चरित्र सत्यापन के इंतजार में नहीं अटकेगी सरकारी नौकरी: योगी सरकार ने जारी की नई एकीकृत नीति, चयनित अभ्यर्थियों को सशर्त तत्काल मिलेगा नियुक्ति पत्र
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चयनित अभ्यर्थियों को अब पुलिस और चरित्र सत्यापन (Character & Antecedent Verification) की लंबी प्रक्रिया के चलते नियुक्ति के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नई एकीकृत नीति अधिसूचित कर दी है। इसके तहत पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान भी अभ्यर्थियों को शर्तों के साथ नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा और सत्यापन रिपोर्ट संतोषजनक मिलने पर सेवा की पुष्टि कर दी जाएगी।
📌 नई सत्यापन नीति: 6 बड़े बदलाव
- सत्यापन लंबित रहने पर भी नियुक्ति: स्वघोषणा पत्र और निर्धारित प्रपत्र लेकर अभ्यर्थी को सशर्त नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा।
- 30 दिन की सख्त समय-सीमा: पुलिस और जिलाधिकारियों को 30 दिनों के भीतर सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी; विलंब पर गृह विभाग सीधी कार्रवाई करेगा।
- पुलिस के चक्करों से मुक्ति: सामान्य मामलों में पुलिस न तो घर जाकर पूछताछ करेगी और न ही थाने में तलब करेगी; सत्यापन केवल आधिकारिक रिकॉर्ड से होगा।
- सिर्फ FIR से उम्मीदवारी रद्द नहीं: केवल मुकदमा दर्ज होने या जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी अयोग्य नहीं होगा; अपराध की गंभीरता और अदालती स्थिति से होगा फैसला।
- नेचुरल जस्टिस (सुनवाई का अवसर): प्रतिकूल रिपोर्ट मिलने की दशा में जिलाधिकारी अभ्यर्थी को व्यक्तिगत या ऑनलाइन माध्यम से पक्ष रखने का मौका देंगे।
- दोबारा सत्यापन नहीं: पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा सत्यापन नहीं होगा; पूर्व विभाग से ही रिकॉर्ड लिया जाएगा।
📊 चरित्र सत्यापन की पुरानी व्यवस्था बनाम नई एकीकृत नीति
| नियम / मानक | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (2026 नीति) |
|---|---|---|
| नियुक्ति पत्र जारी होना | सत्यापन रिपोर्ट आने तक पूरी तरह स्थगित | सत्यापन लंबित रहते हुए भी सशर्त जारी होगा |
| सत्यापन की समय-सीमा | कोई निश्चित सीमा नहीं (महीनों का विलंब) | अधिकतम 30 दिन (गृह विभाग द्वारा मॉनिटरिंग) |
| पुलिस की पूछताछ / जांच | घर पर पूछताछ व थानों में व्यक्तिगत उपस्थिति | घर जाने या बुलाने पर रोक; केवल उपलब्ध रिकॉर्ड से जांच |
| आपराधिक मुकदमों की स्थिति | FIR दर्ज होने पर भी उम्मीदवारी निरस्त होने का डर | केस की प्रकृति, आरोप तय होने या दोषसिद्धि पर ही निर्णय |
| प्रतिकूल रिपोर्ट पर कार्रवाई | सीधे चयन या नियुक्ति निरस्त | डीएम स्तर पर ऑनलाइन/ऑफलाइन सुनवाई का मौका |
प्रमुख सचिव एम. देवराज ने जारी किया शासनादेश; संवेदनशील पदों पर पूर्व अनुमोदन अनिवार्य
प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व के सभी बिखरे हुए नियमों और शासनादेशों को समाप्त कर यह एकीकृत व्यवस्था लागू की गई है। नियुक्ति प्राधिकारी अब चयनित अभ्यर्थी से निर्धारित प्रारूप पर सत्यापन प्रपत्र और स्वघोषणा पत्र (Self-Declaration) प्राप्त कर तत्काल नियुक्ति पत्र जारी करेंगे।
“सुरक्षा और गोपनीयता की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील पदों पर विस्तृत और अंतिम सत्यापन पूरा होने के बाद ही नियुक्ति दी जाएगी। ऐसे विशिष्ट मामलों में तय प्रक्रिया के तहत माननीय मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।”
आपराधिक मुकदमों पर राहत: केवल FIR से नहीं छिनेगी नौकरी
नई नीति में आपराधिक मामलों से जुड़े प्रावधानों को तर्कसंगत और न्यायोचित बनाया गया है:
- स्वतः अयोग्यता नहीं: केवल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या न्यायालय में चार्जशीट दाखिल होने मात्र से किसी अभ्यर्थी की उम्मीदवारी स्वतः निरस्त नहीं होगी।
- गंभीर बनाम सामान्य अपराध: जघन्य और नैतिक पतन से जुड़े गंभीर अपराधों में न्यायालय द्वारा आरोप तय (Charges Framed) होने या दोषसिद्धि पर अयोग्यता लागू होगी। अन्य सामान्य मामलों में अंतिम दोषसिद्धि (Conviction) अनिवार्य होगी।
- बरी होने व समझौते पर राहत: अदालत से दोषमुक्त होने, कानूनी रूप से समझौता हो जाने अथवा क्षम्य मामूली अपराधों में अभ्यर्थी को चयन का लाभ मिलेगा।
- सत्यनिष्ठा अनिवार्य: अभ्यर्थी को अपने विरुद्ध दर्ज मुकदमों की सटीक जानकारी स्वघोषणा पत्र में देनी होगी। जानबूझकर तथ्य छिपाने या गलत हलफनामा देने पर नियुक्ति तत्काल निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभ्यर्थियों को राहत: न पुलिस का छापा, न थानों के चक्कर
पारंपरिक सत्यापन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को थानों और एलआईयू (LIU) दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है:
- डिजिटल व अभिलेखीय जांच: पुलिस और खुफिया इकाइयां उपलब्ध डेटाबेस और अपराध अभिलेखों (CCTNS आदि) से जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगी।
- 30 दिन का समय: पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और जिलाधिकारियों को संदर्भ मिलने के 30 दिन में रिपोर्ट भेजनी होगी। तय समय पर रिपोर्ट न मिलने पर मामला गृह विभाग को भेजा जाएगा जो इसे प्राथमिकता पर निस्तारित कराएगा।
- दूसरे राज्यों में निवास: पिछले 5 वर्षों में यदि अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश से बाहर 1 वर्ष या उससे अधिक समय तक रहा है, तो उस राज्य की पुलिस से अंतरराज्यीय समन्वय के जरिए रिपोर्ट ली जाएगी।
सभी निगमों, परिषदों और लंबित मामलों पर भी लागू होगी नीति
यह एकीकृत व्यवस्था केवल शासन के मुख्य विभागों तक सीमित नहीं रहेगी। यह नीति प्रदेश के सभी सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), निगमों, विकास प्राधिकरणों, परिषदों, शैक्षणिक व स्वायत्त संस्थानों तथा स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्तियों पर समान रूप से लागू होगी। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में चरित्र सत्यापन के कारण जितने भी पुराने मामले लंबित हैं, उनका निस्तारण भी इसी नई नीति के अनुसार किया जाएगा।

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