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सीएम योगी का बड़ा संदेश: 'जाति की जड़ता समाज को बांटती है, साझी आस्था एक सूत्र में पिरोती है; अयोध्या दीपोत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक'

'जाति की जड़ता समाज को बांटती है, साझी आस्था और संस्कृति एक सूत्र में पिरोती है': मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के जरिए दिया सामाजिक समरसता का संदेश

📍 स्थान: लखनऊ / अयोध्या धाम | 📅 दिनांक: 03 नवंबर 2026 | 🪔 श्रेणी: अयोध्या दीपोत्सव, सामाजिक समरसता, उत्तर प्रदेश शासन, मुख्यमंत्री संदेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पावन दीपोत्सव महापर्व के अवसर पर प्रदेश व देशवासियों को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति की संकीर्ण जड़ता समाज को खंडित करती है, जबकि साझी आस्था, परंपरा और संस्कृति पूरे समाज को एक अटूट सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। उन्होंने श्री अयोध्या जी के दीपोत्सव को इसी समावेशी सामाजिक एकता का सबसे जीवंत उदाहरण करार दिया।

📌 मुख्यमंत्री के संदेश के मुख्य बिंदु

  • जातिगत विभाजन पर प्रहार: जाति की जड़ता समाज में विखंडन लाती है, जबकि साझी आस्था और सांस्कृतिक मूल्य सबको एकजुट करते हैं।
  • पहचान जाति से नहीं, सहभागिता से: दीपोत्सव में संत, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी सभी समान श्रद्धा के साथ भागीदार बनते हैं।
  • प्रकाश सबको एक करता है: दीपक अलग-अलग हाथों में जलते हैं, लेकिन उनका दिव्य प्रकाश पूरे समाज को एकाकार कर देता है।
  • सांस्कृतिक शक्ति की पुनस्र्थापना: 2017 से पहले की सरकारों ने सामाजिक एकता की शक्ति की उपेक्षा की; डबल इंजन सरकार ने इसे जन-जन के उत्सव में बदला।
  • समरस समाज की संकल्पना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में रामनगरी की धरोहर आज वैश्विक समरसता का प्रतीक बनी।

📊 अयोध्या दीपोत्सव: सांस्कृतिक चेतना व समरसता का रूपांतरण

आयाम / मानक तथ्य एवं वैचारिक दृष्टिकोण
मूल संदेश जाति से ऊपर उठकर सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता की स्थापना
भागीदारी का स्वरूप धर्माचार्य, विद्यार्थी, कुम्हार, स्वच्छताकर्मी और व्यापारी वर्ग की समान सहभागिता
ऐतिहासिक मोड़ (2017) वर्ष 2017 से भव्य दीपोत्सव की शुरुआत कर विरासत को लोक-उत्सव बनाया गया
दार्शनिक आधार दीप अलग-अलग हाथों में प्रज्वलित होते हैं, लेकिन उनका आलोक पूरे समाज को प्रकाशित करता है

2017 से पहले की सरकारों ने की सांस्कृतिक शक्ति की उपेक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों की विभाजनकारी नीतियों पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व सत्ता में रहे दलों ने केवल जातीय विभाजन को अपनी राजनीति की धुरी बनाया। समाज को जोड़ने वाली हमारी समृद्ध सनातन एवं सांस्कृतिक विरासत की जानबूझकर उपेक्षा की गई।

“वर्ष 2017 में जब डबल इंजन सरकार ने सत्ता संभाली, तो हमने इस संकीर्ण सोच को पूरी तरह बदला। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखकर जन-जन के उत्सव (दीपोत्सव) के रूप में पुनर्स्थापित किया गया।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

पहचान जाति से नहीं, सहभागिता से: समाज को एकाकार करता दीपक का आलोक

मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव के दार्शनिक और सामाजिक मर्म को रेखांकित करते हुए कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और पूज्य संत समाज के आशीर्वाद से आज अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पटल पर भारत की आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है।

  • सबका साझा प्रयास: इस भव्य आयोजन में जहां मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार अपनी कला से जुड़ते हैं, वहीं लाखों छात्र-छात्राएं वालंटियर के रूप में घंटों श्रमदान करते हैं।
  • स्वच्छताकर्मियों का सम्मान: आयोजन स्थल को संवारने वाले स्वच्छता प्रहरियों से लेकर व्यापारिक वर्ग और साधु-संत तक, सभी एक ही धरातल पर खड़े नजर आते हैं।
  • अनेकता में एकता: सरयू तट पर जलने वाले दीप अलग-अलग व्यक्तियों के हाथों से प्रज्वलित होते हैं, लेकिन जब वे एक साथ प्रदीप्त होते हैं तो उनका दिव्य आलोक संपूर्ण मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश स्पष्ट करता है कि अयोध्या का दीपोत्सव मात्र एक दीपोत्सव नहीं, बल्कि जातिवाद, भेदभाव और संकीर्णताओं के अंधकार को समाप्त कर एक समरस, सशक्त और संगठित भारत के निर्माण का आध्यात्मिक उद्घोष है।

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