पाकिस्तान तक फैले 5 लाख फर्जी ई-मेल सिंडिकेट का पर्दाफाश: यूपी ATS ने कानपुर से अंकित को किया गिरफ्तार, स्कूलों और दिलजीत दोसांझ के शो को दी थी बम की धमकी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) ने देशविरोधी गतिविधियों और साइबर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए कानपुर नगर से 24 वर्षीय अंकित शंखवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी वाई-फाई और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए थोक में फर्जी ई-मेल आईडी तैयार कर पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों में सक्रिय असामाजिक तत्वों को बेचता था और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में लेता था। जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन्हीं फर्जी आईडी का उपयोग दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई के नामचीन स्कूलों, मुंबई मेयर कार्यालय, एक बॉलीवुड स्टार के आवास और मशहूर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर शो को बम से उड़ाने की धमकियां भेजने में किया गया था।
📌 यूपी एटीएस कार्रवाई: मुख्य बिंदु
- 5 लाख ई-मेल का डेटाबेस: बरामद लैपटॉप की एक्सेल शीट से 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी मय पासवर्ड, रिकवरी मेल और 2FA क्रेडेंशियल्स बरामद।
- क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन: बाइनेंस क्रिप्टो वॉलेट के जरिए यूएसडीटी (USDT) में भुगतान; बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम से 6,000 USDT लेने के साक्ष्य।
- धमकी का दायरा: नोएडा, गुरुग्राम व दिल्ली के स्कूलों, मुंबई मेयर ऑफिस (23 अक्टूबर) और दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट को बम से उड़ाने की धमकी।
- आतंकी संगठनों के नाम का दुरुपयोग: धमकी भरे ईमेल में 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' और 'बब्बर खालसा' के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
- अंतरराष्ट्रीय संपर्क: पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये, मिस्र आदि देशों के संदिग्ध विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप चैट और संपर्कों का खुलासा।
📊 साइबर नेटवर्क और बरामदगी का संक्षिप्त विवरण
| मानक / बिंदु | जांच में सामने आए तथ्य |
|---|---|
| गिरफ्तार आरोपी | अंकित शंखवार (उम्र: 24 वर्ष), निवासी: कानपुर नगर |
| ऑपरेशन अवधि | वर्ष 2021 से लगातार फर्जी आईडी जनरेशन और सेलिंग का कार्य |
| बरामद डेटाबेस | लैपटॉप की एक्सेल फाइलों में करीब 5,00,000 (5 लाख) ई-मेल आईडी |
| भुगतान का माध्यम | बाइनेंस क्रिप्टो वॉलेट (USDT क्रिप्टोकरेंसी) |
| धमकी भरे मामलों से जुड़ाव | 12 अक्टूबर नोएडा स्कूल धमकी, 23 अक्टूबर मुंबई मेयर ऑफिस व दिलजीत शो थ्रेट |
मॉडस ऑपरेंडी: प्रॉक्सी नेटवर्क, फेसबुक ग्रुप्स और विदेशी सिंडिकेट
यूपी एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी अंकित वर्ष 2021 से इस गैर-कानूनी डिजिटल नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वह विभिन्न वाई-फाई नेटवर्क्स, प्रॉक्सी सर्वर और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क्स (VPN) का सहारा लेकर अपनी असली पहचान व आईपी एड्रेस छुपाता था।
“आरोपी इन फर्जी बल्क ई-मेल आईडी को फेसबुक और डार्क वेब से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए विदेशी खरीदारों को बेचता था। शुरुआती पड़ताल में उसके तार पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये और मिस्र में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े पाए गए हैं। बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम को बड़ी संख्या में आईडी देने के बदले 6,000 यूएसडीटी (USDT) का भुगतान क्रिप्टो वॉलेट में प्राप्त हुआ था।”
स्कूलों से लेकर दिलजीत दोसांझ के शो और बॉलीवुड स्टार तक धमकियां
बीते दिनों देश के कई महानगरों में ईमेल के जरिए सिलसिलेवार बम धमाकों की फर्जी सूचनाएं भेजकर दहशत फैलाने की कोशिश की गई थी। तकनीकी जांच में साबित हुआ कि उन संदेशों में इस्तेमाल की गई ईमेल आईडी अंकित के पास मौजूद डेटाबेस से ही बेची गई थीं:
- एनसीआर के स्कूल: 12 अक्टूबर 2026 को नोएडा, गुरुग्राम और दिल्ली के कई स्कूलों को धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। इन ईमेल में बब्बर खालसा और खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम का सहारा लिया गया था।
- दिलजीत दोसांझ का लाइव शो: प्रसिद्ध गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर में होने वाले कॉन्सर्ट को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।
- बॉलीवुड अभिनेता का आवास: मुंबई में एक प्रमुख बॉलीवुड स्टार के आवास को बम से उड़ाने का ईमेल भेजा गया था।
- मुंबई मेयर कार्यालय: 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई नगर निगम के मेयर कार्यालय को विस्फोट से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी।
लखनऊ एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज; कस्टडी रिमांड की तैयारी
अंकित शंखवार के पास से बरामद लैपटॉप की तकनीकी जांच जारी है। बरामद फाइलों में लाखों ई-मेल खातों के पासवर्ड, सेकेंडरी रिकवरी डिटेल्स और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड्स दर्ज पाए गए हैं, जिससे इस नेटवर्क के किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय स्पैम और साइबर टेरर सिंडिकेट से जुड़े होने की आशंका पुख्ता होती है।
इस संबंध में यूपी एटीएस के लखनऊ थाने में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। एटीएस अब आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) पर लेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि देश के भीतर उसके कौन-कौन से साथी सक्रिय हैं और विदेशी खरीदारों का वास्तविक हैंडलर कौन था।

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