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'मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी': काशी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण; भावुक हुईं अकी आबे, CM योगी ने किया अनावरण

‘मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी’: रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण; जेवर के पास 500 एकड़ में बसेगी जापानी सिटी

📍 स्थान: रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, वाराणसी | 📅 दिनांक: 07 अक्टूबर 2026 | 🌏 श्रेणी: भारत-जापान संबंध, काशी-क्योटो पार्टनरशिप, औद्योगिक निवेश, विदेश नीति एवं उत्तर प्रदेश शासन

वाराणसी: भारत और जापान के बीच कूटनीतिक विश्वास और सांस्कृतिक आत्मीयता को ऐतिहासिक विस्तार देते हुए बुधवार को काशी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का भव्य लोकार्पण किया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे (दिवंगत शिंजो आबे की धर्मपत्नी) ने संयुक्त रूप से इस स्मृति गलियारे का अनावरण किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का रिश्ता हितों (Interest) पर नहीं, बल्कि अटूट विश्वास (Trust) पर आधारित था। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की पहली शपथ ली थी; जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उनके सच्चे मित्र की स्मृति में बने इस कॉरिडोर का लोकार्पण एक अद्भुत संयोग है।

📌 लोकार्पण समारोह एवं संबोधन के प्रमुख बिंदु:

  • आबे मेमोरियल कॉरिडोर का अनावरण: काशी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने वाले गलियारे का उद्घाटन, जो युवा पीढ़ी के लिए वैश्विक नेतृत्व का ‘जीवंत क्लासरूम’ बनेगा।
  • 500 एकड़ में जापानी सिटी: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के ईडा (YEIDA) क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी कंपनियों के लिए डेडिकेटेड स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी विकसित की जा रही है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन पार्टनरशिप: जापान का यामानाशी प्रान्त उत्तर प्रदेश का आधिकारिक 'ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर' बना; इन्वेस्ट यूपी में सक्रिय हुई विशेष 'यामानाशी डेस्क'।
  • भावुक हुईं अकी आबे: पति शिंजो आबे के काशी प्रेम और 2015 की गंगा आरती के संस्मरण साझा करते हुए अकी आबे की आंखें छलक आईं; रुद्राक्ष के 108 प्रतीकों को जापानी बौद्ध परंपरा से जोड़ा।
  • राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष: वर्ष 2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने पर यह कॉरिडोर अमृत पर्व की पहली ऐतिहासिक भेंट है।

📊 भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी एवं यूपी प्रोजेक्ट्स: एक नजर में

परियोजना / पैमाना विवरण व रणनीतिक महत्व
लोकार्पित स्मारक आबे मेमोरियल कॉरिडोर (रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, वाराणसी)
औद्योगिक टाउनशिप 500 एकड़ में जापानी सिटी (यमुना एक्सप्रेसवे / जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र)
ऊर्जा सहयोग यामानाशी प्रान्त के साथ ग्रीन हाइड्रोजन व क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप
प्रौद्योगिकी फोकस सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स व प्रिसिजन इंजीनियरिंग
सांस्कृतिक सूत्र काशी-क्योटो पार्टनरशिप तथा बुद्ध सर्किट (सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती)

"प्रोटोकॉल नहीं, आत्मीय रिश्ता था": 2007 से 2022 तक की ऐतिहासिक यात्रा

मुख्यमंत्री योगी ने दोनों महान नेताओं के संबंधों के ऐतिहासिक पड़ावों को साझा किया:

  • 2007: गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जापान गए, जहां शिंजो आबे से प्रथम भेंट हुई। उसी वर्ष आबे ने भारतीय संसद में कहा था—'मजबूत भारत जापान के और मजबूत जापान भारत के हित में है।'
  • 2014 एवं 2015: काशी-क्योटो सिस्टर सिटी करार हुआ और दिसंबर 2015 में दोनों नेताओं ने दशाश्वमेध घाट पर विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लिया।
  • 2017 एवं 2018: अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया गया। इसके बाद शिंजो आबे ने पीएम मोदी को यामानाशी स्थित अपने पैतृक आवास पर आमंत्रित किया।
  • 2021 एवं 2022: भारत ने शिंजो आबे को दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। सितंबर 2022 में दुखद निधन के बाद प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे।
"गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि स्वार्थ रहित मित्र मिलना इस संसार में दुर्लभ है। दुनिया आज इंटरेस्ट देखकर संबंध बनाती है, लेकिन भारत और जापान की मित्रता ट्रस्ट पर टिकी है। जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का पारस्परिक विश्वास बन जाए, तो इतिहास की धारा बदल जाती है।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

जापान के पास प्रिसिजन तो यूपी के पास स्केल: 500 एकड़ में जापानी सिटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश अब जापानी निवेशकों के लिए देश का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के नजदीक यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में 500 एकड़ भूमि पर विशेष जापानी सिटी विकसित की जा रही है। इन्वेस्ट यूपी में निवेशकों की सुविधा के लिए डेडिकेटेड 'यामानाशी डेस्क' स्थापित की गई है।

जापान के पास अत्याधुनिक तकनीक और अनुभव है, जबकि उत्तर प्रदेश के पास 25 करोड़ का विशाल बाजार, सबसे युवा कार्यबल और देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे व इंटरनेशनल एयरपोर्ट नेटवर्क मौजूद है। दोनों मिलकर सेमीकंडक्टर, एआई, मैग्लेव टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

जापान ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’, तो यूपी ‘लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी’

सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान यदि उगते सूर्य की भूमि है, तो उत्तर प्रदेश भगवान श्रीराम के सूर्यवंश की पावन धरा है। जापान की आध्यात्मिक आस्था का मार्ग उत्तर प्रदेश से होकर ही प्रशस्त होता है, क्योंकि भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े छह महातीर्थ—सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा—उत्तर प्रदेश में ही स्थित हैं। काशी और क्योटो दोनों ने यह सिखाया है कि अपनी प्राचीन संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास कैसे किया जाता है।

आबे को याद कर छलके अकी के आंसू; 108 रुद्राक्ष की दिव्यता को सराहा

लोकार्पण अवसर पर जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे अपने पति को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि शिंजो आबे जब 2015 में काशी से लौटे थे, तो वे महीनों तक गंगा आरती की दिव्यता और काशी की ऊर्जा की चर्चा करते रहते थे।

उन्होंने कहा कि यदि आज शिंजो जीवित होते तो काशी में अपने नाम पर बने इस स्मारक और रुद्राक्ष सेंटर को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते। अकी आबे ने रेखांकित किया कि रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की दीवारों पर 108 रुद्राक्ष अंकित हैं; जापान में भी 108 का अंक अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां नए साल और शुभ अवसरों पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाकर विश्व शांति की कामना की जाती है।

मुख्यमंत्री योगी ने अकी आबे को काशी की विश्वप्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी से हस्तनिर्मित मोर का स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित जापान से पधारे उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, अधिकारी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: काशी की पावन धरती पर बना ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ न केवल दो महान नेताओं की अमर मित्रता का प्रतीक है, बल्कि 2047 के विकसित भारत और आधुनिक जापान के बीच ज्ञान, नवाचार और औद्योगिक सहभागिता का एक शाश्वत सेतु है।

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