहर निकलकर सकारात्मक साझेदारी के रास्ते पर चलना ही इस वर्ग के हित में है।

अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच की पहल

आयोजक एवं अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जावेद मलिक ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संवाद पूरे प्रदेश में पसमांदा चेतना को नई दिशा देने का माध्यम बनेगा। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रबुद्धजनों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

निष्कर्ष: यह संवाद कार्यक्रम पसमांदा समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए राजनीतिक वादों से आगे बढ़कर शिक्षा, कौशल और प्रशासनिक योजनाओं की सीधी पहुंच को मुख्य आधार बनाने का एक सशक्त प्रयास है।

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