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योगी कैबिनेट की मुहर: लखनऊ, अयोध्या, नोएडा समेत 18 शहरों में GCC मॉडल पर चलेंगी 1725 नई ई-बसें; किराया तय करेगी सरकार

यूपी के 18 शहरों में दौड़ेंगी 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें: योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी; प्रति बस ₹40 लाख तक का सरकारी अनुदान, GCC मॉडल पर होगा संचालन

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 09 अक्टूबर 2026 | 🚌 श्रेणी: नगरीय परिवहन, उत्तर प्रदेश कैबिनेट निर्णय, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), लखनऊ समाचार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल, आधुनिक और सुगम बनाने के लिए योगी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित (AC) इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। इन बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों के माध्यम से कराया जाएगा, जबकि डिपो के लिए भूमि निशुल्क दी जाएगी और किराए का निर्धारण राज्य सरकार करेगी।

📌 कैबिनेट निर्णय के प्रमुख बिंदु:

  • 1725 एसी ई-बसें: लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, आगरा और नोएडा-जेवर समेत 18 शहरों में होगा संचालन।
  • प्रति बस भारी अनुदान: 12 मीटर लंबी बस की खरीद पर ₹40 लाख और 9 मीटर लंबी बस पर ₹35 लाख का सरकारी अनुदान मिलेगा।
  • ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल: बस खरीद, ड्राइवर, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रखरखाव ऑपरेटर का होगा; किराया सरकार तय करेगी।
  • 12 वर्षों का अनुबंध: निजी सेवा प्रदाताओं के साथ वाणिज्यिक संचालन की तिथि से 12 साल के लिए अनुबंध किया जाएगा।
  • डिपो के लिए फ्री जमीन: नगर निगम और नोएडा विकास प्राधिकरण बस डिपो निर्माण हेतु निशुल्क भूमि उपलब्ध कराएंगे।

📊 उत्तर प्रदेश ई-बस परियोजना 2026: एक नजर में

पैमाना / विवरण आधिकारिक प्रावधान
कुल नई ई-बसें 1,725 वातानुकूलित (AC) इलेक्ट्रिक बसें
कवर किए गए शहर 18 प्रमुख शहर (जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र सहित)
संचालन मॉडल ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल
सरकारी सब्सिडी दरें ₹40 लाख (12 मीटर बस) | ₹35 लाख (9 मीटर बस)
अनुबंध अवधि वाणिज्यिक शुरुआत से 12 वर्ष
डिपो हेतु भूमि प्रावधान नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा पूर्णतः निशुल्क

ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल: क्या है ऑपरेटर और सरकार की भूमिका?

सार्वजनिक परिवहन के इस नए विस्तार में वित्तीय जोखिम और तकनीकी रखरखाव को संतुलित रखने के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल को चुना गया है:

  • निजी ऑपरेटर का दायित्व: इलेक्ट्रिक बसों की खरीद, डिपो में चार्जिंग स्टेशन व आवश्यक उपकरणों की स्थापना, कुशल चालकों और तकनीकी स्टाफ की तैनाती तथा बसों का समय पर रखरखाव पूरी तरह ऑपरेटर के जिम्मे होगा।
  • राज्य सरकार का नियंत्रण: यात्रियों से वसूला जाने वाला टिकट किराया राज्य सरकार द्वारा तय किया जाएगा। निजी ऑपरेटरों को उनके द्वारा तय मानकों के आधार पर किलोमीटर और परिचालन प्रदर्शन के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
  • वित्तीय प्रोत्साहन: नई ई-बसों को खरीदने में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 12 मीटर की बस पर ₹40 लाख और 9 मीटर की बस पर ₹35 लाख का एकमुश्त पूंजीगत अनुदान प्रदान करेगी।

इन 18 शहरों में शुरू होगा वातानुकूलित ई-बसों का नेटवर्क

नगरीय परिवहन निदेशालय के अंतर्गत प्रदेश के धार्मिक, औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्रों को जोड़ते हुए निम्नलिखित 18 शहरों में इन 1725 एसी ई-बसों का बेड़ा उतारा जाएगा:

1. लखनऊ | 2. कानपुर | 3. वाराणसी | 4. प्रयागराज | 5. अयोध्या | 6. गोरखपुर | 7. आगरा | 8. मथुरा-वृंदावन | 9. नोएडा (जेवर सहित) | 10. गाजियाबाद | 11. मेरठ | 12. बरेली | 13. अलीगढ़ | 14. मुरादाबाद | 15. झांसी | 16. सहारनपुर | 17. फिरोजाबाद | 18. शाहजहांपुर

वर्तमान स्थिति: 15 नगर निगमों में पहले से दौड़ रहीं 743 बसें

उत्तर प्रदेश में अभी 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 700 बसें पहले से जीसीसी मॉडल पर सफलतापूर्वक चल रही हैं। अब 1725 नई वातानुकूलित बसों के जुड़ने से प्रदेश का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा 2,400 से अधिक हो जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक इलेक्ट्रिक सिटी बसें संचालित करने वाले राज्यों में शीर्ष पर पहुंच जाएगा।

पर्यावरणीय व जनहित प्रभाव: यह कदम न केवल शहरी वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि दैनिक यात्रियों, छात्रों व कामकाजी नागरिकों को किफायती दर पर सुरक्षित, प्रदूषण-मुक्त और वातानुकूलित यात्रा की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराएगा।

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